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Hindi News ›   Chandigarh ›   Post covid : Patients suffered panic disorder and tension 

कोरोना को तो मात दे दी, अब खौफ और तनाव से लड़ रहे एक नई जंग

Sat, 12 Dec 2020 11:14 AM IST
निवेदिता शर्मा वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता शर्मा Updated Sat, 12 Dec 2020 11:14 AM IST
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Post covid : Patients suffered panic disorder and tension 
कोविड-19 - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
कोरोना को हराकर घर लौटे मरीज ठीक होने के बाद भी खौफ में जी रहे हैं। उन्हें लगातार यह डर सताता रहता है कि कहीं वे दोबारा संक्रमित न हो जाए। इससे उनका तनाव बढ़ रहा है और कई को तो मनोचिकित्सक की मदद लेनी पड़ रही है।
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विशेषज्ञों का कहना है कि संक्रमण के डर से वे ठीक होने के बाद पैनिक डिसऑर्डर के शिकार हो रहे हैं। ऐसी स्थिति में उन्हें काउंसिलिंग के साथ ही दवाओं की जरूरत पड़ सकती है। चंडीगढ़ के गवर्नमेंट मल्टी स्पेशयलिटी अस्पताल-16 में बनाए गए पोस्ट कोविड-क्लीनिक में मरीजों की संख्या दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। किसी को नींद नहीं आ रही तो कोई संक्रमण से बचाव के एहतियात बरतने में अपने साथ ही परिवार के सदस्यों को परेशानी में डाल रहा है। 
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दोबारा संक्रमण के डर से उड़ रही नींद
सेक्टर-32 निवासी युवती कोरोना को हराकर 21 दिन पहले घर लौट चुकी हैं, लेकिन उन पर अब भी संक्रमण का डर हावी है। इस कारण वह न तो ठीक से खा-पी रही हैं और न ही सो पा रही हैं। उनकी पूरी रात करवट बदलते हुए गुजरती है। इसे लेकर उनके माता-पिता काफी परेशान हैं। उनका इलाज पीजीआई के मनोचिकित्सा विभाग में कराया जा रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि वह काउंसिलिंग से ठीक हो जाएंगी।
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बार-बार हाथ धोते हैं, फिर भी संतुष्ट नहीं
सेक्टर-22 निवासी युवक कोरोना को मात दे चुके हैं, लेकिन अब भी उनके मन से संक्रमित होने का डर निकल नहीं पा रहा है। वे घर में कई बार साबुन से हाथ धोते रहते हैं। हाथ धोने के बाद भी उनका मन संतुष्ट नहीं होता। वे परिवार के सदस्यों को भी साफ-सफाई बरतने के लिए समझाते रहते हैं। कई बार तो झुंझलाहट और घबराहट का शिकार भी हो जाते हैं। जीएमएसएच-16 की पोस्ट कोविड क्लीनिक में उनकी काउंसिलिंग करवाई जा रही है।

लगातार बढ़ रही है ऐसे मरीजों की संख्या
जीएमएसएच-16 में बनाए गए पोस्ट कोविड क्लीनिक में ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। शुरुआती दौर में क्लीनिक में इक्का-दुक्का मरीज आ रहे थे, जिन्हें सिरदर्द, अनिद्रा और एलर्जी की शिकायत रहती थी। वहीं अब आने वाले मरीज दोबारा संक्रमित होने के डर से तनाव में रहने की जानकारी दे रहे हैं। डॉ. नागपाल का कहना है कि इससे बचाव के लिए मनोरोग चिकित्सक क्लीनिक के साथ ही हेल्प डेस्क के माध्यम से ऐसे मरीजों की काउंसिलिंग की जा रही है। 


काउंसिलिंग के साथ दवाएं भी जरूरी
पीजीआई मनोरोग चिकित्सा विभाग के डॉ. सुबोध ने बताया कि ऐसे काफी मरीज आ रहे हैं जो कोरोना ठीक हो जाने के बाद भी तनाव में हैं। उनकी काउंसिलिंग करके उनका तनाव दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। उन पर बीमारी के दौरान झेली गई परेशानी का डर इस कदर हावी हो चुका है कि वे दोबारा संक्रमित होने की सोच से ही भयभीत हैं। ऐसे में वे खुद को संक्रमण से बचाने के लिए जरूरत से ज्यादा सावधानी बरत रहे हैं जो एक तरह से ठीक भी है, लेकिन सावधानी के बीच एंजाइटी का शिकार हो रहे हैं जिसे नियंत्रित करना जरूरी है। ऐसी स्थिति वाले मरीजों को काउंसिलिंग से ठीक करने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं जिनकी स्थिति ज्यादा गंभीर है, उन्हें काउंसिलिंग के साथ दवाएं भी दी जा रही हैं। 
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