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चंडीगढ़ में बिजली निजीकरण का विरोध: कर्मियों पर एस्मा लागू, पावर ग्रिड-बीबीएमबी से बुलाया बैकअप

Sat, 07 Dec 2024 09:06 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sat, 07 Dec 2024 09:06 AM IST
सार

चंडीगढ़ प्रशासन ने एक जनवरी तक बिजली विभाग को कंपनी को सौंपने की योजना बनाई है, जिसके खिलाफ विभाग के कर्मचारियों ने प्रदर्शन तेज कर दिया है। शुक्रवार को सेक्टर-17 में बड़ा प्रदर्शन हुआ। यूनियन के गोपाल दत्त जोशी ने कहा कि कर्मचारी निजीकरण के खिलाफ अंतिम सांस तक लड़ाई लड़ेगा। 

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Protest against electricity privatisation in Chandigarh ESMA imposed on workers
बिजली कर्मियों का प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चंडीगढ़ के बिजली विभाग के निजीकरण के खिलाफ कर्मचारियों का गुस्सा फूट पड़ा है। शुक्रवार को सेक्टर-17 में कर्मचारियों ने बड़ा प्रदर्शन किया। प्रशासन को डर है कि कहीं दोबारा फरवरी 2022 जैसा ब्लैकआउट न हो जाए इसलिए कर्मचारियों पर एस्मा लगा दिया है। इससे छह महीने तक प्रदर्शन पर रोक लगा दी गई है। 

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इसके साथ पावर ग्रिड, बीबीएमबी और पीएसपीसीएल से बैकअप में करीब 100 जेई-लाइन भी बुला लिए हैं। उधर, कर्मचारियों ने भी स्पष्ट कर दिया है कि वह आखिरी सांस तक निजीकरण के खिलाफ लड़ेंगे। उन्होंने प्रशासन पर माहौल खराब करने का आरोप लगाया है।

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एक जनवरी तक होगा निजीकरण

प्रशासन ने एक जनवरी तक बिजली विभाग को कंपनी को सौंपने की योजना बनाई है, जिसके खिलाफ विभाग के कर्मचारियों ने प्रदर्शन तेज कर दिया है। शुक्रवार को सेक्टर-17 में बड़ा प्रदर्शन हुआ। यूनियन के गोपाल दत्त जोशी ने कहा कि कर्मचारी निजीकरण के खिलाफ अंतिम सांस तक लड़ाई लड़ेगा। 

प्रधान ध्यान सिंह ने कहा कि एस्मा जैसा काला कानून लागू करने से निजीकरण के खिलाफ आंदोलन कमजोर नहीं किया जा सकता। नेशनल को-ऑर्डिनेशन के उपाध्यक्ष सुभाष लांबा ने कई सवाल उठाए। कहा कि मुनाफा कमाने वाले सरकारी विभाग को कौड़ियों के भाव में निजी हाथों में सौंपना आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना नहीं है, बल्कि यह पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाना कहलाता है। हजारों करोड़ की संपत्ति को 871 करोड़ में एक निजी कंपनी को सौंपा जा रहा है। इसमें भारी भ्रष्टाचार की बू आ रही है। उन्होंने कहा कि कोलकाता की यह वही कंपनी है, जिसने इलेक्ट्रॉल बांड में भाजपा को कई करोड़ का चंदा दिया था। सभी नेताओं ने मिलकर 13 दिसंबर को राष्ट्रीय निजीकरण विरोधी दिवस मनाने की भी घोषणा की, जिसमें देशभर में बिजली कर्मचारी विरोध प्रदर्शन करेंगे।

प्रदर्शन दबाने के लिए प्रशासन ने लगाया एस्मा

बिजली कर्मचारियों के धरने-प्रदर्शन को दबाने के लिए प्रशासन ने चंडीगढ़ में छह महीने के लिए ''एस्मा'' लगा दिया है। प्रशासक के सलाहकार राजीव वर्मा ने आदेश जारी कर ईस्ट पंजाब एसेंशियल सर्विस (मेंटेनेंस) एक्ट-1947 को लागू कर दिया है। आदेश में लिखा कि बिजलीकर्मियों के हड़ताल से बिजली की सप्लाई प्रभावित हो सकती है, जिसका असर शहरवासियों पर पड़ सकता है इसलिए इंजीनियरिंग विभाग के इलेक्ट्रिसिटी विंग के कर्मचारियों के अगले छह माह तक हड़ताल करने पर पूरी तरह रोक लगा दी है। चीफ इंजीनियर और एसई को यह अधिकार दिया गया है कि वे इस अधिनियम के उल्लंघन के मामलों में शिकायत दर्ज कर सकते हैं।

ट्रांसफर स्कीम बनाई नहीं, कंपनी का कर दिया गठन

प्रशासन ने अपने स्तर पर बड़ी गलती की है। सबसे पहले ट्रांसफर स्कीम की अधिसूचना जारी करनी थी, जिसमें कर्मचारियों के सर्विस से जुड़े सभी नियम व शर्तें होंगी। प्रशासन ने यूनियन को भी वादा किया था कि पहले ट्रांसफर स्कीम बनाएंगे, उसके बाद काम आगे बढ़ाएंगे। यहां तक कहा गया कि ट्रांसफर स्कीम का ड्राफ्ट बनने के बाद सबसे पहले कर्मचारियों को दिखाया जाएगा, उनसे सुझाव मांगे जाएंगे लेकिन अधिकारियों ने वादा तोड़ दिया और 22 नवंबर को कंपनी को एलओआई जारी कर दिया। यही नहीं, चंडीगढ़ पावर डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड का भी गठन कर दिया। उधर, कर्मचारियों का क्या होगा, यह उन्हें पता ही नहीं है क्योंकि अधिकारी सिर्फ जुबानी वादा कर रहे हैं कि कर्मचारियों के हितों की रक्षा की जाएगी लेकिन ट्रांसफर स्कीम जारी नहीं की जा रही है।

पावर ग्रिड, बीबीएमबी और पीएसपीसीएल से पहुंचे कई कर्मी, कुछ ने किया मना

प्रशासन को फरवरी 2022 में हुए ब्लैकआउट का डर है इसलिए पहले ही पावर ग्रिड, बीबीएमबी और पीएसपीसीएल को पत्र लिखकर बैकअप के लिए जेई-लाइनमैन व अन्य कर्मियों की मांग कर दी है। सभी से 50 से 100 मैनपावर की मांग की गई, जिसमें से कई शुक्रवार को चंडीगढ़ पहुंच गए। हालांकि, यूटी के कर्मचारियों ने काम बंद करने की घोषणा नहीं की है। ऐसे में जो बाहर से आने वाले कर्मचारी शुक्रवार को खाली बैठे रहे। उनके रहने और खानपान की व्यवस्था करना भी अधिकारियों के लिए चुनौती बन गया है, क्योंकि अधिकतर कम्युनिटी सेंटर शादियों के लिए बुक हैं। ऐसे में उन्हें इधर-उधर एडजस्ट किया गया। वह कर्मचारी भी कंफ्यूज हैं कि उन्हें काम क्या करना है, क्योंकि विभाग के कर्मचारी भी सेवाएं दे रहे हैं। वहीं, कई कर्मचारियों ने चंडीगढ़ आने से मना भी कर दिया, क्योंकि वहां की यूनियनें भी यूटी बिजली विभाग के निजीकरण के खिलाफ खड़ी हो गई हैं। बीबीएमबी की यूनियन ने तो पत्र भी लिख दिया है कि चंडीगढ़ में उनकी ड्यूटी न लगाई जाए।

चंडीगढ़ में कर्मियों में अब तक तीन बार लगा एस्मा

ढाई साल पहले 22 फरवरी 2022 को भी प्रशासन ने बिजलीकर्मियों पर एस्मा लागू किया था। इसके अलावा 15 सितंबर 1987 और 23 सितंबर 1992 को प्रशासन ने कर्मचारियों पर एस्मा लगाया था। 1987 में डेलीवेज कर्मचारियों को नियमित करने के लिए प्रदर्शन हुए तो पूरे शहर में जलापूर्ति बंद हो गई। करीब 300 कर्मचारियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया। जलापूर्ति बहाल करने के लिए सेना को बुलाई गई लेकिन जब सेना भी जलापूर्ति ठीक नहीं कर पाई तो कर्मचारियों को जेल से छोड़ा गया। अदालत में कई वर्ष तक केस चला, जिसमें सभी कर्मचारी बरी हुए थे। 1992 में भी बड़ा प्रदर्शन हुआ तो प्रशासन ने 280 डेलीवेज कर्मचारियों बर्खास्त कर दिया था। 11 नियमित कर्मचारियों के जो नेता थे, उन्हें टर्मिनेट कर दिया गया था।

क्या है एस्मा

एस्मा भारतीय संसद से पारित एक अधिनियम है, जिसे 1968 में लागू किया गया था। केंद्र सरकार अथवा कोई भी राज्य सरकार इस कानून को अधिकतम छह महीने के लिए लगा सकती है। एस्मा लागू होने के बाद यदि कर्मचारी हड़ताल पर जाता है तो वह अवैध एवं दंडनीय है। इस आदेश से संबंधित किसी भी कर्मचारी को बिना किसी वारंट के गिरफ्तार किया जा सकता है।
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चंडीगढ़ के बिजली विभाग पर ही नजर क्यों

1. पूरे देश में यूटी चंडीगढ़ में सबसे सस्ती बिजली
2. सस्ती बिजली देने के बाद भी वर्ष 2016-17 में विभाग 195 करोड़, 2017-18 में 257, 2019-20 में 116, 2020-21 में 365 करोड़ का लाभ
3. बिजली विभाग के पास चंडीगढ़ की जमीनों की कीमत कई हजारों करोड़ रुपये की
4. चंडीगढ़ का अपना बिजली का प्रोडक्शन नहीं, सिर्फ डिस्ट्रीब्यूशन
5. पिछले कुछ वर्षों में बिजली विभाग ने अंडरग्राउंड वायरिंग, स्मार्ट मीटरिंग, ट्रांसफॉर्मर बदलने आदि पर करोड़ों खर्चे

एमिनेंट ने 871 करोड़ की लगाई है बोली, विभाग में हैं करीब 1100 कर्मी

बिजली विभाग में करीब 1100 कर्मी हैं। इसमें रेगुलर करीब 550 और बाकी आउटसोर्स पर हैं। विभाग को खरीदने के लिए एमिनेंट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड ने 871 करोड़ रुपये की बोली लगाई थी, जिसे मई 2022 में केंद्रीय कैबिनेट द्वारा 870 करोड़ में आखिरी मंजूरी दे दी गई। प्रशासन ने पांच साल पहले निजीकरण की प्रक्रिया शुरू की थी। विभाग को खरीदने की दौड़ में कुल सात कंपनियां थीं। इनमें एमिनेंट के अलावा अडानी ट्रांसमिशन लिमिटेड, टाटा पावर, टोरेंट पावर, स्टरलाइट पावर, रिन्यू विंड एनर्जी और एनटीपीसी इलेक्ट्रिक सप्लाई कंपनी लिमिटेड शामिल थीं।
 
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