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पॉलिटेक्निक के स्टृडेंट ने नेवी का ऑनलाइन फार्म भरा, पेपर देने कोलकाता पहुंचा तो फर्जीवाड़े का पता चला

Thu, 24 Oct 2019 02:09 AM IST
Panchkula bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Thu, 24 Oct 2019 02:09 AM IST
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Polytechnic student filled navy's online form, reached to Kolkata to deliver paper, fraud was detected
चंडीगढ़। हल्लोमाजरा निवासी पॉलिटेक्निक के स्टूडेंट से नेवी (इंडियन कोस्ट गार्ड) की परीक्षा देने के नाम पर 35 हजार रुपये ठगने का मामला सामने आया है। मामले का खुलासा उस वक्त हुआ, जब छात्र परीक्षा देने कोलकाता पहुंचा। इस दौरान पता चला कि इससे संबंधित वहां कोई परीक्षा ही नहीं है। इसके बाद मामले की सूचना साइबर सेल को दी गई। पुलिस ने मामले की छानबीन शुरू कर दी है। फिलहाल आरोपी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है।
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छात्र कुंदन शर्मा के पिता शिकायतकर्ता चंदन कुमार ने बताया कि उनका बेटा पॉलिटेक्निक का छात्र है। मई महीने में बेटे कुंदन ने नेवी (इंडियन कोस्ट गार्ड) का ऑनलाइन का फार्म भरा हुआ था। 14 अक्टूबर को कुंदन के मोबाइल पर एक फोन आया। फोन पर व्यक्ति ने खुद को असिस्टेंट कमांडेंट नीतिश कुमार बताया। उसने फोन पर कहा कि आपने इंडियन कोस्ट गार्ड ऑनलाइन फार्म भरा हुआ है। इसमें मेरिट 63 प्रतिशत का बनता है, लेकिन आपका 62.8 प्रतिशत है। ऐसे में अगर 63 प्रतिशत मेरिट नहीं है तो उन्हें एडमिट कार्ड नहीं दिया जाता है। अगर परीक्षा देनी है तो 35 हजार रुपये देने होंगे। शिकायतकर्ता चंदन कुमार ने बताया कि इसके बाद नीतिश कुमार को उन्होंने बैंक खाते से पहले 5 हजार, 6, 4, 10 और फिर 10 हजार रुपये उसके खाते में डलवा दिए। इसके कुछ दिन बाद उन्हें दोबारा फोन आया तो उसने एडमिट कार्ड का लिंक भेज दिया। 20 अक्तूबर को कोलकाता में कुंदन परीक्षा देने चला गया।
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एक दिन तक किया इंतजार
कुंदन के वहां पर पूछने पर पता चला कि 20 अक्तूबर (रविवार) को यहां कोई परीक्षा नहीं है। इसके बाद वहां पर कुंदन एक दिन इंतजार किया और अगले दिन उसे यह पता लगा कि यह एडमिट कार्ड फर्जी है। इससे संबंधित यहां कोई परीक्षा नहीं है। इसके बाद खुद को असिस्टेंट कमांडेंट बताने वाले नीतिश कुमार से बातचीत करने की कोशिश की गई, लेकिन उसका फोन स्विच ऑफ था।
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नहीं कम हो रहा है साइबर क्राइम
शहर में साइबर क्राइम लगातार बढ़ता जा रहा है। साइबर सेल में रोजाना करीब 30 से 40 शिकायतें पहुंच रही हैं, लेकिन पुलिस ज्यादातर केसों को सुलझाने में नाकाम रही है। शातिर वारदात को अंजाम देकर आसानी से छिप जाते हैं।
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