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चंडीगढ़ : डंपिंग ग्राउंड में लगी भीषण आग ने प्रदूषण की मात्रा तीन गुना बढ़ाई

Sun, 04 Apr 2021 10:23 AM IST
ajay kumar आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sun, 04 Apr 2021 10:23 AM IST
सार

  • बुधवार की रात पीएम 2.5 की मात्रा 155 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर रिकॉर्ड
  • ये काफी सूक्ष्म कण होते हैं, जो सांस लेने के दौरान शरीर के अंदर चले जाते हैं

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Pollution increased three times due to dumping ground massive fire in Chandigarh
डंपिंग ग्राउंड में लगी आग। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चंडीगढ़ में डंपिंग ग्राउंड में लगी भीषण आग से आसपास के इलाके में प्रदूषण का स्तर तीन गुना बढ़ गया था। पीजीआई व पंजाब यूनिवर्सिटी की ओर से सेक्टर-25 में लगाए गए सेंसर के मुताबिक 31 मार्च की रात को पीएम 2.5 (पार्टिकुलेट मैटर) करीब 155 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर दर्ज किया गया। आमतौर पर इलाके में पीएम 2.5 करीब 50 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर रहता है।

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इससे जाहिर है कि 31 मार्च बुधवार को डड्डूमाजरा स्थित डंपिंग ग्राउंड में दोपहर के वक्त लगी आग से प्रदूषण में जबरदस्त इजाफा हुआ है। यह आग 48 घंटे तक धधक रही थी। पीएम 2.5 प्रदूषण की एक किस्म होती है। इसके कण काफी सूक्ष्म होते हैं, जो हवा के साथ उड़ाते हैं। यह इतना बारीक होता है कि सांस लेने के दौरान यह हमारे शरीर में प्रवेश कर खून में घुल जाते हैं। इसके आकार का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि शरीर के बाल पीएम 50 के बराबर होते हैं। 
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शरीर में प्रवेश करने के साथ यह कई तरह की बीमारी जैसे अस्थमा और सांस की दिक्कत बढ़ा सकता है। जो लोग पहले से ही इस रोग से ग्रसित होते हैं, उनकी परेशानी काफी बढ़ जाती है। खासकर बच्चों, गर्भवती महिलाएं और बुजुर्गों के लिए यह काफी खतरनाक होता है। 24 घंटे में हवा में पीएम 2.5 की मात्रा 60 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। इससे ज्यादा होने पर स्थिति गंभीर मानी जाती है।

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ये गैसें भी शरीर में गई हैं, विशेषज्ञ कर रहे हैं आकलन

विशेषज्ञ का कहना है कि सेंसर ने तो सिर्फ पीएम 2.5 का आकलन किया। डंपिंग ग्राउंड में वोलेटाइल आर्गेनिक कंपाउंड (वीओसी) भी निकले हैं। वीओसी हवा में घुलने के साथ वायु में ही रासायनिक तत्वों के साथ क्रिया कर जहरीली गैसों की उत्पत्ति करते हैं। यह गैस न सिर्फ स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती है बल्कि पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचाती है। वीओसी से मुख्यता बेंजीन, टायलीन, जायलीन जैसी जहरीली गैसें उत्पन्न होती हैं। इन गैसों के स्तर का पता भी सेंसर एनालाइजर से लगाया जाता है। विशेषज्ञ इसका आकलन कर रहे हैं, जल्द ही इसके भी आंकड़े जारी किए जाएंगे।

मौसम का मिला साथ, वरना कई गुना बढ़ता प्रदूषण
गनीमत रही कि बीते बुधवार को हवा का बहाव तेज था। पश्चिमी विक्षोभ के निष्क्रिय होने से उस समय उत्तर-पश्चिम हवाएं काफी तेजी से चल रही थीं, जिससे प्रदूषण के कण बहते चले गए। यदि हवा की गति मंद होती तो प्रदूषण का स्तर कई गुना बढ़ जाता। जिस तरह हवाएं चल रही थीं, सिर्फ उसी दिशा में प्रदूषण रहा। आग इतनी भयानक थी कि दोपहर में ही शहर के एक हिस्से में अंधेरा छा गया था। सड़कों का ट्रैफिक डायवर्ट करना पड़ा था।

हमने पाया है कि डंपिंग ग्राउंड में आग लगने के बाद प्रदूषण के स्तर में तीन गुना बढ़ोतरी हुई है, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद खराब है। ये काफी महीन कण होते हैं, जो सांस लेने के साथ शरीर के अंदर प्रवेश कर जाते हैं। - रविंद्रा खैवाल, एडिशनल प्रोफेसर स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ पीजीआई।

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