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पंजाब में आशियाना बनाना है, पढ़ें गुडन्यूज
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 17 Dec 2014 01:30 PM IST
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पंजाब में रेत-बजरी की कमी और इनकी आसमान छूती कीमतें सरकार के लिए सिरदर्द बन गई हैं।
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लोकसभा चुनाव में हुई किरकिरी को अकाली-भाजपा गठबंधन अभी तक भुला नहीं पाया है। वहीं, कांग्रेस आगामी विधानसभा सत्र में भी इसे उठाने जा रही है। बेशक कुछ कानूनी अड़चनों के चलते खदानों की नीलामी काफी समय तक नहीं हो पाई थी, लेकिन अब मंजूरी मिलने और पंजाब सरकार की ओर से नई पॉलिसी बनाए जाने के बाद अपने स्तर पर रेत-बजरी लोगों को उपलब्ध करवा रही है।
अभी तक चार खदानों से सरकार इस तरीके से खनन कर रही है, जबकि मंगलवार को कुछ और खड्डों से यह निर्माण सामग्री लोगों को उपलब्ध करवाने को मंजूरी प्रदान कर दी गई। इससे अब करीब एक दर्जन खड्डों से रेत-बजरी का खनन शुरू हो जाएगा।
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अधिकारियों का दावा है कि इससे रेत-बजरी के रेटों में कमी का सिलसिला निरंतर आगे बढ़ता चला जाएगा। सरकारी स्तर पर करीब तीन दर्जन खदानों से रेत-बजरी निकाले जाने का लक्ष्य है। इस वक्त पिट हैड से 800 रुपये प्रति सैकड़ा की दर से रेत मिलता है, जबकि मार्केट में इसका रेट 1400 रुपये से भी पार है।
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अधिकारियों के अनुसार बाकी की खदानों से सरकारी स्तर पर खनन शुरू होने से प्राइवेट ठेकेदारों का एकाधिकार समाप्त होगा और रेटों में काफी कमी आएगी। इस बारे में मंगलवार को हुई एक बैठक में उप मुख्यमंत्री ने स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान सुखबीर बादल ने जनवरी 2015 के भीतर रेत-बजरी की आसमान छू रही कीमतों को काबू करने की समय सीमा तय कर दी है।
बैठक में भूमि मालिक किसानों को अपने ही खेत से जरुरत के लिए अपने ट्रैक्टर-ट्रॉली पर रेत ले जाने की ढील देने का मुद्दा भी सामने आया। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि इनकी धरपकड़ बंद की जाए।