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आयातित प्रिंटिंग मशीनों पर प्रतिबंध का प्रस्ताव गलत
ब्यूरो, अमर उजाला/लुधियाना
Updated Thu, 18 Sep 2014 10:27 PM IST
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इंडियन प्रिंटिंग पैकेजिंग एंड एलायड मशीनरी मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन (ईपमा) द्वारा प्रिंटिंग मशीनरी के आयात पर प्रतिबंध लगाने की केंद्र सरकार को की गई सिफारिश का प्रिंटर्स ने कड़ा विरोध किया है।
प्रिंटर्स ने तर्क दिया है कि देश में मल्टी कलर ऑफसेट और डिजीटल प्रिंटिंग मशीनों का उत्पादन नहीं किया जाता, ऐसे में देश की प्रिंटिंग इंडस्ट्री केवल आयात पर ही निर्भर है। यदि आयात भी बंद हो गया तो इंडस्ट्री में विस्तार रुक जाएगा और उद्यमी मार्केट से आउट हो जाएंगे।
ऑफसेट प्रिंटर्स एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने प्रतिबंध लगाया तो सड़कों पर धरना प्रदर्शन किया जाएगा। दूसरे अक्तूबर में देश भर के प्रिंटर्स लुधियाना में इस मुद्दे पर मंथन करके आगे की रणनीति को अंजाम देंगे। एसोसिएशन के महासचिव कमल चोपड़ा ने कहा कि 2013 में 262 नई और 926 सेकेंड हैंड मशीनरी का आयात किया गया।
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प्रिंटर अधिकतर सेकेंड हैंड मशीनरी का ही आयात कर रहे हैं। एक मशीन की लाइफ 40 से 50 साल है, जबकि उद्यमी केवल दस से बारह साल पुरानी मशीनरी जर्मनी या जापान से मंगवा रहे हैं। उन्होेंने कहा कि देश में इस तरह की मशीनरी का उत्पादन नहीं हो रहा है। आयात रुकने से इंडस्ट्री अंतरराष्ट्रीय स्तर की क्वालिटी का माल तैयार नहीं कर पाएगी। इससे बाजार की चुनौतियों का मुकाबला करना कठिन होगा।
दूसरे हाई टेक मशीनरी का आयात रुकने से प्रिंटिंग के निर्यात पर भी असर होगा। फिलहाल भारत से 71 बिलियन डालर का निर्यात किया जा रहा है। जो 2015 तक 90 बिलियन डालर पहुंचने का अनुमान है। लेकिन ताजा स्थिति में प्रिंटिंग उद्योग निर्यात में भी पिछड़ जाएगा। इस अवसर पर परवेश जग्गा, अमरजोत अरोड़ा, रमित सक्सेना और हंसराज समेत कई प्रिंटर मौजूद रहे।
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प्रिंटर्स ने तर्क दिया है कि देश में मल्टी कलर ऑफसेट और डिजीटल प्रिंटिंग मशीनों का उत्पादन नहीं किया जाता, ऐसे में देश की प्रिंटिंग इंडस्ट्री केवल आयात पर ही निर्भर है। यदि आयात भी बंद हो गया तो इंडस्ट्री में विस्तार रुक जाएगा और उद्यमी मार्केट से आउट हो जाएंगे।
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ऑफसेट प्रिंटर्स एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने प्रतिबंध लगाया तो सड़कों पर धरना प्रदर्शन किया जाएगा। दूसरे अक्तूबर में देश भर के प्रिंटर्स लुधियाना में इस मुद्दे पर मंथन करके आगे की रणनीति को अंजाम देंगे। एसोसिएशन के महासचिव कमल चोपड़ा ने कहा कि 2013 में 262 नई और 926 सेकेंड हैंड मशीनरी का आयात किया गया।
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प्रिंटर अधिकतर सेकेंड हैंड मशीनरी का ही आयात कर रहे हैं। एक मशीन की लाइफ 40 से 50 साल है, जबकि उद्यमी केवल दस से बारह साल पुरानी मशीनरी जर्मनी या जापान से मंगवा रहे हैं। उन्होेंने कहा कि देश में इस तरह की मशीनरी का उत्पादन नहीं हो रहा है। आयात रुकने से इंडस्ट्री अंतरराष्ट्रीय स्तर की क्वालिटी का माल तैयार नहीं कर पाएगी। इससे बाजार की चुनौतियों का मुकाबला करना कठिन होगा।
दूसरे हाई टेक मशीनरी का आयात रुकने से प्रिंटिंग के निर्यात पर भी असर होगा। फिलहाल भारत से 71 बिलियन डालर का निर्यात किया जा रहा है। जो 2015 तक 90 बिलियन डालर पहुंचने का अनुमान है। लेकिन ताजा स्थिति में प्रिंटिंग उद्योग निर्यात में भी पिछड़ जाएगा। इस अवसर पर परवेश जग्गा, अमरजोत अरोड़ा, रमित सक्सेना और हंसराज समेत कई प्रिंटर मौजूद रहे।