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Haryana Loksabha Election: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना बनेगा मुद्दा, फसल मुआवजे का गणित बिगाड़ न दे समीकरण
Thu, 11 Apr 2024 02:26 PM IST
निवेदिता वर्मा
आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Thu, 11 Apr 2024 02:26 PM IST
सार
साल 2019 में खरीफ फसल के लिए हरियाणा के 8,29,738 किसानों ने पीएम फसल योजना के लिए पंजीकरण कराया था, जो 2023 में घटकर 1,46,531 पर आ गए। इसकी बड़ी वजह मुआवजा मिलने में लेटलतीफी और बीमा कंपनियों का रवैया। किसानों को सबसे ज्यादा परेशानी बीमा कंपनियों के रवैये से हुई।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : ANI
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विस्तार
लोकसभा चुनाव में इस बार प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) बड़ा मुद्दा बनेगा। किसान संगठन और विपक्ष कई बार निजी बीमा कंपनियों के चंगुल से छुटकारा पाने का मुद्दा उठा चुके हैं।
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किसान संगठनों का कहना है कि जब तक किसान सड़क पर नहीं उतरते, तब तक बीमा कंपनी और सरकार उन्हें मुआवजा नहीं देती। कुछ जिलों के किसानों का पिछले सालों का मुआवजा भी लंबित है, जो करोड़ों का है। वहीं, हरियाणा सरकार का दावा है कि पीएम फसल योजना किसानों के लिए वरदान है। कुछ रुपये देकर किसान अपनी फसलों की सुरक्षा को लेकर निश्चिंत हो जाता है। जो नुकसान बीमा कंपनियों के दायरे में नहीं आता है, उसकी भरपाई सरकार करती है। बाढ़ और बेमौसमी बारिश से नुकसान का मुआवजा सरकार देती है।
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सरकार का दावा है कि पूरे देश में हरियाणा सरकार सबसे ज्यादा मुआवजा देती है। हरियाणा में 15 हजार प्रति एकड़ मुआवजा मिलता है, जो देश में कहीं नहीं है।
2016 में हुई थी शुरुआत
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना 2016 में पूरे देश में शुरू हुई थी। इस योजना का मकसद सभी किसानों की फसलों का बीमा करना और कृषि जोखिम को कम करना था। यह योजना प्राकृतिक आपदाओं और कीटों या बीमारियों के कारण फसल नुकसान का सामना करने वाले किसानों को बीमा और वित्तीय सहायता प्रदान करती है। शुरुआत में तो किसानों ने इसमें दिलचस्पी ली। बीमा कंपनियों ने अच्छा खासा क्लेम भी दिया। तीन साल तक सब कुछ ठीक चलता रहा। मगर धीरे-धीरे इस योजना से किसानों का मोह भंग होने लगा।
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साल 2019 में खरीफ फसल के लिए हरियाणा के 8,29,738 किसानों ने पीएम फसल योजना के लिए पंजीकरण कराया था, जो 2023 में घटकर 1,46,531 पर आ गए। इसकी बड़ी वजह मुआवजा मिलने में लेटलतीफी और बीमा कंपनियों का रवैया। किसानों को सबसे ज्यादा परेशानी बीमा कंपनियों के रवैये से हुई। बीमा कंपनियां किसानों से बिना पूछे उनके खाते से गुपचुप तरीके से पैसे काटती रहीं। शुरुआत में सरकार ने कहा कि फसल बीमा योजना स्वैच्छिक है, मगर जो किसान बैंक से ऋण लेते हैं, बीमा कंपनियां उनके खाते से पैसे काट लेते थे। कई बार हंगामा और विधानसभा में मुद्दा उठने के बाद सरकार ने एलान किया कि यदि कोई किसान बैंक को लिखकर देता है कि वह प्रीमियम नहीं कटवाना चाहता है तो प्रीमियम नहीं काटा जा सकता। मगर इस बारे में किसानों को कोई सूचना नहीं दी गई और बीमा कंपनियां मनमाने ढंग से प्रीमियम काटती रहीं।
करीब 400 करोड़ का मुआवजा बाकी
मुआवजे की देरी के पीछे बीमा कंपनियों की लापरवाही भी सामने आती रही हैं। बीते विधानसभा के सत्र में भी यह मुद्दा उठा था, जिसमें इनेलो नेता अभय सिंह चौटाला ने सरकार से सवाल पूछा था कि तीन साल में कितना मुआवजा बकाया है। जवाब में बताया गया था कि करीब 400 करोड़ रुपये का मुआवजा अभी बाकी है। सरकार ने जवाब में मुआवजा नहीं मिलने के पीछे के कारणों का भी उल्लेख किया था। इसके मुताबिक किसानों का सत्यापन, बैंक का विलय और किसान की मृत्यु होने से मुआवजा नहीं बंट सका। वहीं, बीते सीजन में कलस्टर-2 में आने वाले जिलों अंबाला, हिसार, गुरुग्राम, जींद, करनाल, महेंद्रगढ़ और सोनीपत के किसानों की फसल का बीमा करने से कंपनी ने इन्कार कर दिया। इन जिलों की किसानों की फसल का बीमा नहीं हुआ है। इन जिलों के करीब दो लाख किसान प्रभावित हुए थे। हालांकि सरकार ने बाद में दावा किया नुकसान की स्थिति में सरकार किसानों का मुआवजा देगी।
सरकार का दावा, फायदेमंद रही है योजना
हरियाणा सरकार के मुताबिक प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू होने के बाद राज्य में अब तक किसानों को 7648 करोड़ 33 लाख रुपये का मुआवजा मिल चुका है। इस दौरान किसानों से 1943 करोड़ रुपये का प्रीमियम लिया गया। किसानों के अलावा बीमा की प्रीमियम राशि राज्य सरकार और केंद्र सरकार भी कंपनियों को देती है। इस समयावधि के दौरान राज्य सरकार ने करीब 2575 करोड़ रुपये और केंद्र सरकार ने 2295 करोड़ रुपये का प्रीमियम बीमा कंपनियों को दिया। बीमा कंपनियां खरीफ फसल की कपास, धान, बाजरा, मक्का, मूंग और रबी की गेहूं, जौ, चना, सरसों व सूरजमुखी की फसल को कवर करती हैं। जो फसलें बीमा कंपनियों के दायरे में नहीं आतीं, उनका मुआवजा सरकार देती है। 25 से 50 प्रतिशत फसल के खराब होने पर नौ हजार रुपये प्रति एकड़, 50 से 75 प्रतिशत फसल खराब होने पर 12 हजार रुपये और 75 प्रतिशत से अधिक फसल खराब होने पर 15 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा दिया जाता है। पिछले साल बाढ़ से प्रभावित हुई फसलों को सरकार ने इसी तर्ज पर मुआवजा बांटा था।
कब कितना प्रीमियम दिया और मुआवजा मिला
सीजन बीमा प्रीमियम मुआवजा
खरीफ 2018 58092.86 80448.59
रबी 2018-19 7289.08 14277.3
खरीफ 2019 85663.92 59076.09
रबी 2019-20 36475.23 34576.79
खरीफ 2020 96367.73 110981.77
रबी 2020-21 34400.78 15784.25
खरीफ 2021 88099.5 140007.72
रबी 2021-22 34878.44 25372.68
खरीफ 2022 102040.01 180473
रबी 2022-23 36628.72 38629
खरीफ 2023 37418.88 -----
रबी 2023-24 23675.22 -----
जब तक धरने-प्रदर्शन नहीं, तब तक किसानों को मुआवजा नहीं : चढूनी
भारतीय किसान यूनियन चढूनी गुट के प्रधान गुरनाम सिंह चढूनी ने आरोप लगाया कि बीमा कंपनियां सरकार की चहेती हैं। ये किसानों से प्रीमियम तो ले लेती हैं, मगर किसानों को मुआवजा नहीं देतीं। जब मुआवजे की बारी आती है तो बीमा कंपनी कोई न कोई कमी निकाल देती है। हिसार और गोहाना के किसानों के साथ ऐसा ही हुआ था। हालात यह है कि जब तक किसान संगठन आंदोलन न करें, तब तक किसानों को बीमे की राशि नहीं मिलती। कई किसान ऐसे हैं, जिन्हें मुआवजा तीन से चार साल बाद नहीं मिला। हमारी सरकार से मांग है कि फसल बीमा योजना में सरकारी बीमा कंपनियों को शामिल करना चाहिए और क्लेम के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने से छुटकारा मिलना चाहिए।
किसान कंगाल और बीमा कंपनियां मालामाल : हुड्डा
पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा का कहना है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना सिर्फ बीमा कंपनियों को लाभ पहुंचाने का एक माध्यम है। इस व्यवस्था से किसान कंगाल होता गया और कंपनियां मालामाल हो रही हैं। हरियाणा में वर्ष 2022-23 में एआईसी कंपनी ने 703.84 करोड़ रुपये प्रीमियम लिया, लेकिन सिर्फ 7.46 करोड़ रुपये मुआवजा दिया। यानी 99 प्रतिशत राशि कंपनी की तिजोरी में गई। इस बार प्रदेश के सात जिलों के करीब तीन लाख किसानों की फसल का बीमा ही नहीं किया गया। ऐसी योजना किस काम की है।
विपक्ष अच्छी योजनाओं को भी हतोत्साहित करता है : कृषि मंत्री
राज्य के कृषि मंत्री कंवरपाल गुर्जर ने कहा कि विपक्ष अच्छी योजनाओं को भी हतोत्साहित करने का काम करता है। भाजपा सरकार में किसानों को सबसे ज्यादा मुआवजा दिया गया है। हरियाणा का किसान संतुष्ट है और आर्थिक तरक्की कर रहा है। पीएम फसल योजना के तहत बहुत कम प्रीमियम भरकर किसान अपनी फसल की सुरक्षा को लेकर सुनिश्चित होता है। पीछे सरकार ने कपास का मुआवजा दिया था। ओला से खराब हुई फसल का मुआवजा देने का भी कार्य जल्द किया जाएगा।