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मिलिट्री लिटफेस्टः सेना से दूर रहे राजनीति, अनेकता में ‘एकता’ ही हमारी सबसे बड़ी ताकत

Mon, 21 Dec 2020 04:52 AM IST
दुष्यंत शर्मा मोहित धुपड़, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, चंडीगढ़ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 21 Dec 2020 04:52 AM IST
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Politics should stay away from army, 'unity' is the biggest force in diversity
मिलिट्री लिटरेचर फेस्ट... - फोटो : amar ujala

विभिन्न धर्मों और जातियों के जवानों वाली भारतीय सेना आज दुनिया भर में अपनी अनेकता में एकता की मिसाल मानी जाती है। मगर रक्षा विशेषज्ञों को इस बात की चिंता सता रही है कि अगर सेना में राजनीतिक दखल बढ़ता गया तो इस एकता को खतरा हो सकता है। इसलिए वे चाहते हैं कि राजनीतिज्ञों का सोशल इंजीनियरिंग फार्मूला सेना से दूर ही रहे। मिलिट्री लिटरेचर फेस्ट के दौरान रक्षा विशेषज्ञों ने इस मुद्दे पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि सेना की एकता हमारे लिए फख्र का विषय है और यह हमेशा बना रहना चाहिए। इसलिए जरूरी है कि राजनीति सेना से दूर ही रहे।

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सेना के पूर्व प्रमुख जनरल वीपी मलिक का कहना है कि हमारे सशस्त्र बल विविधता और एकता की मूल अवधारणा के सच्चे प्रतिबिंब हैं। भारतीय सैनिक विभिन्न वर्गों, धर्मों से संबंध रखते हैं और बैरेकों में एक साथ रहते हैं। एक ही रसोई में पका खाना खाते हैं। धर्मनिरपेक्षता, अनुशासन, अखंडता, निष्ठा उनकी ताकत है। कुशल और समर्पित सैनिक अपनी सेवाओं से मुक्त होने के बाद भी आदर्श बने रहते हैं। जिससे राष्ट्रीय अखंडता को बनाए रखने के लिए भारतीय सेना को एक आदर्श के रूप में अपनी स्थिति पर हमेशा गर्व करने का अवसर मिलता है।
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जनरल मलिक का कहना है कि भारतीय सेना में यह एकता बनी रहे, इसकी हमें चिंता भी है। देश की जनता हमारी सेनाओं को सकारात्मक और निष्पक्ष मानती है। लिहाजा हमारे सामने मुख्य प्रश्न यह है कि हम कैसे अपने देशवासियों में अंतरराज्यीय राष्ट्रवाद पैदा करें, क्योंकि वोट बैंक की राजनीति हमारे लोगों को बांटती है। जनरल मलिक के अनुसार राजनीतिक रणनीतिकार आज क्षेत्रीय और राष्ट्रीय विकास के बजाय सामाजिक इंजीनियरिंग के बारे में बात करते रहते हैं, जो उचित नहीं है। इसलिए स्कूल व कॉलेज स्तर पर ही छात्रों में धर्मनिरपेक्षता की शिक्षा प्रभावशाली तरीके से देनी पड़ेगी।
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जाति बताई, तो सीनियर ने गंदे पानी में डुबकी लगवाई
सेना में एकता की मिसाल संबंधी आपबीती का एक वाकया सुनाते हुए कर्नल सौरभ सिंह शेखावत ने बताया कि अफसरों व जवानों का धर्म और कर्म सिर्फ अपना देश होता है। कर्नल शेखावत ने बताया कि जब मैंने पहला कदम सेना में रखा था, तब मेरे सीनियर ने मुझसे मेरी जाति के बारे में पूछा और मैंने तुरंत जवाब दिया राजपूत। उन्होंने मुझे गंदे पानी में डुबकी लगाने का आदेश दिया। उसके बाद, उन्होंने फिर से मुझसे मेरी जाति के बारे में पूछा तब मैंने जवाब दिया कि मैं भारतीय सेना का जवान हूं और यही हमारी सेना की ताकत है। तब मेरे सीनियर संतुष्ट हुए। रक्षा विशेषज्ञ लेफ्टिनेंट जनरल एनएस बराड़ ने बताया कि अपनी एकता के बूते ही भारतीय सेना की मिसाल पूरी दुनिया में दी जाती है। हमारी सेनाएं विविधता से भरे भारत देश में एक छत के नीचे अखंडता और शांति के साथ रहती हैं। सेना में विभिन्न क्षेत्रों, संस्कृति और धर्मों से ताल्लुक  रखने वाले हमारे सैनिक हैं, जो एक साथ रहते हैं और सभी धर्मों और मूल्यों का सम्मान करते हैं।


छत्रपति शिवा जी महाराज और लक्ष्मीबाई जी की सेना का इतिहास समृद्ध है
पंजाब के वित्त मंत्री मनप्रीत बादल ने कहा कि महाराजा रणजीत सिंह के समय, ज्यादातर सैनिक मुस्लिम थे और सेनापति इतालवी और फ्रांसीसी थे। कर्नल पांडे ने कहा कि छत्रपति शिवा जी महाराज और लक्ष्मीबाई जी की सेना का इतिहास समृद्ध है जो हमारे लिए जातिवाद से परे और प्रेरणादायक है।

 

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