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प्रोस्टेट के मरीजों के लिए राहत भरी खबर, ये पढ़ें

Sun, 19 Jan 2014 12:12 PM IST
दीपक शाही
दीपक शाही Updated Sun, 19 Jan 2014 12:12 PM IST
Prostate Treatment with Medicines Now
प्रोस्टेट(गदूद) से पीड़ित मरीजों को अब ऑपरेशन कराने की जरूरत नहीं है, बल्कि दवाओं से भी यह ठीक हो सकता है। पूरे जीवनकाल में 70-80 प्रतिशत व्यक्ति इस बीमारी के शिकार होते हैं।


40 वर्ष की आयु के बाद लोगों में यह बीमारी पैर पसारने लगती है। खास बात यह है कि प्रोस्टेट की अनदेखी करने पर किडनी फेल होने की संभावना भी बढ़ जाती है। सेक्टर-6 के जनरल अस्पताल में प्रतिदिन करीब 30 प्रोस्टेट से पीड़ित मरीज इलाज कराने पहुंच रहे हैं।


यूरोलॉजिस्ट का कहना है कि ऑपरेशन कराने के बाद लोगों को तमाम तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। मेडिकल साइंस के आकड़ों के अनुसार, यदि व्यक्ति 60 वर्ष से ज्यादा उम्र का है तो 60 प्रतिशत चांस दवाओं से और 40 प्रतिशत ऑपरेशन से ठीक होने की संभावना रहती है।
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कब हो सकती है किडनी फेल
प्रोस्टेट का नॉर्मल साइज 18 से 20 ग्राम होता है। हर साल इसके आकार में 2.3 ग्राम की बढ़ोतरी होती है। यदि इस बीमारी से ग्रस्त किसी व्यक्ति का प्रोस्टेट का आकार 100 ग्राम से ज्यादा बढ़ जाए तो यह किडनी के लिए घातक होता है। चार से पांच साल तक इसकी अनदेखी करने पर पीड़ित व्यक्ति की किडनी फेल होने की संभावना बढ़ जाती है।
 
ऑपरेशन के बाद ये आती हैं दिक्कतें   
ऑपरेशन के बाद, 100 में से 100 लोगों का सेक्स के दौरान वीर्य नहीं निकलता है, बल्की पेशाब की थैली में चला जाता है। दो प्रतिशत लोगों में नपुंसकता के चांचेज भी बढ़ जाते हैं। इसके आलाव ऑपरेशन के बाद यदि इंटरनल स्पींटर कट गया तो यूरिन रुकने की समस्या पैदा हो जाती है।

प्रोस्टेट बढ़ने के लक्षण
-बार-बार यूरिन का आना
-शौच करते समय यूरिन का टपकना
-यूरिन करने के बाद दोबारा यूरिन की संका होना
-रात में चार से पांच बार यूरिन परित्याग करने के लिए जाना
यूरिन में खून का आना
-मसाने के अंदर पत्थर का बनना
-किडनी का फे ल होना
-काफी देर तक बाथरूम के समय यूरिन का बाहर नहीं निकलना

कंपलीकेशन के समय प्रोस्टेट के लक्षण
-बार-बार यूरिन में इनफेक्शन, खून, दोनों गुर्दो का सूजना
 
एज ग्रुप के हिसाब से गदूद से पीड़ित व्यक्तियों का आंकड़ा
-40 वर्ष की उम्र में 8 प्रतिशत, 50-60 वर्ष की उम्र में 50 प्रतिशत, 70 वर्ष की उम्र में 70 प्रतिशत, 80 वर्ष की उम्र आते-आते मरीजों का आंकड़ा 100 प्रतिशत तक पहुंच जाता है।

मरीजों का किया जा रहा फ्री इलाज
जनरल अस्पताल में फ्री मेडिसिन और इलाज संभव है। प्राइवेट अस्पतालों में इसके आपरेशन का चार्ज तकरीबन 40-50 हजार रुपये है। जनरल अस्पताल में मेडिसिन से लेकर इलाज तक मुफ्त किया जा रहा है।


जनरल अस्पताल में डेली 30 मरीज पहुंच रहे हैं। 80 प्रतिशत केस को मेडिसिन से ठीक किया जा सकता है। वहीं, ऑपरेशन के बाद तमाम तरह की परेशानियां बढ़ जाती है।
डॉ. सचित शर्मा, यूरोलाजिस्ट, जनरल अस्पताल पंचकूला

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