बंधुआ मजदूरी के आरोप : भाकियू ने कहा- गृह मंत्रालय ने रची है किसानों को बदनाम करने की साजिश, सामने लाएंगे सच
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केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पंजाब सरकार को पत्र भेजकर सीमांत जिलों के किसानों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। अब इस पर पंजाब के किसान संगठनों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। इनके साथ ही शिरोमणि अकाली दल ने भी गृह मंत्रालय के उस पत्र को पंजाब के किसानों को बदनाम करने की साजिश करार दिया है, जिसमें कहा गया था कि पंजाब के सीमांत जिलों के किसान उत्तर प्रदेश और बिहार से आने वाले गरीब मजदूरों को नशा देकर और बंधक बनाकर खेतों में काम कराते हैं।
बता दें है कि ‘अमर उजाला’ ने शुक्रवार को गृह मंत्रालय द्वारा पंजाब की मुख्य सचिव और डीजीपी को भेजे पत्र को प्रकाशित करते हुए इस मामले को विस्तार से उठाया था। शुक्रवार को भारतीय किसान यूनियन एकता (डकोंदा) के महासचिव जगमोहन सिंह पटियाला ने कहा कि केंद्र सरकार ने किसान आंदोलन को बदनाम करने के लिए यह एक नया पैंतरा चला है ताकि पंजाब के किसानों को बदनाम किया जा सके।
बहुत जल्द भाकियू एकता (डकोंदा) पंजाब में प्रवासी मजदूरों की स्थिति और उनके प्रति पंजाब के किसानों के व्यवहार का पूरा विवरण आम लोगों और मीडिया के सामने लाएंगी। किसानों ने प्रवासी मजदूरों को बंधक बनाए जाने में कोई सच्चाई नहीं है। किसानों का प्रवासी मजदूरों के साथ बर्ताव हमेशा बहुत अच्छा रहा है। यही कारण भी है कि उत्तर प्रदेश और बिहार के पिछड़े इलाकों के मजदूर हर साल खेत में मजदूरी करने पंजाब पहुंचते हैं।
पंजाब के किसानों को बदनाम करने की साजिश : अकाली दल
शिअद ने आरोप लगाया कि केंद्र की भाजपा सरकार ने सूबे के किसानों को बदनाम करने की साजिश रची है। पूर्व सांसद प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा ने कहा कि गृह मंत्रालय का पत्र खुद विरोधाभासी है। पत्र में एक तरफ तो दावा किया जा रहा है कि बीएसएफ ने 58 बंधक मजदूरों को छुड़ाया था, वहीं ‘मानव तस्कर गिरोह’ अच्छे वेतन का लालच देकर गुरदासपुर, अमृतसर, फिरोजपुर और अबोहर में उत्तर प्रदेश व बिहार के मजदूरों को बहला फुसलाकर लाते हैं।
चंदूमाजरा ने गृह मंत्रालय से सवाल किया कि क्या ये दोनों चीजें एक साथ हो सकती हैं? उन्होंने कहा कि गृह मंत्रालय के पत्र से पूरे देश में गलत संदेश जाएगा और इससे टकराव का माहौल बनेगा। पत्र में उल्लेखित किसी भी क्षेत्र में किसी भी व्यक्ति को बंधुआ मजदूर के रूप में काम करने के लिए मजबूर किए जाने की एक भी प्राथमिकी नहीं है। वास्तव में सच इसके उलट है। पंजाब के किसान मजदूरों को उनकी सेवाओं का अग्रिम भुगतान करते हैं। पूर्व सांसद ने कहा कि रिपोर्ट को तुरंत वापस लिया जाना चाहिए।
केंद्र की ओछी राजनीति : औजला
अमृतसर से लोकसभा सांसद गुरजीत सिंह औजला ने कहा है कि केंद्र सरकार के रवैये से सभी वाकिफ हैं। सभी जानते हैं कि किसान आंदोलन में शहीद हुए 300 किसानों के लिए केंद्र सरकार की ओर से एक शब्द नहीं कहा गया। औजला ने कहा कि किसान आंदोलन को बदनाम करने के लिए केंद्र सरकार ने यह ओछी राजनीति शुरू की है।
औजला ने अमृतसर का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके हलके में एक लाख किसान हैं और कहीं भी ऐसी स्थिति नहीं है कि प्रवासी मजदूरों से अमानवीय व्यवहार किया जाता हो। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर केंद्र सरकार को ऐसी किसी स्थिति का पता था तो मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से इस बाबत क्यों बात नहीं की? दरअसल केंद्र सरकार इस तरह के आरोपों के जरिए किसान आंदोलन को बदनाम करने के साथ-साथ जनता को असली मुद्दों से भटकाने की कोशिश कर रही है।