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Hindi News ›   Chandigarh ›   Professor Yogesh Kumar Chawla would retire from the post of director of the PGI today

PGI डायरेक्टर प्रो. चावला आज होंगे रिटायर, जानिए उपलब्धियां और नाकामियां

Thu, 06 Oct 2016 01:52 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 06 Oct 2016 01:52 AM IST
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Professor Yogesh Kumar Chawla would retire from the post of director of the PGI today
डायरेक्टर पद से प्रो. चावला आज होंगे रिटायर - फोटो : File Photo
प्रोफेसर योगेश कुमार चावला वीरवार को पीजीआई के डायरेक्टर के पद से रिटायर हो जाएंगे। हालांकि पीजीआई से उनकी रिटायरमेंट को आठ महीने रहते हैं। संभावना जताई जा रही है कि डायरेक्टर पद से रिटायर होने के बाद वे हीप्टोलाजी डिपार्टमेंट में काम करेंगे। 
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उनकी जगह किसी नए डायरेक्टर की नियुक्ति नहीं हो पाई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की सेलेक्शन कमेटी ने डायरेक्टर के चयन के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है। सूत्रों का दावा है कि अक्तूबर के आखिरी सप्ताह तक नए डायरेक्टर का चयन हो जाएगा। तब तक के लिए केंद्र सरकार ने पीजीआई के डीन डा. सुभाष वर्मा को कार्यवाहक डायरेक्टर नियुक्त कर दिया है।
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 उनके कार्यकाल में पीजीआई को मिले अवार्ड
डा. चावला के कार्यकाल के दौरान पीजीआई को कायाकल्प प्रतियोगिता में पहला स्थान मिला। जबकि दूसरे स्थान पर दिल्ली एम्स रहा था। पीजीआई को हाल ही सबसे साफ-सुथरे हास्पिटल का अवार्ड मिला। ये अवार्ड प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रोफेसर चावला को दिया था। प्रोफेसर चावला को पदमश्री अवार्ड से नवाजा गया। प्रोफेसर  चावला के कार्यकाल के दौरान पीजीआई डिजीटल युग की शुरुआत हुई। 
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पीएम मोदी से मिला अवार्ड लेकिन वादों से रहा नाता

Professor Yogesh Kumar Chawla would retire from the post of director of the PGI today
प्रोफेसर योगेश कुमार चावला - फोटो : File Photo
1. उनके साथ सबसे बड़ा विवाद उनकी बेटी व दामाद की नियुक्ति को लेकर जुड़ा रहा। आरोप था कि दोनों की पीजीआई में नियुक्ति में पारदर्शिता नहीं बरती गई। बाद में उनके इंटरव्यू एम्स की सेलेक्शन कमेटी ने लिए। रिजल्ट आना अभी बाकी है।
 2.उनके कार्यकाल के दौरान ही पीजीआई में अनुपमा की मौत हो गई थी। अनुपमा के इलाज में लापरवाही बरतने पर नेशनल कंज्यूमर पैनल ने पीजीआई 17 लाख का जुर्माना लगाया गया था।
 3.कई मांगे पूरी नहीं होने पर पीजीआई फेकल्टी एसोसिएशन ने उनके खिलाफ 15 दिन तक आंदोलन चलाया। बाद में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को हस्तक्षेप करना पड़ा था।
4.उनके कार्यकाल के दौरान पीजीआई के खिलाफ सबसे ज्यादा कोर्ट केस हुए। एक अनुमान के मुताबिक उनके कार्यकाल में 500 से ज्यादा कोर्ट केस हुए।
 5.उन पर हर मामले में कमेटी गठन करने का भी आरोप लग चुका है। कर्मचारियों का कहना है कि उनके काम को करने के बजाए कमेटी गठित कर दी जाती थी।
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