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जेनरे हाउस को म्यूजियम बनाने का प्रस्ताव ठंडे बस्ते में

Mon, 27 Jun 2016 01:58 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 27 Jun 2016 01:58 AM IST
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proposal of museum of Pierre Jenner House now on hold
चंडीगढ़ में जेनरे हाउस - फोटो : amar ujala

अधिकारी बदलते ही प्राथमिकताएं भी बदल गई। पियरे जेनरे हाउस को म्यूजियम बनाने का प्रस्ताव ठंडे बस्ते में चला गया है। सेक्टर-5 के हाउस नंबर-57 में पियरे जेनरे ने अपनी जिंदगी के अहम 11 साल बिताए थे। जेनरे इस हाउस में 1954 से 1965 तक रहे थे। इसके बाद से ये घर खाली पड़ा है।

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अमर उजाला ने फ्रांस राष्ट्रपति के दौरे के पांच महीने बाद पियरे जेनरे हाउस का हाल जाना तो हालत पहले जैसे ही नजर आए। यह घर म्यूजियम बने न बने, लेकिन नशेड़ियों और बाहरी लोगों का अड्डा जरूर बन गया है। घर में कई जगह शराब की खाली बोतलें बिखरी पड़ी हैं। जनवरी में फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद की विजिट के दौरान घर में उगी घास को हटाकर चीजों को कुछ ठीक किया गया था।
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इस दौरान फ्रांसीसी प्रतिनिधिमंडल ने भी घर का दौरा किया था, उस समय अधिकारियों ने अपनी नाकामी छुपाने के लिए घर में म्यूजियम बनाए जाने का हवाला दिया था। लेकिन प्रशासन की अनदेखी के कारण एक बार फिर घर की हेरिटेज दीवारों को बेतरतीब घास ने जकड़ रखा है। इससे उसका अनोखा डिजाइन तक छिप गया है। घर के प्रांगण में कोई भी आसानी से आ जा सकता है। बाहर गेट तक नहीं लगा है। दीवारों पर लगी फेंसिंग भी कई जगह से गायब है। अंदर दरवाजों के शीशे चटके हुए हैं।
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शहर का फर्नीचर और पीयू की कई बिल्डिंग जेनरे ने की थी डिजाइन पियरे जेनरे चंडीगढ़ को बनाने वाले ली कार्बूजिए के कजिन थे। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट, विधानसभा और पीयू जैसे संस्थानों का अधिकतर फर्नीचर जेनरे ने डिजाइन किया था। हेरिटेज फर्नीचर डिजाइन करने के साथ जेनरे ने पंजाब यूनिवर्सिटी की कई बिल्डिंग्स की डिजाइनिंग की, जिनमें गांधी भवन और यूनिवर्सिटी लाइब्रेरी शामिल थी। वह अपनी बिल्डिंग की दीवारों में बड़े पत्थरों का इस्तेमाल करते थे।

सुखना में बहाई गई थीं जेनरे की अस्थियां जेनरे का चंडीगढ़ से विशेष लगाव था। इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उनकी इच्छा पर मृत्यु के बाद उनकी अस्थियों को सुखना में ही विसर्जित किया गया था।


पूर्व एडवाइजर देव ने दी थी म्यूजियम को हरी झंडी पूर्व एडवाइजर विजय कुमार देव ने जेनरे हाउस को म्यूजियम बनाए जाने के प्रस्ताव को हरी झंडी दी थी। इंजीनियरिंग विभाग ने कुछ काम भी शुरू किया था। लेकिन अधिकारी बदलने के बाद एक बार फिर प्रशासन की नजर इससे हट गई हैं। जिस कारण बेशकीमती विरासत खंडहर हो रही है।

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