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दिवाली से पहले हिसार में खतरे के निशान पर प्रदूषण, चंडीगढ़ की हवा भी सेफ नहीं

Sat, 26 Oct 2019 12:48 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़/हिसार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़/हिसार Published by: ajay kumar Updated Sat, 26 Oct 2019 12:48 AM IST
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Pollution at danger mark in hisar and Chandigarh before deepawali
हिसार में छाई जहरीली हवा - फोटो : अमर उजाला

दीपावली से पहले चंडीगढ़ हवा फिर से दूषित हो गई है। कई जगहों का एयर क्वालिटी इंडेक्स मध्यम दर्ज किया गया, जो एक तरह से खराब हवा का संकेत भी है। पर्यावरण डिपार्टमेंट के मुताबिक 24 अक्तूबर को सेक्टर 39 का एयरक्वालिटी इंडेक्स 187, 25 अक्तूबर को सेक्टर 25 में 195 दर्ज किया गया, जो इस सीजन का सबसे ज्यादा है। 

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उधर, हरियाणा के हिसार का वायु गुणवत्ता सूचकांक 333 के स्तर को पार कर गया है। पराली जलाने, वाहनों के धुएं, फैक्ट्रियों के धुएं, निर्माण कार्य व तापमान का गिरना इसी वजह माना जा रहा है। चूंकि दिवाली पर काफी आतिशबाजी की जाएगी।
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ऐसे में वायु गुणवत्ता सूचकांक में अभी और बढ़ोतरी होगी। उधर, मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक फिलहाल बारिश की कोई संभावना नहीं है। इस स्थिति में दूषित हवा से राहत मिलने की संभावना भी कम ही है।
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नासा के मिले इमेज के मुताबिक शुक्रवार को सबसे ज्यादा पराली जलाई गई है। सैटेलाइट इमेज में करीब दो हजार आग की लपटें कैद की गई हैं। ये आग की लपटें हरियाणा, पंजाब व पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दर्ज हुई हैं। इससे चंडीगढ़ की हवा भी दूषित हुई है और आगे भी खराब होने की संभावना है।

पराली जलाने से शुक्रवार को कई जगह पीएम 2.5 की मात्रा 300 से ऊपर दर्ज की गई है, जबकि इसकी तय लिमिट 60 माइक्रोग्राम क्यूबिक मीटर होती है। इस हिसाब से अंदाजा लगाया जा सकता है कि शुक्रवार को हवा कितनी दूषित रही होगी। पीएम 2.5 के कण काफी छोटे होते हैं, जो अन्य कणों के मुकाबले ज्यादा खतरनाक हैं। 

ऐसे में खासकर दमा रोगियों को इन दिनों बाहर निकलने से परहेज करना होगा। यह हालात तब है, जब दीपावली को सिर्फ दो दिन बचे हैं। दीपावली पर आतिशबाजी के बाद एयरक्वालिटी इंडेक्स के खराब होने की पूरी संभावना है। दीपावली पर हर साल प्रदूषण बढ़ता है। करीब एक से डेढ़ हफ्ते हवा खराब रहती है।

                 चंडीगढ़ में कितना रहा प्रदूषण

प्रदूषण अधिकतम न्यूनतम औसत
पीएम 2.5 306   101  200
पीएम  10 199 92 138
एनओ2 17 06 06
सीओ 94  31 54

इस समय लोगों को कार पूल का इस्तेमाल करना होगा। कारों की आवाजाही बढ़ने से भी प्रदूषण के कणों में इजाफा हुआ है। दूसरी तरफ, पराली भी खूब जलाई जा रही है। लोगों को आतिशबाजी भी कम करनी होगी ताकि वायु प्रदूषण ज्यादा न फैले। -रविंद्रा खैवाल, एडिशनल प्रोफेसर, एनवायरनमेंट स्टडी, पीजीआई

यह है वजह
जीजेयू के पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. नरसी बिश्नोई के मुताबिक इन दिनों किसान पराली जला रहे हैं, जिससे काफी मात्रा में हानिकारक गैसें पैदा होती हैं। इसके अलावा वाहनों, फैक्ट्रियों व कूड़ा जलाने से भी हानिकारक गैसों का उत्सर्जन होता है। इन दिनों में वातावरण में नमी मौजूद है और तापमान भी कम है। इस वजह से यह गैसें व धूल के कण वातावरण में ऊपर नहीं जा पाते और नीचे ही रह जाते हैं, जिससे वातावरण में धुएं की चादर बन जाती है और हवा दूषित हो जाती है।

वायु गुणवत्ता सूचकांक
0-50-  अच्छा
51-100-संतोषजनक
101-200-सामान्य
201-300-खराब
 301-400-बहुत खराब
401-500-खतरनाक

सांस के रोगों का बड़ा कारण है वायु प्रदूषण

नागरिक अस्पताल के चिकित्सक डॉ. सुरेंद्र बिश्नोई के मुताबिक क्रॉनिक रेस्पायरेटरी डिसीज के लिए वायु प्रदूषण बड़ी वजह है। एलर्जी के कारण जुकाम, खांसी, अस्थमा, फेंफड़ों का कैंसर जैसी बीमारियों के लिए पीएम-10 जिम्मेदार होते हैं।

सिरदर्द और थकावट महसूस होना, कार्य क्षमता में कमी महसूस होना, बालों का झड़ना प्रदूषित वायु वाले वातावरण का ही असर होता है। डॉ. बिश्नोई के अनुसार इस तरह के वातावरण में अस्थमा के मरीजों को कम से कम बाहर निकलना चाहिए और बाहर निकलने के दौरान मास्क का इस्तेमाल करना चाहिए।

ऐसे मिल सकती है राहत
इस दूषित हवा से इन दो स्थितियों में राहत मिल सकती है। एक-दो हवा की गति काफी कम है, जिस कारण से धुएं व धूल के कण एक जगह ठहरे हुए हैं। तेज हवा धूल व धुएं के इन कणों को अपने साथ बहाकर ले जाएगी। दूसरी स्थिति है बारिश। बारिश आने पर धूल व धुएं के यह कण जमीन पर आ जाएंगे और हवा फिर से साफ हो जाएगी।

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