कुर्सी बचते ही बाजवा ने बुलाई कांग्रेसियों की बैठक
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हाईकमान से अभयदान मिलने के बाद आखिरकार प्रदेश कांग्रेस प्रधान प्रताप बाजवा ने पीपीसीसी की बैठक बुलाई है। लोकसभा चुनाव में पार्टी की हार के तुरंत बाद समीक्षा बैठक होनी चाहिए थी। पर नतीजे के साथ ही बाजवा के इस्तीफे की मांग तेज हो गई।
ऐसे माहौल में बैठक बुलाने की मांग के बावजूद बाजवा टालते रहे। आखिरकार हाईकमान से कुर्सी को कोई खतरा नहीं होने का संकेत मिलने के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बाजवा ने कांग्रेस भवन में मीटिंग बुलाई है।
शकील और चौधरी बनेंगे बाजवा की ढाल
सबसे अहम बात यह है कि इस मीटिंग में प्रदेश प्रभारी शकील अहमद और सह-प्रभारी हरीश चौधरी भी शामिल हो रहे हैं। माना जा रहा है कि दोनों नेता बाजवा की ढाल के तौर पर काम करेंगे।
बाजवा गुट का मानना है कि राष्ट्रीय नेताओं की मौजूदगी में बाजवा विरोधी उतना हंगामा नहीं करेंगे। अगर हुआ भी तो वे संभाल लेंगे। कैप्टन अमरिंदर सिंह गुट चुनाव से बाद से ही बाजवा को घेरने की फिराक में था।
पर अब तक कोई प्लेटफार्म नहीं मिला था। पर बैठक में विरोधी, बाजवा पर हमले करेंगे। विरोधियों को शांत करने केलिए बैठक के प्रधानगी मंडल में सीएलपी लीडर सुनील जाखड़ को भी शामिल किया गया है। जाखड़ को कैप्टन गुट का माना जाता है।
पार्टी को सरगर्म करने की नीतियां बनेंगी
बैठक के एजेंडे में हार पर मंथन के बजाय दूसरे मुद्दे रखे गए हैं। जिनमें केंद्रीय बजट के पंजाब पर प्रभाव, राज्य के सियासी हालात, राज्य सरकार की नशों के खिलाफ फर्जी मुहिम, सूखे से धान की फसल पर पड़ने वाले बुरे प्रभाव, खराब बिजली सप्लाई, सीएम की ओर से अफसरशाही के नियंत्रण में न होने की बात कहना और अफसरशाही पर पैसे जमा करने के आरोप लगाना आदि मुद्दे शामिल हैं।
इनके अलावा पार्टी को सरगर्म करने को नीतियां बनाई जाएंगी। बाजवा गुट की कोशिश है कि लोकसभा चुनाव में हार की बात पर ज्यादा चर्चा ही न हो, विरोधियों को दूसरी बातों में उलझा दिया जाए।