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चंडीगढ़ः सहमत हो गए नगर निगम कमिश्नर, कजौली वाटर वर्क्स फेज 1 व 2 की बदलेगी मशीनरी

Fri, 17 Jul 2020 01:40 PM IST
खुशबू गोयल नवदीप मिश्रा, चंडीगढ़
नवदीप मिश्रा, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Fri, 17 Jul 2020 01:40 PM IST
सार

  • मोहाली के प्रस्ताव पर नगर निगम कमिश्नर ने जताई सहमति
  • हरियाणा की सहमति के बाद शुरू हो जाएगा प्रोजेक्ट

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Procedure to Change Kajauli Water Works Machinery
कजौली वाटर वर्क्स - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कजौली वाटर वर्क्स फेज 1 व 2 की मशीनरी बदलने के लिए मोहाली प्रशासन ने पूरी तैयारी कर ली है। चूंकि कजौली वाटर वर्क्स से पंजाब के साथ चंडीगढ़ और हरियाणा को भी पानी मिलता है, इसलिए इस प्रोजेक्ट के लिए चंडीगढ़ ने सहमति जता दी है, वहीं पंजाब हरियाणा से बात कर रहा है। कजौली वाटर वर्क्स के 6 फेज से पंजाब, हरियाणा व चंडीगढ़ को पेयजल सप्लाई होती है।
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चंडीगढ़ और हरियाणा पंजाब को बिजली व मेंटीनेंस का खर्च देते हैं। मशीनरी का रखरखाव व अन्य व्यवस्थाएं पंजाब देखता है। चूंकि फेज एक व 2 की मशीनरी काफी पुरानी हो गई है, इसलिए इन्हें बदलने के लिए मोहाली प्रशासन ने एक प्रस्ताव तैयार किया है। इस प्रस्ताव के तहत पम्पको इंडिया दोनों फेज के 6 पंप को बदलकर नया लगाएगा।
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डीबीओटी मॉडल पर होने वाले इस काम को 5 साल में पूरा किया जाएगा। इससे जो बिजली व ऊर्जा की बचत होगी, कंपनी उससे अपना खर्च निकालेगी। चंडीगढ़ व हरियाणा पहले की तरह ही अपना बिजली का बिल देते रहेंगे, लेकिन नई मशीनरी से जो बिजली की बचत होगी, वह लाभ कंपनी अपने पास रखेगी।
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अभी मात्र 69 प्रतिशत ही क्षमता से काम कर रही मशीनरी

पम्प को इंडिया कंपनी ने हाल ही में गोविंदगढ़ स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सेकंडरी स्टील टेक्नोलॉजी (एनआईएसएसटी) से सर्वे कराया था। उसमें जानकारी मिली थी कि फेज एक व दो की मशीनरी मात्र 69 प्रतिशत क्षमता के साथ ही काम कर रही हैं। जिससे मशीनरी ज्यादा बिजली ले ही रही है, वहीं घर्षण भी बढ़ रहा है। जब मशीनरी लगाई गई थी, तब 90 मीटर क्यूब पर 1890 मीटर प्रति घंटा काम करने की क्षमता रखी गई थी। अब इस क्षमता को बढ़ाकर 2000 मीटर प्रतिघंटा तक किए जाने का प्रपोजल है। साथ ही मशीन की कार्य क्षमता 72.46 प्रतिशत तक बढ़ जाएगी।

1983 में फेज 1 व 1988 में फेज 2 की मशीनरी लगाई गई
वर्ष 1983 में फेज एक व वर्ष 1988 में फेज 2 की मशीनरी लगाई गई थी। दोनों फेज से चंडीगढ़ को 20-20 एमजीडी पानी मिलता है। मशीनरी पुरानी होने के कारण हर दो दिन बाद निगम को शटडाउन लेना पड़ता है, जिससे पेयजल सप्लाई प्रभावित होती है। इस मशीनरी के लगने के दौरान पंचकूला, मोहाली व चंडीगढ़ को अतिरिक्त राशि वहन नहीं करना होगा।

10 वर्ष के लिए होगा कंपनी से अनुबंध
प्रोजेक्ट के अनुसार मोहाली प्रशासन पम्पको इंडिया से 10 वर्ष के लिए अनुबंध करेगा। इसमें 5 वर्ष में नई मशीनरी के साथ बिजली से संबंधित सभी कार्य कंपनी कराएगी। उसके बाद जो बिजली की बचत होगी। उससे कंपनी अपनी बचत करेगी। इस दौरान प्रशासन कंपनी को टेलीकॉम सेवाएं प्रदान करेगी। 56 माह तक चंडीगढ़ नगर निगम 25 लाख रुपये बिजली बिल व अन्य मेंटीनेंस का भुगतान करेगा। भुगतान में देरी होने पर 10 प्रतिशत ब्याज के साथ शुल्क देना होगा।

मोहाली प्रशासन की ओर से हमें प्रस्ताव मिला है। यह प्रस्ताव हमें मंजूर है। वैसे ही मशीनरी काफी पुरानी है। हर साल निगम करोड़ों रुपये बिजली बिल का भुगतान करता है। मशीनों का घर्षण भी बहुत होता है। बिना किसी अतिरिक्त राशि के मशीनरी बदली जा रही है। यह अच्चा प्रोजेक्ट है। इसके लिए हमने सहमति दे दी है। नई मशीनरी से बिजली की भी बचत होगी।
- केके यादव, निगम कमिश्नर
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