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मिलिए इन होनहार बेटियों से, UPSC में टॉप 60 में बनाई जगह

Wed, 11 May 2016 10:27 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 11 May 2016 10:27 AM IST
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Promising daughters, got 4th and 40th rank in civil service in all india level
यूपीएससी में डॉक्टर आर्तिका ने चौथा रैंक हासिल किया - फोटो : amar ujala

‌मिल‌िए होनहार बेटियों से, यूपीएससी की सिविल सर्विसेज परीक्षा में पीजीआई में तैनात डॉक्टर आर्तिका ने चौथा, गजल भारद्वाज ने 40 वां रैंक और नाजुक कुमार ने हासिल क‌िया 58वां रैंक।  संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सर्विसेज परीक्षा के मंगलवार को पीजीआई में डॉक्टर आर्तिका शुक्ला ने देश भर में चौथा स्थान हासिल किया है।

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मूल रूप से  वाराणासी(काशी) की बिटिया आर्तिका शुक्ला ने नया इतिहास रच दिया। वाराणासी के रोहित नगर निवासी बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. बीके शुक्ला और लीना शुक्ला की बेटी है। आर्तिका ने पहले ही प्रयास में यह सफलता हासिल की है।
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अमर उजाला से खास बातचीत में उन्होंने कहा कि जीवन में बड़े सपना देखने के साथ उसके अनुरूप कठिन परिश्रम करना भी बहुत जरूरी है। ऐसा करने पर सफलता अवश्य मिलती है। तैयारी के लिए जरूरी नहीं कि कितने घंटे पढ़ाई की जाए लेकिन अहम यह है कि जितनी देर भी पढ़ें, गंभीरता से पढ़ाई की जाए।
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मंगलवार सुबह से ही परीक्षा परिणाम का इंतजार कर रही आर्तिका को जैसे ही शाम चार बजे इस उपलब्धि की जानकारी मिली वह खुशी से झूम उठी। इसके बाद से फोन पर बधाई देने वालों के साथ ही देर शाम तक घर पर आने वालों का सिलसिला जारी रहा।

एलकेजी से लेकर इंटर (वर्ष 2008) तक की पढ़ाई वाराणसी डीएलडब्ल्यू स्थित सेंट जॉस स्कूल से करने के बाद आर्तिका ने 2008 में ही दिल्ली के मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज की एमबीबीएस प्रवेश परीक्षा में भी पहले ही प्रयास में 47वीं रैंक हासिल की थी।

आर्तिका ने बताया कि उनका आईएएस बनने का सपना शुरू से ही रहा है। इसके लिए वह चिकित्सा सेवा के साथ-साथ सिविल सर्विस की भी तैयारी में जुटी रही। माता-पिता के साथ ही सबसे ज्यादा श्रेय गुवाहाटी में तैनात अपने बड़े भाई उत्सव शुक्ला को देते हुए आर्तिका ने कहा कि उन्होंने कभी कोचिंग का सहारा नहीं लिया। वह पूर्व राष्ट्रपति मिसाइल मैन डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को अपना रोल मॉडल मानती हैं।

सिविल इंजीनियरिंग से ग्रेजुएशन, पेरेंट्स ने मोटिवेट किया

Promising daughters, got 4th and 40th rank in civil service in all india level
गजल भारद्वाज, यूपीएससी में 40वां रैंक - फोटो : amar ujala

जिंदगी में मैने एक ही आईएएस बनने का लक्ष्य रखा था। सिविल सर्विसेज में लिए चौथी बार में सफलता मिली। लेकिन मैं लक्ष्य से भटकी नहीं। मेरी नजर में सफलता पाने का एक ही मूलमंत्र है, मंजिल मिलने तक अुपनी कोशिशें जारी रखो।

 यह कहना है सिविल सर्विसेज में ऑल इंडिया में 40वां रैंक पाने वाली गजल भारद्वाज का। मूल रूप से रूड़की निवासी गजल पिछले दो साल से चंडीगढ़ में कोचिंग ले रही थीं। गजल सेक्टर-32 आईएएस स्टडी सर्कल में हिस्ट्री की कोचिंग दे रही थीं।

गजल ने सिविल इंजीनियरिंग से ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की है। सिविल सर्विस में इन्होंने ऑप्शनल सब्जेक्ट हिस्ट्री रखा। आईएएस की तैयारी में वह प्रो.अनिल कुमार का विशेष योगदान मानती हैं। इनके पिता सम्राट भारद्वाज रिटायर्ड लेक्चरर और मां अलका गृहणी हैं। वह बताती हैं कि उन्हें सबसे अधिक उनके पेरेंट्स ने मोटिवेट किया। हर रोज 9 से 10 घंटे की तैयारी करती थी। 

टॉपर ने दिए टिप्स 
-जो आप बनना चाहते हैं पहले उसे तय करें। 
-जीवन में हर चीज का बैलेंस बनाकर चलना चाहिए। 
-सभी विषयों को बराबर का समय दें। 
 -असफलता से परेशान नहीं होना।
-रूटीन में अखबार पढ़ने की आदत डालें। 
-तैयारी करते हुए खुद के नोट्स तैयार करें।

पिता के नक्शे कदम पर चलते हुए यूपीएससी में सफलता हासिल की

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नाजुक कुमार, यूपीएसी में 58 वां रैंक - फोटो : amar ujala
चंडीगढ़ के पूर्व गृह सचिव अनिल कुमार की बेटी नाजुक कुमार ने अपने पिता के नक्शे कदम पर चलते हुए यूपीएससी में सफलता हासिल की है। उसको 58वां रैंक मिला है। आईआईटी दिल्ली से इंजीनियरिंग करने के बाद नाजुक ने जॉब शुरू कर दी।

पिछले एक साल से नाजुक सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रही थी। अनिल कुमार ने बताया कि नाजुक ने एक साल की तैयारी के बाद ही यह रैंक हासिल किया है। उन्होंने भी दिल्ली आईआईटी से पढ़ाई की थी। 

पीजीआई की नर्स ने मारी बाजी
पीजीआई की नर्स रह चुकी ज्योतिंद्र कौर बाजवा ने यूपीएससी में 256वां रैंक हासिल किया है। इससे पहले बाजवा पीसीएस पास कर चुकी है। हालांकि अभी ज्वाइनिंग नहीं हुई थी। सिविल सर्विसेज की तैयारी को पूरा समय देने केलिए बाजवा ने 2015 में पीजीआई की नर्स की नौकरी छोड़ दी थी। बाजवा ने पीजीआई के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग एजुकेशन से ग्रेजुएशन करने केबाद 2009 में यहीं नर्सिंग की नौकरी शुरू कर दी थी।

बाजवा ने बताया कि पहले कुछ पारिवारिक दिक्कतें थीं, जिस कारण जॉब करनी पड़ी। दिक्कतें दूर होने पर उसने नौकरी छोड़कर पढ़ाई शुरू की। नौकरी के समय भी वह रोजाना एक -दो घंटे पढ़ती थी। नौकरी केबाद फुल टाइम पढ़ाई की और एक साल कोचिंग भी ली। बाजवा ने बताया कि यह उसका तीसरा अटेंप्ट था। बाजवा मूल रूप से बटाला की रहने वाली है।
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