किसानों को मिला 'धोखा', आलू के रेट जमीन पर
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बीते साल पंजाब के किसानों के लिए सोना उगलने वाली आलू की फसल इस बार धोखा दे गई है। आलू के रेट बेतहाशा गिर गए हैं। पिछले साल पंजाब का आलू 4500-5000 रुपये प्रति क्विंटल तक बिका था।
बीते साल मार्च माह में आलू के रेट 1200-1500 रुपये प्रति क्विंटल तक थे, लेकिन इस बार रेट 250-400 रुपये प्रति क्विंटल के बीच बिक रहा है।
थोक में गिरावट के वाबजूद चंडीगढ़ की मार्केट में आलू दोगुने दामों पर मिल रहा है। थोक में साढ़े तीन रुपये किलो वाला आलू आढ़ती कमीशन और मार्केट कमेटी फीस केबाद 8 से 12 रुपये प्रतिकिलो तक मिल रहा।
किसान को खरीदार ही नहीं मिल रहे
हालत यह है कि बाजार में खरीदार ही नहीं हैं। प्रमुख आलू उत्पादक राज्यों में ज्यादा उत्पादन को इसकी वजह माना जा रहा है। पंजाब में इस बार आलू का रकबा करीब 87 हजार हेक्टेयर है।
उत्पादन सौ क्विंटल प्रति एकड़ से भी ज्यादा होने की उम्मीद है। पक्के आलू की खुदाई फरवरी अंत में शुरू हुई। शुरुआत में व्यापारी थे, पर रेट ज्यादा नहीं मिले। दिन बीतने के साथ खरीदार ही गायब हो गए हैं।
पोटैटो ग्रोअर्स एसोसिएशन के महासचिव जसविंदर संघा के मुताबिक दूसरे राज्यों में भी उत्पादन ज्यादा हुआ है। दूसरे राज्यों के कोल्ड स्टोर भर गए हैं, फिर भी आलू पड़ा है। सभी जगह रेट गिर गए हैं। पश्चिम बंगाल में आलू का रेट 150 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है।
आलू की खुदाई अभी बाकी है
पंजाब में आलू की तीस प्रतिशत खुदाई अभी बाकी है, जोकि पंद्रह अप्रैल तक होने की उम्मीद है। अगर जल्द फसल न बिकी तो बढ़ती गर्मी से फसल के गल जाने की आशंका है।
वहीं, भारतीय किसान यूनियन के प्रधान बलबीर सिंह राजेवाल कहते हैं कि आलू के रेट पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश से तय होते हैं। दोनों जगह उत्पादन ज्यादा होने से इस बार बाजार में खरीदार ही नहीं हैं।
इसे देखते हुए किसानों में आलू कोल्ड स्टोर में रखने की होड़ लगी है। 8-10 साल पहले भी ऐसा हुआ था। रेट बढ़ने की उम्मीद में किसानों ने फसल कोल्ड स्टोर में रख दी थी, लेकिन रेट नहीं बढ़े। बाद में किसानों ने फसल उठाई ही नहीं।
किसान से खरीद रहे 3 रुपये किलो और बेच रहे 12 रुपये का
थोक में गिरावट के बाद भी मार्केट में आलू दोगुने दामों पर मिल रहा है। साढ़े तीन रुपए किलो वाला आलू आढ़ती कमीशन और मार्केट कमेटी फीस के बाद 8 से 12 रुपए प्रति किलो तक मिल रहा।
किसानों से आलू कौड़ियों के भाव खरीदा जा रहा है। हालांकि पिछले साल के मुकाबले रेट में काफी गिरावट है। लेकिन थोक और रिटेल का अंतर महंगाई लोगों की जेब काट रहा है।
पिछले साल यही आलू थोक मार्केट में 10 रुपए प्रति किलो तक बिका। आढ़तियों के अनुसार किसानों ने पिछले रेट को देखते हुए इस बार ज्यादा एरिया में आलू उगाया। अब मार्केट में यह आधे दामों पर बिक रहा है।
50 किलो अच्छे आलू की बोरी थोक में 150 रुपए (3 रुपये किलो) की बिक रही है जबकि रिटेल में यही 300 रुपए में मिल रही है। सेक्टर-26 स्थित सब्जी मंडी में 5 प्रतिशत आढ़ती कमीशन और 2 प्रतिशत मार्केट कमेटी फीस ली जाती है। इसका बोझ भी ग्राहकों पर ही पड़ता है।