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‘साइबर सिक्योरिटी मजबूत करे, जागरूकता लाए तो बढ़ेगी डिजिटल ट्रांजक्शन’

Thu, 09 Nov 2017 09:12 AM IST
प्रो. करमजीत सिंह
प्रो. करमजीत सिंह Updated Thu, 09 Nov 2017 09:12 AM IST
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Pro. Karamjeet Singh article on digital transaction
नोटबंदी - फोटो : File Photo
देश को अगर कैशलेस करना है तो सबसे पहले जागरूकता, सुरक्षा, समानता और ढांचा मजबूत करना होगा। जागरूकता से मतलब सिर्फ खाते खोलना ही कैशलेस होना नहीं है। लोगों को इसका मतलब समझाया जाए।
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70 फीसदी भारत ग्रामीण है और एक बड़ा तबका अनपढ़ है। उन्हें इस प्रणाली को समझाने के लिए अध्यापकों की ड्यूटी लगानी चाहिए, बजाए चुनाव ड्यूटी में व्यस्त करने के। सुरक्षा से अभिप्राय है कि लोगों के पैसे को सुरक्षित किया जाए। उन्हें इस बात की गारंटी दी जाए कि अगर डिजिीटल ट्रांजक्शन या बैंक से उनके पैसे को नुकसान हुआ, तो उसकी भरपाई सरकार करेगी।
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साइबर सिक्योरिटी इतनी मजबूत करनी चाहिए कि ऑनलाइन पैसों की ठगी न हो सके। समानता के लिए ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बैंकिंग प्रणाली एक जैसी करनी होगी। गांवों में दूर-दराज तक बैंक नहीं हैं, तो ग्रामीण क्षेत्र कैसे कैशलेस होगा? ढांचा मजबूत से मतलब बैंकिंग सेक्टर का अपना एक भारतीय सिस्टम होना चाहिए।
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अभी तक भारत में डेबिट कार्ड की प्रणाली वीजा और मास्टर कार्ड के सहारे चल रही है, जो विदेशी कंपनियां हैं। वे हर ट्रांजक्शन का पैसा लेती हैं। अगर अपना सिस्टम होगा, तो डिजिटल ट्रांजक्शन पर लगने वाला चार्ज भी खत्म हो सकता है। इससे लोगों का भरोसा कैशलेस होने की तरफ ज्यादा बढ़ेगा।

कैशलेस सिस्टम का अन्य देशों में चलन

Pro. Karamjeet Singh article on digital transaction
प्रतीकात्मक फोटो
81 करोड़ डेबिट कार्ड, किसी के पास दर्जन तो किसी के पास एक भी नहीं
एक रफ आंकड़े के मुताबिक देश में करीब 81 करोड़ डेबिट कार्ड हैं। लेकिन यह 81 करोड़ लोगों के पास नही हैं। किसी के पास दो, किसी के पास चार तो किसी के पास एक दर्जन से भी ज्यादा हैं। एक कंपनी या एक व्यक्ति के अलग-अलग बैंकों और अलग-अलग खातों के कार्ड हैं। आधी आबादी ऐसी है, जिसके पास डेबिट कार्ड नहीं हैं। जन-धन योजना के तहत खाते खुले, लेकिन बड़ी संख्या में वे ऑपरेट नहीं हो रहे।

कैशलेस सिस्टम का अन्य देशों में चलन
- सिंगापुर में 61 फीसदी जनता कैशलेस सिस्टम इस्तेमाल करती है
- नीदरलैंड में आंकड़ा 60 फीसदी
- फ्रांस में 59 फीसदी आबादी कैशलेस
- कनाडा में यह आंकड़ा 57 फीसदी
- अमेरिका में 52 फीसदी
- भारत में सिर्फ दो फीसदी, 98 फीसदी आबादी कैश के सहारे
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