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चौथी लहर से पहले आग से निपटने की तैयारी, अस्पतालों को 15 दिन में व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के आदेश

Fri, 29 Apr 2022 02:00 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Fri, 29 Apr 2022 02:00 AM IST
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Preparations to deal with the fire before the fourth wave, orders the hospitals to fix the arrangements in 15 days
चौथी लहर से पहले आग से निपटने की तैयारी, अस्पतालों को 15 दिन में व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के आदेश
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- स्वास्थ्य सचिव ने जारी किए आदेश, अस्पताल प्रबंधन को फायर ब्रिगेड विभाग के साथ मिलकर करवानी होगी मॉक ड्रिल
माई सिटी रिपोर्टर
चंडीगढ़। कोरोना महामारी की चौथी लहर से पहले स्वास्थ्य विभाग व प्रशासन ने तैयारियों को तेज कर दिया है। स्वास्थ्य सचिव यशपाल गर्ग ने वीरवार को आदेश जारी कर कहा कि 15 दिनों के अंदर सभी अस्पताल फायर ब्रिगेड विभाग की ओर से दिए गए बिंदुओं को किसी तकनीक विशेषज्ञ से जांच करवा लें। इसके अलावा अस्पताल प्रबंधन को फायर ब्रिगेड विभाग के साथ मिलकर मॉक ड्रिल भी करानी होगी। आदेश में स्पष्ट कहा गया है अस्पताल में आपातकाल स्थिति में निकलने के लिए निकास द्वार अनिवार्य रूप से होना चाहिए।
स्वास्थ्य सचिव ने आदेश जारी करते हुए कहा कि अस्पतालों में ऑक्सीजन का प्रयोग होता है, ऐसे में आगजनी के दौरान बड़े हादसे का खतरा बना रहता है। पिछले वर्ष हुए हादसों को ध्यान में रखते हुए इस बार पहले से सतर्कता बरती जा रही है। सभी निजी और सरकारी अस्पतालों को आपात स्थिति से निपटने के लिए व्यवस्थाओं को दुरुस्त करना होगा।
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जीएमसीएच-32 व जीएमएचएच-16 के पास नहीं है एनओसी
स्वास्थ्य सचिव के आदेश में लिखा है कि जीएमसीएच-32 और सेक्टर-16 अस्पताल में हाल ही में फायर ब्रिगेड विभाग ने मॉक ड्रिल की थी। इसी की तर्ज पर अन्य अस्पताल मॉक ड्रिल कराएं, लेकिन जीएमसीएच-32 और जीएमएसएच-16 के पास फायर ब्रिगेड विभाग का अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) नहीं है। हाल ही में पीजीआई के नेहरू एक्सटेंशन बिल्डिंग को विभाग ने एनओसी जारी की है। पीजीआई का कोविड डेडिकेट अस्पताल यहीं बना है।
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कोविड काल में हुए हादसे एक नजर में
2019 अगस्त से मई 2021 तक 24 से ज्यादा आगजनी की घटनाएं अस्पताल में हुईं
93 लोगों की इन हादसों में मौत हुई
21 लोगों की मौत गुजरात के एक अस्पताल में हुई थी
13 लोगों की मौत मुंबई के एक अस्पताल में हुई थी
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हादसों के बावजूद बिना अनुमति बन गए थे कोविड केयर सेंटर-
देश में हुए हादसों के बावजूद शहर में बिना फायर ब्रिगेड विभाग को सूचना दिए के धड़ल्ले से कोविड केयर सेंटर बन गए थे। जब विभाग को पता चला तो स्वास्थ्य विभाग को नोटिस जारी कर दिया, लेकिन तब तक सबकुछ तैयार था। विभाग का कहना था कि नेशनल बिल्डिंग कोड के अनुसार प्रत्येक इमारत के फायर सेफ्टी नियम अलग-अलग होते हैं। जहां कोविड केयर सेंटर बनाए गए हैं, वहां स्कूल या अन्य गतिविधियां होती थीं, लेकिन कोविड सेंटर बनने से यह अस्पताल की श्रेणी में आ गए हैं। इनके अग्नि सुरक्षा मानक भी बदल गए हैं।
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इन बिंदुओं पर करानी होगी जांच
1- अस्पताल में लगे अग्शिमन यंत्रों की समय सीमा समाप्ति की तिथि, सिलिंडर खाली तो नहीं, एक्सपायर हो गए हैं तो उन्हें फिर से भरवाया जाए।
2- सिलिंडरों में कोई रिसाव न हो, तकनीशियन से सभी बिंदुओं पर सिलिंडर की जांच करानी है।
3- अस्पताल में पर्याप्त अग्निशमन यंत्र और हाइड्रेंट है या नहीं, यह देखना होगा।
4- अग्निशमन विभाग के सुझाव के अनुसार आवश्यक उपकरण लगे हों।
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हाल ही में फायर ब्रिगेड विभाग ने किया है ऑडिट
स्वास्थ्य सचिव ने हाल ही में फायर विभाग को सभी अस्पतालों का ऑडिट करने को कहा था। विभाग ने ऑडिट करने के बाद रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग को दे दी थी। इसमें आपात स्थिति में कौन से उपकरण आवश्यक हैं और अस्पताल में वह नहीं लगे हैं सभी की सूची विभाग को सौंपी है। इसके बाद यशपाल गर्ग ने सभी अस्पतालों को 15 दिन का समय देकर आवश्यक व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने का समय दिया है।

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इस कारण गर्मियों में बढ़ जाता है खतरा
- कोविड में ऑक्सीजन का उपयोग बढ़ा
- सैनिटाइजर का भी उपयोग बढ़ा
- गर्मियों में एसी चलने से मशीनरी पर दबाव बढ़ने के बाद शॉर्ट सर्किट की घटनाएं होती हैं
- ऑक्सीजन कन्संट्रेटर के लिए भी बिजली का उपयोग बढ़ता है
कोट-
हमने फायर सेफ्टी ऑडिट करने के बाद स्वास्थ्य विभाग को रिपोर्ट दे दी है। अस्पतालों की ओर से मॉकड्रिल के लिए जो भी मदद मांगेगा उसे उपलब्ध करा दी जाएगी। आगजनी की घटनाओं से निपटने के लिए हम पूरी तरह से तैयार हैं। सभी अस्पतालों से भी अपील है कि वह आवश्यक उपकरण लगवाकर विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र ले लें।
-रोहित गुप्ता, मुख्य अग्निशमन अधिकारी
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