पंजाब में गहराया बिजली संकट: अघोषित कटौती से जनता बेहाल, कोयले की कमी से 7300 मेगावाट की मांग नहीं हो पाई पूरी
रोपड़ थर्मल प्लांट में सात, लहरा में चार, राजपुरा में 18, तलवंडी साबो में छह, गोइंदवाल में दो दिन का कोयला बचा है। कोयले की कमी के चलते विभिन्न थर्मलों की पांच यूनिटें बंद रहीं और कुल 15 यूनिटों में से 10 ही चल सकीं।
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पंजाब के थर्मल प्लांटों में कोयला संकट के चलते बिजली की किल्लत लगातार बढ़ती जा रही है। बुधवार को मांग के मुकाबले बिजली की सप्लाई में भारी कमी के कारण पंजाब के सभी शहरों और गांवों में चार से पांच घंटे तक के कट लगे। इसके कारण सूबे में गर्मी के कारण हाहाकार मच गया। प्रदेश में बिजली की अधिकतम मांग 7300 मेगावाट रही, जिसे पूरा करने के लिए पावरकॉम के पास केवल 4000 मेगावाट बिजली की उपलब्धता रही। रोपड़ की कुल चार में से दो, तलवंडी साबो की तीन में दो और गोइंदवाल की दो में एक यूनिट बंद रही। इससे 2010 मेगावाट बिजली सप्लाई ठप रही।
जानकारी के अनुसार रोपड़ थर्मल प्लांट में सात, लहरा में चार, राजपुरा में 18, तलवंडी साबो में छह, गोइंदवाल में दो दिन का कोयला बचा है। कोयले की कमी के चलते विभिन्न थर्मलों की पांच यूनिटें बंद रहीं और कुल 15 यूनिटों में से 10 ही चल सकीं। पावरकॉम को रोपड़ व लहरा प्लांटों से बुधवार को 1188 मेगावाट बिजली मिली, वहीं प्राइवेट प्लांटों से 2095 मेगावाट, हाईडल प्रोजेक्टों से 480 मेगावाट समेत अन्य स्रोतों से करीब 4000 मेगावाट बिजली मिली।
चूंकि प्रदेश में बिजली की अधिकतम मांग 7300 मेगावाट रही। इसलिए पावरकॉम ने मांग को पूरा करने के लिए बाहर से 3000 मेगावाट बिजली खरीदी, जो करीब 10 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से मिली। बावजूद इसके 300 मेगावाट बिजली की कमी के चलते पावरकॉम को कट लगाने के लिए मजबूर होना पड़ा। तेज गर्मी के कारण जनता में हाहाकार मच गया। लोग दिन भर परेशान रहे।
लंबे कटों की आशंका
पैडी सीजन नजदीक है। माहिरों का मानना है कि अगर कोयले का संकट इसी तरह रहा तो आने वाले दिनों में पंजाब के लोगों को लंबे कटों का सामना करना पड़ सकता है। बुधवार को पंजाब के शहरों व गांवों में रह-रहकर कभी 15 तो कभी आधे घंटे का कट लगने से भीषण गर्मी के मौसम में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
जल्द दूर होगा कोयला संकट: ग्रेवाल
पावरकॉम के डायरेक्टर वितरण डीपीएस ग्रेवाल ने बताया कि बिजली की आपूर्ति में कमी के चलते पावरकॉम को शहरों और गांवों में चार से पांच घंटे के कट लगाने पड़े। जबकि कंडी इलाकों में चार घंटे तक के कट लगे। 29 अप्रैल तक रोपड़ और तलवंडी साबो की बंद यूनिटों के दोबारा चलने की पूरी उम्मीद है, जिसके बाद बिजली की किल्लत काफी हद तक कम होगी। उन्होंने दावा किया कि कोयले का संकट भी जल्द दूर हो जाएगा।