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सावधान, सोराइटिक दे सकता है गठिया की बीमारी
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 11 Nov 2013 11:42 AM IST
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स्किन पर सोराइटिक धीरे-धीरे सोराइटिक अर्थराइटिस में बदल सकता है। यदि सही समय पर इलाज नहीं कराया तो यह हड्डियों के जोड़ को खराब कर देगा। उसके बाद उसे ठीक कर पाना थोड़ा मुश्किल हो जाता है।
पीजीआई में हर साल 150 मरीज रजिस्टर्ड हो रहे हैं। रविवार को पीजीआई में आयोजित रियुमेटोलॉजी अपडेट-2013 में इंटरनल मेडिसिन के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अमन शर्मा ने कहा कि पहले यह बीमारी पश्चिमी देशों में होती थी।
अब यहां भी इस बीमारी के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। यह मुख्य रूप से हाथ-पैर के नाखूनों के नीचे, कान के पीछे, घुटने, पैर, कोहनी के पास होता है। यह अक्सर बीमारी 40-50 सालों के उम्र में होती। महिला और पुरुष दोनों ही इससे प्रभावित होते हैं। डॉ. अमन ने बताया कि इसका इलाज पीजीआई में उपलब्ध है।
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कार्यक्रम की संचालिका डॉ. शेफाली के शर्मा ने बताया कि कार्यक्रम में डॉ. आनंद मालाविया, डॉ. अशोक कुमार, डॉ. रोहिणी हांडा, डॉ. उमा कुमार, डॉ. राजीव गुप्ता, डॉ. वेद चतुर्वेदी, डॉ. भाखुनी, डॉ. धर्मानंद, डॉ. विनोद, डॉ. एस पांडया पहुंचे और अपने विचार रखे।
इस मौके पर ‘रियुमेटिक डिजीज इन वुमन एंड चिल्ड्रेन करेंट प्रस्पेक्टिव’ पुस्तकरिलीज की गई। इसे डॉ. शैफाली के शर्मा और डॉ. सुजाता ने संपादित किया है।
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पीजीआई में हर साल 150 मरीज रजिस्टर्ड हो रहे हैं। रविवार को पीजीआई में आयोजित रियुमेटोलॉजी अपडेट-2013 में इंटरनल मेडिसिन के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अमन शर्मा ने कहा कि पहले यह बीमारी पश्चिमी देशों में होती थी।
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अब यहां भी इस बीमारी के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। यह मुख्य रूप से हाथ-पैर के नाखूनों के नीचे, कान के पीछे, घुटने, पैर, कोहनी के पास होता है। यह अक्सर बीमारी 40-50 सालों के उम्र में होती। महिला और पुरुष दोनों ही इससे प्रभावित होते हैं। डॉ. अमन ने बताया कि इसका इलाज पीजीआई में उपलब्ध है।
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कार्यक्रम की संचालिका डॉ. शेफाली के शर्मा ने बताया कि कार्यक्रम में डॉ. आनंद मालाविया, डॉ. अशोक कुमार, डॉ. रोहिणी हांडा, डॉ. उमा कुमार, डॉ. राजीव गुप्ता, डॉ. वेद चतुर्वेदी, डॉ. भाखुनी, डॉ. धर्मानंद, डॉ. विनोद, डॉ. एस पांडया पहुंचे और अपने विचार रखे।
इस मौके पर ‘रियुमेटिक डिजीज इन वुमन एंड चिल्ड्रेन करेंट प्रस्पेक्टिव’ पुस्तकरिलीज की गई। इसे डॉ. शैफाली के शर्मा और डॉ. सुजाता ने संपादित किया है।