चंडीगढ़: सुखना चो पर सोलर पैनल लगाकर पैदा की जाएगी बिजली, जल्द टेंडर करेगी क्रेस्ट
देश में नहरों व बंजर जमीनों को इस्तेमाल में लाए जाने के लिए कैनलटॉप सोलर पैनल तकनीक को सबसे पहले गुजरात में वाइब्रेंट गुजरात योजना के अंतर्गत इस्तेमाल किया गया था। इसके बाद इस तकनीक को पंजाब, केरल और उत्तराखंड में प्रयोग किया जा रहा है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
चंडीगढ़ में सुखना लेक को सूखने से बचाने वाली सुखना चो अब बिजली उत्पादन में भी सहायक बनेगी। सौर ऊर्जा से बिजली उत्पादन में नंबर वन बनने के लिए चंडीगढ़ रिन्यूअल एनर्जी एंड साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रमोशन सोसाइटी (क्रेस्ट) ने इसके लिए एक खास योजना बनाई है। शुरुआत में 500 मीटर की दूरी में सोलर पैनल लगाए जाएंगे। इसके लिए डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार कर ली गई है। जल्द ही टेंडर किया जाएगा।
देश में नहरों व बंजर जमीनों को इस्तेमाल में लाए जाने के लिए कैनलटॉप सोलर पैनल तकनीक को सबसे पहले गुजरात में वाइब्रेंट गुजरात योजना के अंतर्गत इस्तेमाल किया गया था। इसके बाद इस तकनीक को पंजाब, केरल और उत्तराखंड में प्रयोग किया जा रहा है। चंडीगढ़ में सुखना चो की लंबाई काफी है, इसलिए क्रेस्ट ने इस योजना को यहां लागू करने का खाका तैयार किया है। तय किया गया है कि शुरुआत में चो पर 500 मीटर की दूरी में सोलर पैनल लगाए जाएंगे। जगह तय करने के लिए क्रेस्ट व पर्यावरण विभाग के अधिकारी सुखना चो का कई दौरा कर चुके हैं।
पर्यावरण विभाग के निदेशक देबेंद्र दलाई के अनुसार, इस महीने के आखिर तक जगह का चयन कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि ये काफी चुनौतीपूर्ण परियोजना है, क्योंकि शहर में सुखना चो की चौड़ाई कहीं कम तो कहीं ज्यादा है, इसलिए पहले उस जगह पर सोलर पैनल लगाए जाएंगे, जो ज्यादा चौड़ा न हो। क्रेस्ट की योजना के अनुसार इस परियोजना को कई चरणों में लागू किया जाएगा। इसके तहत चो को सोलर पैनल से ढक दिया जाएगा।
नगर निगम की टंकियों और स्ट्रीट लाइटों पर भी लगेंगे सोलर पैनल
क्रेस्ट की तरफ से शहर के ज्यादातर सरकारी इमारतों पर सोलर प्लांट लगा दिए गए हैं। सभी सरकारी स्कूलों की छत के बाद अब स्कूलों की खाली जमीन पर सोलर प्लांट लगाए जा रहे हैं। विभाग का बिजली का बिल शून्य हो चुका है, बल्कि वह बिजली ग्रिड को बेच रहे हैं। इससे कमाई हो रही है। अब सभी पुलिस थानों, नगर निगम की पानी की टंकियों, कम्यूनिटी सेंटर और स्ट्रीट लाइटों पर भी सोलर पैनल लगाए जा रहे हैं। सरकारी व निजी संस्थानों की बिल्डिंग पर लगे सोलर पैनल से हर साल 20 लाख तक की बिजली की बचत की है। वहीं, कार्बन फुट प्रिंट को बढ़ने से रोका है।
2023 तक सौर ऊर्जा से 75 एमडब्ल्यू बिजली उत्पादन का लक्ष्य
शहर को मॉडल सोलर सिटी बनाया जाना है। वर्ष 2022 तक 69 मेगावाट सोलर एनर्जी पैदा करने के लक्ष्य को बदलकर अब वर्ष 2023 तक 75 मेगावाट तय किया गया है। ये वर्तमान (220 एमडब्ल्यू) में पूरे शहर के बिजली खपत का करीब 34 प्रतिशत है। फिलहाल शहर में विभिन्न सोलर प्लांट से करीब 45 मेगावाट बिजली पैदा की जा रही है। सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए यूटी प्रशासन ने 500 वर्ग गज या इससे अधिक एरिया के सभी घर और इमारतों पर सोलर प्रोजेक्ट लगाना अनिवार्य कर दिया है।