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Chandigarh News: बाइक टैक्सी सेवा शुरू करने की मांग के लिए एलांते मॉल के बाहर प्रदर्शन
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चंडीगढ़। शहर में बाइक टैक्सी सेवाएं दोबारा शुरू करने और चालकों को कानूनी रूप से काम की अनुमति देने की मांग को लेकर शनिवार शाम ट्राइसिटी राइडर्स वेलफेयर सोसाइटी और चंडीगढ़ ऐप बेस्ड वर्कर्स यूनियन ने एलांते मॉल के बाहर शांतिपूर्ण रोष प्रदर्शन किया। शाम पांच बजे जुटे चालकों ने प्रशासन से समस्याओं का समाधान करने और आम जनता से आंदोलन में सहयोग की अपील की। यूनियन ने सोमवार सुबह 10 बजे ट्रिब्यून चौक पर दोबारा प्रदर्शन करने की घोषणा की है।
यूनियन के प्रधान साहिल कुमार ने कहा कि कुछ कंपनियों के लाइसेंस रद्द होने का असर बाइक टैक्सी चालकों पर पड़ा है और हजारों राइडर्स के सामने रोजगार का संकट है। अधिकांश चालकों ने किस्तों पर बाइक खरीदी हैं। सेवाएं बंद होने से किस्तें चुकाने और परिवार का खर्च चलाने में परेशानी हो रही है। उन्होंने कहा कि बाइक टैक्सी आम लोगों के लिए किफायती परिवहन का विकल्प भी है, जिसका विद्यार्थी, आईटी कर्मचारी, घरेलू कामगार और कार्यालय कर्मचारी इस्तेमाल करते हैं। साहिल कुमार के अनुसार चालक निर्धारित टैक्स देने को तैयार हैं, लेकिन बाइक को कमर्शियल करवाने की मौजूदा प्रक्रिया कठिन है। यूनियन पिछले एक वर्ष से प्रशासन और स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (एसटीए) के समक्ष मांगें रख रही है।
दैनिक या मासिक परमिट की मांग
यूनियन ने मोटर व्हीकल एग्रीगेटर गाइडलाइंस-2025 के अनुरूप गैर-परिवहन बाइकों के लिए दैनिक, साप्ताहिक या मासिक परमिट अथवा टैक्स व्यवस्था बनाने का सुझाव दिया है। साथ ही चालान पर रोक और नई नीति बनने तक समय देने की मांग की है। मांगें नहीं मानी गईं तो एसटीए कार्यालय में बाइक की चाबियां जमा कराने और आगे चक्का जाम जैसे कदम उठाने की चेतावनी दी गई है।
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यूनियन के प्रधान साहिल कुमार ने कहा कि कुछ कंपनियों के लाइसेंस रद्द होने का असर बाइक टैक्सी चालकों पर पड़ा है और हजारों राइडर्स के सामने रोजगार का संकट है। अधिकांश चालकों ने किस्तों पर बाइक खरीदी हैं। सेवाएं बंद होने से किस्तें चुकाने और परिवार का खर्च चलाने में परेशानी हो रही है। उन्होंने कहा कि बाइक टैक्सी आम लोगों के लिए किफायती परिवहन का विकल्प भी है, जिसका विद्यार्थी, आईटी कर्मचारी, घरेलू कामगार और कार्यालय कर्मचारी इस्तेमाल करते हैं। साहिल कुमार के अनुसार चालक निर्धारित टैक्स देने को तैयार हैं, लेकिन बाइक को कमर्शियल करवाने की मौजूदा प्रक्रिया कठिन है। यूनियन पिछले एक वर्ष से प्रशासन और स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (एसटीए) के समक्ष मांगें रख रही है।
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दैनिक या मासिक परमिट की मांग
यूनियन ने मोटर व्हीकल एग्रीगेटर गाइडलाइंस-2025 के अनुरूप गैर-परिवहन बाइकों के लिए दैनिक, साप्ताहिक या मासिक परमिट अथवा टैक्स व्यवस्था बनाने का सुझाव दिया है। साथ ही चालान पर रोक और नई नीति बनने तक समय देने की मांग की है। मांगें नहीं मानी गईं तो एसटीए कार्यालय में बाइक की चाबियां जमा कराने और आगे चक्का जाम जैसे कदम उठाने की चेतावनी दी गई है।
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