CAA का विरोधः केरल के बाद पंजाब विधानसभा में प्रस्ताव पास, अब सुप्रीम कोर्ट जाएगी सरकार

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sat, 18 Jan 2020 09:08 AM IST
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पंजाब विधानसभा
पंजाब विधानसभा - फोटो : फाइल फोटो

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केरल के बाद पंजाब सरकार ने भी नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) का विरोध करते हुए इसके खिलाफ प्रस्ताव पास कर दिया। सीएए को पूरी तरह पक्षपाती और भारतीय संविधान के धर्म निरपेक्ष ताने-बाने को तहस-नहस करने वाला असंवैधानिक कानून बताते हुए पंजाब विधानसभा ने शुक्रवार को ध्वनि मत से प्रस्ताव पारित कर इसे रद्द करने की मांग की। 
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इसके साथ ही मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने इस कानून की तुलना जर्मनी में हिटलर द्वारा खास तबके के लोगों के नरसंहार से की। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार भी इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट जाएगी। सदन में आम आदमी पार्टी ने प्रस्ताव का समर्थन किया जबकि भाजपा और अकाली दल के विधायकों ने प्रस्ताव का विरोध किया। 
सदन में प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सीएम ने कहा कि स्पष्ट तौर पर इतिहास से कोई सबक नहीं सीखा गया। उन्होंने केंद्र सरकार को नेशनल पापुलेशन रजिस्टर (एनपीआर) से संबंधित फॉर्मों /दस्तावेजों में उचित संशोधन किए जाने तक इसका काम रोकने की भी अपील की। कैप्टन ने कहा कि आशंका जताई जा रही है कि यह राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर का आधार है और एक वर्ग को भारतीय नागरिकता से वंचित करने और सीएए को अमल में लाने के लिए तैयार किया गया है।

 

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'सीएए संविधान की धारा 14 का उल्लंघन और विभाजनकारी'

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