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कांग्रेस में बदलाव की नहीं, बदले की राजनीति : छाबड़ा
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चंडीगढ़। पंजाब कांग्रेस का रोग अब चंडीगढ़ कांग्रेस को लग गया है। चंडीगढ़ प्रदेश कार्यकारिणी के पदाधिकारियों की नियुक्ति के बाद पूर्व प्रधान प्रदीप छाबड़ा ने अपनी पार्टी के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया है। दो दिन से वे पार्टी के खिलाफ सोशल मीडिया पर बयानबाजी कर रहे हैं। छाबड़ा का कहना है कि नई कार्यकारिणी में उनके साथियों की उपेक्षा की गई है। जिन लोगों ने पार्टी को खड़ा किया, उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है, जबकि पार्टी के प्रदेश प्रधान सुभाष चावला का कहना है कि ऐसा बिल्कुल नहीं है।
प्रदेश अध्यक्ष सुभाष चावला का कहना है कि यदि किसी को नई कार्यकारिणी से दिक्कत है तो दिल्ली जाकर अपनी आपत्ति दर्ज करवा सकता है। सोशल मीडिया पर पार्टी के खिलाफ बयानबाजी करना अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है। पार्टी ने उनके रवैये के बारे में हाईकमान को अवगत करा दिया है। अब हाईकमान ही उनके खिलाफ कार्रवाई करेगा।
प्रदीप छाबड़ा ने क्या लिखा था सोशल मीडिया में
-रविवार को उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा कि चंडीगढ़ कांग्रेस की कल जारी हुई पदाधिकारियों की लिस्ट बनाने में एक अहंकारी नेता व धन स्रोत, चमचागिरी करने वाले और चुगलखोरों की जमकर चली। इस ट्विट को उन्होंने राहुल गांधी से लेकर हरीश रावत को टैग किया।
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-रविवार को ही उन्होंने दूसरा ट्विट किया कि राहुल गांधी जी चाहते हैं बदलाव की राजनीति। कल चंडीगढ़ कांग्रेस के पदाधिकारियों की जारी की गई लिस्ट में बदलाव की नहीं बल्कि बदले की भावना नजर आई। यहां के लोकल नेता चंडीगढ़ कांग्रेस को बर्बाद कर देंगे।
-सोमवार को उन्होंने अपनी और प्रधान चावला के साथ हुई व्हाट्सएप चैट को टैग करते हुए ट्विटर पर लिखा कि पार्टी अध्यक्ष चावला जी का पूर्व अध्यक्ष की लेटर का जवाब, सोचिए मैं कहता हूं कि चंडीगढ़ में पार्टी लीडर सबको नौकर समझते हैं। सच सुनना बर्दाश्त नहीं करते।
क्या दर्द है छाबड़ा को
लगातार छह सालों से चंडीगढ़ कांग्रेस के प्रधान रहे प्रदीप छाबड़ा पिछले कुछ दिनों से नाराज चल रहे हैं। बताया जाता है कि जिस तरह से उन्हें प्रधान पद से हटाया गया है, उससे वे काफी आहत हुए हैं। पार्टी ने बिना सूचना दिए उन्हें पद से हटा दिया और नए प्रधान की नियुक्ति कर दी। हालांकि पार्टी के पदाधिकारियों का कहना है कि पहले भी इस तरह से नियुक्तियां होती रही हैं। इससे पहले कांग्रेस के पूर्व प्रधान बीबी बहल को भी बिना सूचना दिए उन्हें प्रधान पद से हटाकर नए प्रधान की नियुक्ति कर दी गई थी। इस प्रकरण के बाद जब पदाधिकारियों की नामों की सूची जारी हुई तो उनके साथ जुड़े लोगों की उपेक्षा कर दी गई। छाबड़ा गुट से जुड़े कांग्रेसी ने बताया कि नई कार्यकारिणी में मोहम्मद सदिक, भजन कौर, कमलेश, ओम प्रकाश सैनी, संदीप भारद्वाज, अश्विनी कौशल, राकेश गर्ग, किशन बंसल, गुरदीप सिह अटवाल, मुस्तकीम खान जैसे नेताओं को शामिल नहीं किया गया है। जबकि पार्टी का कहना है कि नए पदाधिकारियों में कई ऐसे नाम भी शामिल हैं, जो छाबड़ा के करीबी हुआ करते थे।
बंसल पर आरोप लगाकर पूर्व महासचिव ने दिया इस्तीफा
उधर, कांग्रेस के पूर्व प्रदेश महासचिव संदीप भारद्वाज ने पार्र्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी को भेजे अपने इस्तीफे में आरोप लगाया कि पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन कुमार बंसल के तानाशही रवैये से वह काफी परेशान हैं। सिर्फ उन्हीं की वजह से पार्टी से इस्तीफा दे रहे हैं। कांग्रेस पदाधिकारियों की नई सूची में संदीप भारद्वाज का भी नाम नहीं शामिल था।
क्या कहते हैं छाबड़ा
पार्टी के नए पदाधिकारियों का स्वागत है। सूची में 133 लोगों को शामिल किया गया है। यदि 10 और लोगों को शामिल कर लेते तो क्या दिक्कत आती। इससे पता चलता है कि कुछ साथियों की उपेक्षा की गई है। ये वे साथी हैं, जिन्होंने 30 से 35 साल पार्टी को दिया है। ये सभी अपने इलाके में सक्षम हैं। इस समय कांग्रेस में बदलाव की नहीं बल्कि बदले की राजनीति हो रही है।
प्रदीप छाबड़ा, पूर्व अध्यक्ष, चंडीगढ़ प्रदेश कांग्रेस
क्या कहते हैं चावला
कार्यकारिणी में किसी की उपेक्षा नहीं की गई है। पार्टी को मजबूत बनाने के लिए जमीनी और मेहनती कार्यकर्ताओं को जगह दी गई है। पार्टी के पदाधिकारियों की नियुक्ति का फैसला हाईकमान करता है। यदि किसी आपत्ति है तो वह हाईकमान में जाकर अपनी बात रख सकता है।
-सुभाष चावला, प्रधान चंडीगढ़ प्रदेश कांग्रेस
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प्रदेश अध्यक्ष सुभाष चावला का कहना है कि यदि किसी को नई कार्यकारिणी से दिक्कत है तो दिल्ली जाकर अपनी आपत्ति दर्ज करवा सकता है। सोशल मीडिया पर पार्टी के खिलाफ बयानबाजी करना अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है। पार्टी ने उनके रवैये के बारे में हाईकमान को अवगत करा दिया है। अब हाईकमान ही उनके खिलाफ कार्रवाई करेगा।
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प्रदीप छाबड़ा ने क्या लिखा था सोशल मीडिया में
-रविवार को उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा कि चंडीगढ़ कांग्रेस की कल जारी हुई पदाधिकारियों की लिस्ट बनाने में एक अहंकारी नेता व धन स्रोत, चमचागिरी करने वाले और चुगलखोरों की जमकर चली। इस ट्विट को उन्होंने राहुल गांधी से लेकर हरीश रावत को टैग किया।
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-रविवार को ही उन्होंने दूसरा ट्विट किया कि राहुल गांधी जी चाहते हैं बदलाव की राजनीति। कल चंडीगढ़ कांग्रेस के पदाधिकारियों की जारी की गई लिस्ट में बदलाव की नहीं बल्कि बदले की भावना नजर आई। यहां के लोकल नेता चंडीगढ़ कांग्रेस को बर्बाद कर देंगे।
-सोमवार को उन्होंने अपनी और प्रधान चावला के साथ हुई व्हाट्सएप चैट को टैग करते हुए ट्विटर पर लिखा कि पार्टी अध्यक्ष चावला जी का पूर्व अध्यक्ष की लेटर का जवाब, सोचिए मैं कहता हूं कि चंडीगढ़ में पार्टी लीडर सबको नौकर समझते हैं। सच सुनना बर्दाश्त नहीं करते।
क्या दर्द है छाबड़ा को
लगातार छह सालों से चंडीगढ़ कांग्रेस के प्रधान रहे प्रदीप छाबड़ा पिछले कुछ दिनों से नाराज चल रहे हैं। बताया जाता है कि जिस तरह से उन्हें प्रधान पद से हटाया गया है, उससे वे काफी आहत हुए हैं। पार्टी ने बिना सूचना दिए उन्हें पद से हटा दिया और नए प्रधान की नियुक्ति कर दी। हालांकि पार्टी के पदाधिकारियों का कहना है कि पहले भी इस तरह से नियुक्तियां होती रही हैं। इससे पहले कांग्रेस के पूर्व प्रधान बीबी बहल को भी बिना सूचना दिए उन्हें प्रधान पद से हटाकर नए प्रधान की नियुक्ति कर दी गई थी। इस प्रकरण के बाद जब पदाधिकारियों की नामों की सूची जारी हुई तो उनके साथ जुड़े लोगों की उपेक्षा कर दी गई। छाबड़ा गुट से जुड़े कांग्रेसी ने बताया कि नई कार्यकारिणी में मोहम्मद सदिक, भजन कौर, कमलेश, ओम प्रकाश सैनी, संदीप भारद्वाज, अश्विनी कौशल, राकेश गर्ग, किशन बंसल, गुरदीप सिह अटवाल, मुस्तकीम खान जैसे नेताओं को शामिल नहीं किया गया है। जबकि पार्टी का कहना है कि नए पदाधिकारियों में कई ऐसे नाम भी शामिल हैं, जो छाबड़ा के करीबी हुआ करते थे।
बंसल पर आरोप लगाकर पूर्व महासचिव ने दिया इस्तीफा
उधर, कांग्रेस के पूर्व प्रदेश महासचिव संदीप भारद्वाज ने पार्र्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी को भेजे अपने इस्तीफे में आरोप लगाया कि पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन कुमार बंसल के तानाशही रवैये से वह काफी परेशान हैं। सिर्फ उन्हीं की वजह से पार्टी से इस्तीफा दे रहे हैं। कांग्रेस पदाधिकारियों की नई सूची में संदीप भारद्वाज का भी नाम नहीं शामिल था।
क्या कहते हैं छाबड़ा
पार्टी के नए पदाधिकारियों का स्वागत है। सूची में 133 लोगों को शामिल किया गया है। यदि 10 और लोगों को शामिल कर लेते तो क्या दिक्कत आती। इससे पता चलता है कि कुछ साथियों की उपेक्षा की गई है। ये वे साथी हैं, जिन्होंने 30 से 35 साल पार्टी को दिया है। ये सभी अपने इलाके में सक्षम हैं। इस समय कांग्रेस में बदलाव की नहीं बल्कि बदले की राजनीति हो रही है।
प्रदीप छाबड़ा, पूर्व अध्यक्ष, चंडीगढ़ प्रदेश कांग्रेस
क्या कहते हैं चावला
कार्यकारिणी में किसी की उपेक्षा नहीं की गई है। पार्टी को मजबूत बनाने के लिए जमीनी और मेहनती कार्यकर्ताओं को जगह दी गई है। पार्टी के पदाधिकारियों की नियुक्ति का फैसला हाईकमान करता है। यदि किसी आपत्ति है तो वह हाईकमान में जाकर अपनी बात रख सकता है।
-सुभाष चावला, प्रधान चंडीगढ़ प्रदेश कांग्रेस