पंजाब: प्रदेश के तीन लाल हुए शहीद, किसी की मां को नहीं खबर तो कोई 20 दिन पहले ही घर से गया
बटाला के गांव चट्ठा के 30 वर्षीय जवान मनदीप सिंह शहीद हो गए। मनदीप सिंह 11 सिख युनिट की 16 राष्ट्रीय राइफल्स में तैनात थे। अक्तूबर में जन्मे मनदीप की शहादत भी अक्तूबर में हुई।
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जम्मू-कश्मीर के पुंछ में सोमवार को आतंकियों द्वारा घात लगाकर किए गए हमले में पांच जवान शहीद हो गए, जिनमें तीन जवान पंजाब की धरती से हैं। इन जवानों के घरों पर मातम का माहौल है। किसी जवान की मां से यह बात छिपाई जा रही है तो किसी के छोटे-छोटे बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। शहीद होने वालों में पंजाब के कपूरथला जिला के माना तलवंडी निवासी सूबेदार जसविंदर सिंह, जिला गुरदासपुर के सिरहा में चल्हा निवासी मनदीप सिंह, रोपड़ जिला के पंचरंदा गांव निवासी सिपाही गज्जण सिंह हैं। पढ़ें इन जवानों की निजी जिंदगी के बारे में...
सैनिक मनदीप सिंह का जन्म और शहादत भी अक्तूबर में
कश्मीर की वादियों में आतंकियों से लोहा लेते हुए बटाला के गांव चट्ठा के 30 वर्षीय जवान मनदीप सिंह शहीद हो गए। मनदीप सिंह 11 सिख युनिट की 16 राष्ट्रीय राइफल्स में तैनात थे। अक्तूबर में जन्मे मनदीप की शहादत भी अक्तूबर में हुई। जैसे ही बटाला के गांव चट्ठा में मनदीप की शहादत की सूचना मिली, पूरे गांव में शोक की लहर फैल गई। क्षेत्र के लोग शहीद के घर सांत्वना देने पहुंचने लगे। कुछ ही समय में मनदीप सिंह के घर लोगों का तांता लग गया।
बता दें कि 20 दिन पहले ही मनदीप छुट्टी बिताकर अपनी ड्यूटी पर लौटे थे। मनदीप के दो बेटे हैं। शहीद मनदीप सिंह के दो भाई हैं। बड़ा भाई भी फौज में हैं। जबकि, छोटा भाई विदेश में रहता है। मनदीप सिंह का पार्थिव शरीर मंगलवार को उनके पैतृक गांव चट्ठा में पहुंचेगा, जहां सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। गुरविंदर सिंह निवासी गांव चट्ठा ने बताया कि मनदीप सिंह एक बहादुर सैनिक के साथ-साथ फुटबाल का अच्छा खिलाड़ी भी था। मनदीप सिंह सितंबर 2011 में फौज में भर्ती हुआ था। उन्होंने बताया कि मनदीप सिंह के अंदर देश प्रेम का जज्बा कूट-कूट कर भरा हुआ था।रोती बिलखती मनदीप सिंह की मां मनजीत कौर ने कहा कि उन्हें बेटे की मौत का गम तो है, पर इस बात का गर्व भी है कि बेटे ने अपने देश की रक्षा की खातिर अपने जीवन का बलिदान दे दिया।
‘लाल’ की शहादत को बीमार मां से छुपा रहा बड़ा भाई
श्रीनगर के पुंछ में आतंकवादियों से लोहा लेते हुए शहादत का जाम पीने वाले नायब सूबेदार जसविंदर सिंह की बीमार मां ‘लाल’ के देश पर न्यौछावर हो जाने से अनजान है। शहीद जसविंदर सिंह कस्बा भुलत्थ के गांव माना तलवंडी के उस खानदान से संबंध रखते हैं, जिनका परिवार मातृ भूमि की रक्षा के लिए आगे रहा है। परिवार दो माह पहले कैप्टन पिता हरभजन सिंह की कोरोना के चलते मौत के गम से उबरा नहीं था कि जसविंदर की शहादत की खबर आ गई। ऐसे में पूर्व फौजी बड़े भाई राजिंदर सिंह किसी को घर आने से पहले बाहर गली में ही रोक रहा कि कहीं मां को छोटे भाई जसविंदर सिंह की शहादत के बारे में पता न चल जाए।
कैप्टन पिता के दोनों बेटे थे फौजी
कैप्टन हरभजन सिंह के दोनों बेटे राजिंदर सिंह व जसविंदर सिंह फौज में हैं। बड़ा बेटा राजिंदर सिंह फौज से रिटायर है और छोटा बेटा जसविंदर सिंह आतंकवादियों से लोहा लेते हुए सोमवार को शहीद हो गया है। राजिंदर सिंह इस द्वंद से जूझ रहे हैं कि शहादत की खबर मां और जसविंदर सिंह की पत्नी सुखप्रीत कौर, 13 वर्षीय बेटे विक्रमजीत सिंह और 11 वर्षीय बेटी हरनूर को कैसे बताई जाए। राजिंदर सिंह ने सुखप्रीत कौर को तो बस यही बताया कि जसविंदर सिंह जख्मी है। पठानकोट में उसका इलाज चल रहा है। जबकि बिमार मां पूरे घटनाक्रम से अनजान है। शहीद जसविंदर सिंह के मामा रिटायर्ड सूबेदार गुरनरमिंदर सिंह ने बताया कि कपूरथला हेडक्वार्टर की रेजीमेंट को शहादत की जानकारी दे दी गई है। मंगलवार की शाम तक जसविंदर सिंह का पार्थिव शरीर गांव पहुंचने की उम्मीद है।
परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी की घोषणा
कपूरथला के कस्बा भुलत्थ के गांव माना तलवंडी के नायब सूबेदार जसविंदर सिंह की पुंछ में आतंकवादियों के हमले में शहादत पर सीएम पंजाब चरणजीत सिंह चन्नी ने परिवार को 50 लाख रुपये एक्सग्रेशिया ग्रांट और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की है। सीएम चन्नी ने कहा कि पंजाब सरकार शहीद परिवार के दुख में साथ खड़ी है।
शहीद हुआ गांव का फौजी तो शोक में डूबा नूरपुर बेदी
जम्मू-कश्मीर के सूरनकोट पुंछ इलाके में शहीद होने वाले पांच सैनिकों में नूरपुर बेदी ब्लाक के गांव पंचरंडा के गज्जण सिंह पुत्र चरण सिंह भी हैं। यह नौजवान 23 सिख रेजीमेंट में आज कल 16 आर आर रेजीमेंट में पुंछ में तैनात था जो सोमवार को आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान शहीद हो गया। उनका पार्थिव शरीर 12 अक्तूबर को उनके जद्दी गांव पंचरंडा (नूरपुर बेदी) में पहुंच रहा है।