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चंडीगढ़ पर सियासत गरम: पंजाब भाजपा भी विरोध में, अकाली दल ने गवर्नर और कांग्रेस ने पीएम से की अपील
Mon, 21 Nov 2022 10:14 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Mon, 21 Nov 2022 10:14 PM IST
सार
आम आदमी पार्टी ने चंडीगढ़ मामले पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि चंडीगढ़ पर केवल पंजाब का अधिकार है, इसलिए हरियाणा को किसी भी कीमत पर चंडीगढ़ में अपनी अलग विधानसभा बनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
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भगवंत मान और मनोहर लाल।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हरियाणा विधानसभा के लिए चंडीगढ़ में अलग जमीन तलाशने का मुद्दा गरमा गया है। खास बात यह है कि पंजाब के सियासी दल इस मसले पर एक हो गए हैं। रोचक तो यह है कि पंजाब भाजपा भी हरियाणा में भाजपा नीत सरकार के खिलाफ हो गई है। मामले में पंजाब की मान सरकार समेत सभी विपक्षी दल चंडीगढ़ पर पंजाब का हक जता रहे हैं। पंजाब की मान सरकार के बाद अब भाजपा की पंजाब इकाई और हरियाणा की भाजपा सरकार आमने-सामने आ खड़ी हुई हैं।
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चंडीगढ़ पर पंजाब का हक : अश्वनी शर्मा
पंजाब भाजपा के प्रधान अश्वनी शर्मा ने कहा है कि चंडीगढ़ पर पंजाब का हक है। उन्होंने कहा कि यदि हरियाणा को विधानसभा के लिए अलग जमीन की जरूरत है तो उसे चंडीगढ़ के अलावा किसी अन्य जगह जमीन तलाशनी चाहिए, न कि चंडीगढ़ में।
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नई विधानसभा के लिए एक इंच भी जमीन नहीं देंगे : कंग
आम आदमी पार्टी ने चंडीगढ़ मामले पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि चंडीगढ़ पर केवल पंजाब का अधिकार है, इसलिए हरियाणा को किसी भी कीमत पर चंडीगढ़ में अपनी अलग विधानसभा बनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने ट्वीट जारी करते हुए कहा कि चंडीगढ़ पंजाब का अभिन्न हिस्सा है और हमेशा रहेगा। हरियाणा को नई विधानसभा के लिए एक इंच भी जमीन नहीं दी जाएगी। हरियाणा को पंचकूला, करनाल या किसी अन्य जगह पर अपनी विधानसभा बनानी चाहिए। चंडीगढ़ पर केवल पंजाब का अधिकार है।
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कांग्रेस भी उतरी विरोध में
पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने भी बीते दिनों वीडियो जारी कर केंद्र सरकार पर पंजाब को तंग करने के मकसद से जानबूझ कर चाल चलने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस मामले में अंत तक लड़ाई लड़ेगी। राजा वड़िंग ने कहा कि अलग विधानसभा की मांग हरियाणा सरकार ने नहीं की, बल्कि केंद्र सरकार द्वारा जानबूझ कर करवाई गई है।
शिअद ने बुलाई बैठक
शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के वरिष्ठ नेता बिक्रम मजीठिया ने पंजाब गवर्नर से अपील करते हुए कहा कि वह हरियाणा सरकार की विधानसभा के स्पीकर द्वारा चंडीगढ़ में अलग विधानसभा बनाने की अपील को खारिज कर दें, क्योंकि यह हरियाणा का संवैधानिक अधिकार नहीं है। वहीं, शिअद के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने चंडीगढ़ में हरियाणा विधानसभा के लिए अलग जमीन देने के मामले में 24 नवंबर को चंडीगढ़ स्थित पार्टी के मुख्य कार्यालय में वरिष्ठ नेताओं की बैठक बुलाई है। इस संबंध में प्रवक्ता डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने ट्वीट कर जानकारी दी है।
प्रताप बाजवा ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर गिनाईं कानूनी वजह
चंडीगढ़ में हरियाणा विधानसभा के लिए जमीन की अदला-बदली के प्रस्ताव पर पंजाब में सियासत गरम है। इस मामले को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि वह हरियाणा के प्रस्ताव को स्वीकार न करें। बाजवा ने अपने पत्र में लिखा कि यह फैसला आग से खेलने जैसा साबित होगा और दो दशकों में हजारों बेगुनाहों की जान कुर्बान करने के बाद हासिल हुई शांति को खतरे में डालने वाला होगा।
बाजवा ने प्रधानमंत्री को बताया कि हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल चंडीगढ़ में जमीन की अदला-बदली के आधार पर प्रदेश की अलग विधानसभा बनाने के लिए 10 एकड़ जमीन की मांग उठा रहे हैं। लेकिन इस मामले के रिकॉर्ड से पता चलता है कि पंजाब का चंडीगढ़ पर अपनी राजधानी के रूप में दावा 1970 से मान्य है। हरियाणा के अस्तित्व में आने के करीब तीन साल बाद 29 जनवरी, 1970 को, केंद्र ने एक औपचारिक संदेश जारी करते हुए घोषणा की थी कि समय आने पर हरियाणा की अपनी राजधानी होगी और चंडीगढ़ पंजाब की राजधानी बना रहेगा। उस समय, चंडीगढ़ के विभाजन सहित मामले के निपटारे के लिए विभिन्न विकल्पों पर विचार किया गया था। 1952 से 1966 तक (हरियाणा के पंजाब से अलग होने तक), चंडीगढ़ पंजाब की राजधानी ही था। चंडीगढ़ को केंद्र शासित प्रदेश घोषित किए जाने के बाद भी चंडीगढ़ पंजाब की राजधानी बना हुआ है। केंद्र की ओर से यह निर्णय लिया गया था कि हरियाणा अपनी राजधानी में शिफ्ट होते समय पांच वर्षों तक चंडीगढ़ में अपने कार्यालयों और आवासीय क्षेत्र का उपयोग करना जारी रखेगा। इसके अलावा हरियाणा को नई राजधानी स्थापित करने के लिए कर्ज की पेशकश की गई थी।
इसी पत्र में बाजवा ने मुख्यमंत्री भगवंत मान का जिक्र करते हुए लिखा कि आश्चर्य की बात यह है कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पंजाब विधानसभा भवन के निर्माण और पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के विभाजन के लिए अलग से जमीन की मांग कर एक बड़ी भूल की है, जिसकी राज्य के सभी राजनीतिक दलों के साथ-साथ बुद्धिजीवियों ने तीखी आलोचना की है।