{"_id":"67be26b723fafdd2b90b7dc8","slug":"preparation-to-increase-property-tax-despite-being-rejected-by-the-house-the-corporation-sent-the-proposal-to-the-administration-chandigarh-news-c-16-pkl1043-642940-2025-02-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chandigarh News: संपत्ति कर बढ़ाने की तैयारी... सदन से रद्द होने के बावजूद निगम ने प्रस्ताव प्रशासन को भेजा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chandigarh News: संपत्ति कर बढ़ाने की तैयारी... सदन से रद्द होने के बावजूद निगम ने प्रस्ताव प्रशासन को भेजा
विज्ञापन
चंडीगढ़। शहर में संपत्ति कर बढ़ सकता है। 17 फरवरी को हुई निगम सदन की बैठक में रद्द होने के बावजूद नगर निगम ने प्रशासन को ‘आवश्यक कार्रवाई’ के लिए प्रस्ताव भेज दिया है। निगम ने आवासीय और वाणिज्यिक संपत्तियों पर कर की दर 3 से बढ़ाकर 12 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा है। अब यह प्रशासन पर निर्भर करेगा कि कितना फीसदी टैक्स बढ़ाया जाएगा।
पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया कई बार संपत्ति कर बढ़ाने के लिए कह चुके हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि संपत्ति कर का बढ़ना तय है। सदन की बैठक में आवासीय और वाणिज्यिक संपत्तियों पर टैक्स 3 से बढ़ाकर 12 प्रतिशत करने और जब तक 15 फीसदी न हो जाए हर साल 1 फीसदी बढ़ाने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन पार्षदों के विरोध के बाद रद्द कर दिया गया था। निगम आयुक्त अमित कुमार ने आपत्ति जताते हुए कहा था कि वह इस फैसले से सहमत नहीं हैं। निगम की वित्तीय स्थिति को ठीक करने के लिए कर बढ़ाना चाहिए। अब निगम ने सदन के फैसले को आयुक्त के जवाब के साथ प्रशासन को भेज दिया है। निगम ने ‘आवश्यक कार्रवाई’ का आग्रह किया है। सूत्रों के अनुसार प्रशासन के अधिकारी भी इसके पक्ष में ही हैं, क्योंकि प्रशासक कटारिया भी कई बार संपत्ति कर बढ़ाने के लिए कह चुके हैं। 21 जून को हुई बैठक में भी प्रशासक ने कहा था कि चंडीगढ़ में संपत्ति कर मोहाली और पंचकूला से काफी कम है।
संपत्ति कर बढ़ाने के पीछे तर्क
1. संपत्ति कर शहर के जीडीपी का एक फीसदी होना चाहिए। चंडीगढ़ की जीडीपी 65,000 करोड़ है। इस अनुसार 500 करोड़ से अधिक कर होना चाहिए लेकिन यह सिर्फ 45 करोड़ रुपये है।
विज्ञापन
2. मोहाली की 2.34 लाख की आबादी से 40 करोड़ का टैक्स आता है, लेकिन चंडीगढ़ की 12.50 लाख की आबादी से सिर्फ 45 करोड़
3. संपत्ति कर की दरों में 2018 और 2020 में संशोधन किया गया था, लेकिन वार्षिक दर में कोई बदलाव नहीं हुआ
पहले भी सदन से रद्द प्रस्तावों को प्रशासन ने किया है लागू
अधिकारियों का मानना है कि सदन में उन्होंने जो संपत्ति कर बढ़ाने का प्रस्ताव रखा था उससे 50 से 60 करोड़ रुपये अतिरिक्त आमदनी होगी। प्रशासन अपनी शक्तियों का प्रयोग कर संपत्ति कर को बढ़ा सकता है। ऐसा पहले भी हुआ है। हर बार पानी-सीवरेज सेस को बढ़ाने का विरोध किया जाता है, लेकिन प्रशासन द्वारा उसे अपनी शक्तियों का प्रयोग कर लागू कर दिया जाता है। सदन ने पार्किंग फ्री करने का एजेंडा पास कर दिया था, लेकिन प्रशासन ने रोक लगाते हुए नए सिरे से रेट जारी कर दिए थे, जो वर्तमान में लागू हैं।
विज्ञापन
पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया कई बार संपत्ति कर बढ़ाने के लिए कह चुके हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि संपत्ति कर का बढ़ना तय है। सदन की बैठक में आवासीय और वाणिज्यिक संपत्तियों पर टैक्स 3 से बढ़ाकर 12 प्रतिशत करने और जब तक 15 फीसदी न हो जाए हर साल 1 फीसदी बढ़ाने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन पार्षदों के विरोध के बाद रद्द कर दिया गया था। निगम आयुक्त अमित कुमार ने आपत्ति जताते हुए कहा था कि वह इस फैसले से सहमत नहीं हैं। निगम की वित्तीय स्थिति को ठीक करने के लिए कर बढ़ाना चाहिए। अब निगम ने सदन के फैसले को आयुक्त के जवाब के साथ प्रशासन को भेज दिया है। निगम ने ‘आवश्यक कार्रवाई’ का आग्रह किया है। सूत्रों के अनुसार प्रशासन के अधिकारी भी इसके पक्ष में ही हैं, क्योंकि प्रशासक कटारिया भी कई बार संपत्ति कर बढ़ाने के लिए कह चुके हैं। 21 जून को हुई बैठक में भी प्रशासक ने कहा था कि चंडीगढ़ में संपत्ति कर मोहाली और पंचकूला से काफी कम है।
विज्ञापन
संपत्ति कर बढ़ाने के पीछे तर्क
1. संपत्ति कर शहर के जीडीपी का एक फीसदी होना चाहिए। चंडीगढ़ की जीडीपी 65,000 करोड़ है। इस अनुसार 500 करोड़ से अधिक कर होना चाहिए लेकिन यह सिर्फ 45 करोड़ रुपये है।
विज्ञापन
2. मोहाली की 2.34 लाख की आबादी से 40 करोड़ का टैक्स आता है, लेकिन चंडीगढ़ की 12.50 लाख की आबादी से सिर्फ 45 करोड़
3. संपत्ति कर की दरों में 2018 और 2020 में संशोधन किया गया था, लेकिन वार्षिक दर में कोई बदलाव नहीं हुआ
पहले भी सदन से रद्द प्रस्तावों को प्रशासन ने किया है लागू
अधिकारियों का मानना है कि सदन में उन्होंने जो संपत्ति कर बढ़ाने का प्रस्ताव रखा था उससे 50 से 60 करोड़ रुपये अतिरिक्त आमदनी होगी। प्रशासन अपनी शक्तियों का प्रयोग कर संपत्ति कर को बढ़ा सकता है। ऐसा पहले भी हुआ है। हर बार पानी-सीवरेज सेस को बढ़ाने का विरोध किया जाता है, लेकिन प्रशासन द्वारा उसे अपनी शक्तियों का प्रयोग कर लागू कर दिया जाता है। सदन ने पार्किंग फ्री करने का एजेंडा पास कर दिया था, लेकिन प्रशासन ने रोक लगाते हुए नए सिरे से रेट जारी कर दिए थे, जो वर्तमान में लागू हैं।