पंजाब में मुफ्त बिजली का बोझ: पावरकॉम पर सलाना 7000 करोड़ रुपये का पड़ेगा भार, सरकार ने 7452 करोड़ का बकाया भी नहीं चुकाया
पावरकॉम अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर माना कि सरकार के इस एलान से पावरकॉम पर सालाना 7000 करोड़ का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।
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पंजाब सरकार की घरेलू खपतकारों को 300 यूनिट बिजली मुफ्त देने की गारंटी पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड (पावरकॉम) पर भारी पड़ सकती है। इससे पावरकॉम पर सालाना 7000 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। खास बात यह है कि पावरकॉम की 7452 करोड़ रुपये की सब्सिडी का पहले ही सरकार ने भुगतान नहीं किया है। इनमें सरकारी विभागों, कारपोरेशनों, बोर्डों के 2300 करोड़ रुपये बिजली बिल का बकाया शामिल है।
ऐसे में पावरकॉम को लगातार बैंकों से लोन लेकर अपने खर्च पूरे करने पड़ रहे हैं। इस संबंध में पावरकॉम के डायरेक्टर (फाइनेंस) जतिंदर गोयल ने बताया कि पंजाब सरकार की ओर से किए इस एलान से पावरकॉम पर कितना आर्थिक बोझ पड़ेगा, इसका आंकलन किया जा रहा है। उन्होंने माना कि सरकार की तरफ हजारों करोड़ की सब्सिडी बकाया है, जिसकी अदायगी के लिए प्रयास हो रहे हैं।
आंकड़ों के मुताबिक पंजाब में इस समय करीब 71 लाख घरेलू उपभोक्ता हैं, जिन्हें सरकार ने चुनावी वादे के मुताबिक 300 यूनिट बिजली मुफ्त देने का एलान किया है। पावरकॉम अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर माना कि सरकार के इस एलान से पावरकॉम पर सालाना 7000 करोड़ का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।
वह केवल उस सूरत में अगर 300 यूनिट तक बिजली मुफ्त दी जाती है लेकिन अगर सरकार यह फैसला लेती है कि उपभोक्ता ने बेशक 300 से ज्यादा यूनिट बिजली की खपत की हो और उसे 300 यूनिट तो माफ होंगे ही, उस स्थिति में सब्सिडी की राशि बढ़कर सालाना 14000 करोड़ पहुंच जाएगी, जबकि पावरकॉम की 7452 करोड़ की सब्सिडी का पहले ही पंजाब सरकार ने भुगतान नहीं किया है। इनमें सरकारी विभागों, बोर्डों व कारपोरेशनों के बकाया बिजली बिलों का 2300 करोड़ शामिल हैं। इससे साफ है कि सरकारी विभाग भी पावरकॉम को चपत लगाने में पीछे नहीं हैं।
इसके अलावा एससी/बीसी कैटेगरी को हर माह मिलने वाले 200 यूनिट के 1300 करोड़ और स्वतंत्रता सैनानियों के वारिसों को मिलने वाले 300 यूनिट के 38 करोड़ की सब्सिडी पेंडिंग है। पूर्व चन्नी सरकार की ओर से बिजली के प्रति यूनिट तीन रुपये कम किए रेट और एक किलोवाट तक के लोड वाले खपतकारों के माफ बकाया बिलों समेत अन्य सब्सिडी 3000 करोड़ से अधिक की हैं, जो पेंडिंग हैं।
इन सब सब्सिडी की भुगतान में देरी से पावरकॉम के सामने आर्थिक मुश्किलें खड़ी हो रही हैं। पावरकाम को अपने खर्च पूरे करने के लिए बैंकों से लोन लेना पड़ रहा है। जानकारी के मुताबिक इस समय पावरकॉम पर करीब 18000 करोड़ का लोन है, जिस पर सालाना 1500 करोड़ का ब्याज पावरकॉम भरता है।
पैसों की तंगी में बिजली लाइनों की मरम्मत व बिजली सिस्टम में सुधार का काम बड़े स्तर पर प्रभावित होने की आशंका है। पिछले साल कुछ ऐसा ही हुआ था, जब पावरकॉम के स्टोर में खंभों, ट्रांसफार्मर व केबल की भारी किल्लत हो गई थी। तब बिजली रिपेयर का काम प्रभावित होने से लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा था।
समय पर सब्सिडियों का भुगतान करे सरकार: इंजीनियर अजयपाल सिंह
पीएसईबी इंजीनियर्स एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी इंजीनियर अजयपाल सिंह का कहना है कि सरकार के किसी भी वर्ग को सुविधा देने से पावरकॉम को कोई एतराज नहीं है लेकिन सब्सिडी का भुगतान समय पर और एडवांस में होना चाहिए। जिससे पावरकॉम को भारी ब्याज दरों पर बाहर से लोन लेकर काम न चलाना पड़े। इसका असर खपतकारों पर ही पड़ेगा, क्योंकि पावरकाम को बिजली के दाम बढ़ाने पड़ेंगे।