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पंजाब में डॉक्टर भर्ती में बड़े पैमाने पर हुई धांधली

Tue, 27 May 2014 09:08 AM IST
सुरजीत सिंह सत्ती/अमर उजाला, चंडीगढ़
सुरजीत सिंह सत्ती/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 27 May 2014 09:08 AM IST
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PPSC, Punjab was rigged on a large scale in the recruitment doctor, High court

पंजाब लोक सेवा आयोग (पीपीएससी) द्वारा 2008-09 में की गई 312 मेडिकल अफसरों की भर्ती में बड़े स्तर पर धांधली हुई थी।

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धांधली भी ऐसी कि अकादमिक शिक्षा में दक्ष उम्मीदवारों को शून्य और असफल चहेते उम्मीदवारों को 98 फीसदी तक अंक देकर पास कर दिया गया।

इस पूरे मामले की जांच के लिए हाईकोर्ट द्वारा गठित दो सदस्यीय कमेटी, जिसमें सीबीआई के सेवानिवृत्त संयुक्त निदेशक एमएस बाली व पंजाब के डीजीपी (विजिलेंस) सुरेश अरोड़ा शामिल थे, ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि भर्ती का परिणाम ‘टेलर मेड रिजल्ट’ है।

भर्ती में परिवारवाद की बात सामने आई है। जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि अनियमितताओं के कारण एचपीएससी के तत्कालीन चेयरमैन एसके  सिन्हा, सदस्यों डीएस ग्रेवाल, रविंदर कौर, अनिल शर्मा, डीएस महल और सतवंत सिंह मोही के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला बनता है।
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रिपोर्ट को रिकॉर्ड में लेते हुए हाईकोर्ट ने एक जुलाई को होने वाली मामले की अगली सुनवाई पर भर्ती के बारे में आगे निर्देश जारी करने की बात कही है।

जांच कमेटी की रिपोर्ट में कई आवेदकों के तत्कालीन चेयरमैन एसके सिन्हा से सीधे संपर्क में होने की बात भी जांच में साबित हुई है।

चेयरमैन के अलावा सदस्य सतवंत सिंह मोही ने भी आवेदकों को अधिक अंक देकर लाभ पहुंचाया। इस रिपोर्ट के लिए हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजय किशन कौल एवं जस्टिस अरुण पल्ली की डिविजन बेंच ने जांच टीम की सराहना की और हैरानी जताई कि भर्ती में किस कदर धांधली की गई।
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219 उम्मीदवारों को चेयरमैन ने शून्य अंक दिए जबकि इंटरव्यू के मौके अन्य सदस्यों ने इन्हीं उम्मीदवारों को 20 से 85 प्रतिशत तक अंक दे दिए।

रिपोर्ट में 14 उम्मीदवारों को 100 अंक देने का उल्लेख भी किया गया है। इसके अनुसार कई उम्मीदवार पीपीएससी के सदस्यों के साथ सीधे संपर्क में थे।

16 उम्मीदवारों की मोही के साथ टेलिफोन संपर्क होने की बात रिपोर्ट में शामिल है। रविंदर कौर नामक सदस्य को इंटरव्यू में पटियाला में दर्शाया गया था, जबकि लॉग बुक के अनुसार वह चंडीगढ़ में थीं।

यही नहीं इस भर्ती के दौरान एसएस मोही की चल और अचल संपत्ति में काफी इजाफा हुआ। इसे भी एसआईटी ने संदेह के घेरे में रखा है।

यह है मामला
पीपीएससी ने वर्ष 2008 में 100 और 2009 में 212 डॉक्टरों की भर्ती की थी। इस भर्ती में धांधली होने के समाचार पत्र प्रकाशित हुए थे।

इसी के आधार पर पूर्व पुलिस महानिदेशक केपीएस गिल ने जनहित याचिका दायर करके सीबीआई जांच कराने की मांग की थी।

हाईकोर्ट ने सरकार को जांच का निर्देश दिया था। सरकार ने विजिलेंस ब्यूरो से जांच कराने का निर्णय लिया था। इसकी रिपोर्ट भी हाईकोर्ट में पेश की गई थी, लेकिन इसी दौरान तत्कालीन चेयरमैन एसके सिन्हा ने हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल करके किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग की थी।

हाईकोर्ट ने विजिलेंस ब्यूरो की रिपोर्ट को नकारते हुए विशेष जांच टीम का गठन किया, जिसने सीलबंद रिपोर्ट पेश की है। हाईकोर्ट में रिपोर्ट खोली गई तो भर्ती में बड़े स्तर पर धांधली का खुलासा हुआ है।

जांच टीम ने यह भी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इंटरव्यू के लिए दिए गए अंकों में भी कई जगह पर अंक बढ़ाए गए हैं।

यह रहे जांच के अन्य बिंदु
हाईकोर्ट में याचिका की सुनवाई के दौरान ही भर्ती नियम नियमित किए गए। आयोग ने सब कमेटी गठित कर इंटरव्यू के 40 अंकों को बढ़ाकर 50 किया।

इससे कम शैक्षणिक दक्षता वाले उम्मीदवारों को लाभ मिला। इंटरव्यू में अंक देने के लिए नया विषय, स्वास्थ्य में समाज सेवा को शामिल किया गया जबकि पहले से इस बदलाव से परिचित उम्मीदवारों ने सरकारी सर्टिफिकेट की बजाए ग्राम प्रधान एवं एनजीओ से जारी सर्टिफिकेट पेश किए।


बदलाव की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई, परिणामस्वरूप इंटरव्यू में अधिकतर उम्मीदवार सर्टिफिकेट पेश नहीं कर सके।

पीपीएससी सदस्यों के खातों में आया पैसा
आयोग का सदस्य रहते सतवंत सिंह मोही, उनके ट्रस्ट मोही फाउंडेशन, बेटे चंद्रेश्वर और सर्वेश्वर के खातों में करीब 41 लाख रुपये आए। इसका स्पष्टीकरण जांच कमेटी को नहीं मिला। इस पैसे में से निवेश भी हुआ। हालांकि आयोग के किसी सदस्य के साथ किसी उम्मीदवार से पैसे का लेन देन साबित नहीं हो सका।

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