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बिजली निजीकरण: डेलॉइट की रिपोर्ट में प्रशासन को संदेह, ऊर्जा मंत्रालय से कमेटी बनाने की मांग
Thu, 08 Oct 2020 12:19 PM IST
खुशबू गोयल
रिशु राज सिंह, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 08 Oct 2020 12:19 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
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चंडीगढ़ के बिजली विभाग को निजी हाथों में देने के लिए प्रशासन की ओर से नियुक्त कंसल्टेंट कंपनी डेलॉइट ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। कंपनी ने बिजली विभाग के निजीकरण के लिए डीपीआर भी प्रशासन के हवाले कर दी है। कंसल्टेंट कंपनी की रिपोर्ट के कुछ बिंदुओं पर प्रशासन को संदेह है, इसलिए चंडीगढ़ ने ऊर्जा मंत्रालय को पत्र लिखकर एक उच्च स्तरीय समिति बनाने की मांग की गई है।
प्रशासन ने पत्र में कहा है कि कमेटी में केंद्रीय वित्त मंत्रालय, केंद्रीय गृह मंत्रालय, केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय और चंडीगढ़ प्रशासन के अधिकारियों को शामिल किया जाए, क्योंकि कई अहम मुद्दों पर फैसला लेना बाकी है। चंडीगढ़ के प्रशासक के सलाहकार मनोज परिदा के आदेश के अनुसार दिसंबर 2020 तक शहर की बिजली के निजीकरण की प्रक्रिया पूरी करनी है। केंद्र सरकार ने चंडीगढ़ प्रशासन को जनवरी 2021 तक का समय दिया है।
शहर के बिजली विभाग को किस तरह से निजी हाथों में दिया जा सकता है, इसके लिए कंसल्टेंट हायर करने की प्रक्रिया पिछले साल ही शुरू हो गई थी। कई बार टेंडर किए गए, जिसमें पावर फाइनेंस कारपोरेशन ने इंटरनेशनल कंपनी डेलॉइट को निजीकरण के सभी पेंच को सुलझाने का काम सौंपा था। इस कंपनी ने विभाग में काम करने वाले कर्मचारियों, पावर सप्लाई समेत कई अन्य तरह की जानकारियों को एकत्रित करके अपनी रिपोर्ट और डीपीआर सौंपी है।
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गौरतलब है कि शहर में इस समय 2.47 लाख बिजली उपभोक्ता हैं। इनमें से 2.14 लाख लोग घरेलू बिजली का इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि अन्य कॉमर्शियल, स्माल पावर, पब्लिक लाइटिंग और कृषि के कनेक्शन हैं। चंडीगढ़ की अपनी खुद की बिजली नहीं है, वह डिस्ट्रीब्यूशन का काम करता है।
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प्रशासन ने पत्र में कहा है कि कमेटी में केंद्रीय वित्त मंत्रालय, केंद्रीय गृह मंत्रालय, केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय और चंडीगढ़ प्रशासन के अधिकारियों को शामिल किया जाए, क्योंकि कई अहम मुद्दों पर फैसला लेना बाकी है। चंडीगढ़ के प्रशासक के सलाहकार मनोज परिदा के आदेश के अनुसार दिसंबर 2020 तक शहर की बिजली के निजीकरण की प्रक्रिया पूरी करनी है। केंद्र सरकार ने चंडीगढ़ प्रशासन को जनवरी 2021 तक का समय दिया है।
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शहर के बिजली विभाग को किस तरह से निजी हाथों में दिया जा सकता है, इसके लिए कंसल्टेंट हायर करने की प्रक्रिया पिछले साल ही शुरू हो गई थी। कई बार टेंडर किए गए, जिसमें पावर फाइनेंस कारपोरेशन ने इंटरनेशनल कंपनी डेलॉइट को निजीकरण के सभी पेंच को सुलझाने का काम सौंपा था। इस कंपनी ने विभाग में काम करने वाले कर्मचारियों, पावर सप्लाई समेत कई अन्य तरह की जानकारियों को एकत्रित करके अपनी रिपोर्ट और डीपीआर सौंपी है।
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गौरतलब है कि शहर में इस समय 2.47 लाख बिजली उपभोक्ता हैं। इनमें से 2.14 लाख लोग घरेलू बिजली का इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि अन्य कॉमर्शियल, स्माल पावर, पब्लिक लाइटिंग और कृषि के कनेक्शन हैं। चंडीगढ़ की अपनी खुद की बिजली नहीं है, वह डिस्ट्रीब्यूशन का काम करता है।
इन बिंदुओं पर असमंजस में हैं प्रशासन के अधिकारी
बिजली विभाग के निजीकरण के बाद जमीन, सब स्टेशन, तारें आदि का स्थानांतरण किया जाएगा, लेकिन जमीन, भवन और मशीनरी के स्थानांतरण करने की शक्ति केंद्र सरकार के पास है। प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बिजली विभाग ने सिक्योरिटी डिपॉजिट के तहत करीब 100 करोड़ रुपये केंद्र सरकार के कंसोलिडेटेड फंड में जमा किए हैं।
अधिकारियों को अंदेशा है कि जो भी प्राइवेट कंपनी शहर में बिजली का काम देखेगी, वह उस फंड को वापस मांगेगी। अधिकारियों का मानना है कि अगर वह पैसे वापस नहीं दिए गए तो कंपनी दिखाएगी कि लोगों को वह रुपये देने हैं। इसके अलावा विभाग के जो कर्मचारी हैं, वह उस कंपनी के कर्मचारी हो जाएंगे।
ऐसे में उन्हें पेंशन नहीं मिलेगी और उनके लिए ग्रेच्युटी ट्रस्ट बनाना पड़ेगा। इसके अलावा बिजली विभाग की सभी संपत्तियों का आकलन भी किया जाना है। ऐसे तमाम मुद्दे हैं, जिन पर स्थिति को स्पष्ट करना बाकी है। इसके लिए ही उच्च स्तरीय समिति बनाने की मांग की गई है।
अधिकारियों को अंदेशा है कि जो भी प्राइवेट कंपनी शहर में बिजली का काम देखेगी, वह उस फंड को वापस मांगेगी। अधिकारियों का मानना है कि अगर वह पैसे वापस नहीं दिए गए तो कंपनी दिखाएगी कि लोगों को वह रुपये देने हैं। इसके अलावा विभाग के जो कर्मचारी हैं, वह उस कंपनी के कर्मचारी हो जाएंगे।
ऐसे में उन्हें पेंशन नहीं मिलेगी और उनके लिए ग्रेच्युटी ट्रस्ट बनाना पड़ेगा। इसके अलावा बिजली विभाग की सभी संपत्तियों का आकलन भी किया जाना है। ऐसे तमाम मुद्दे हैं, जिन पर स्थिति को स्पष्ट करना बाकी है। इसके लिए ही उच्च स्तरीय समिति बनाने की मांग की गई है।
120 करोड़ लाभ में है शहर का बिजली विभाग
बिजली विभाग के निजीकरण को लेकर पिछले कई महीनों से धरने प्रदर्शन जारी हैं। कर्मचारी यूनियन का कहना है कि जब शहर का बिजली विभाग पहले ही 120 करोड़ रुपये लाभ कमा रहा है तो उसका निजीकरण क्यों किया जा रहा है।
यूनियन का कहना है कि जब पूरा देश कोविड 19 महामारी से लड़ रहा है खासकर स्वास्थ्य, सफाई और बिजली सेक्टर में लगे सरकारी कर्मचारी कोरोना वॉरियर्स की अहम भूमिका अदा कर रहे हैं तो संकट के दौर में बिजली विभाग को निजी हाथों में देने पर प्रशासन क्यों आतुर हैं।
इस सवाल पर प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि यह फैसला केंद्र सरकार का है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने पीएम मोदी के 20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज पर चौथी प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए केंद्र शासित प्रदेशों में बिजली वितरण का निजीकरण करने की घोषणा की थी।
यूनियन का कहना है कि जब पूरा देश कोविड 19 महामारी से लड़ रहा है खासकर स्वास्थ्य, सफाई और बिजली सेक्टर में लगे सरकारी कर्मचारी कोरोना वॉरियर्स की अहम भूमिका अदा कर रहे हैं तो संकट के दौर में बिजली विभाग को निजी हाथों में देने पर प्रशासन क्यों आतुर हैं।
इस सवाल पर प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि यह फैसला केंद्र सरकार का है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने पीएम मोदी के 20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज पर चौथी प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए केंद्र शासित प्रदेशों में बिजली वितरण का निजीकरण करने की घोषणा की थी।