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सिद्धू-कैप्टन विवाद: सियासी जंग के बादल छंटने के आसार नहीं, अमरिंदर ने बढ़ाया कदम लेकिन नवजोत ने बनाई दूरी

Sat, 24 Jul 2021 06:01 AM IST
ajay kumar हर्ष कुमार सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़
हर्ष कुमार सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sat, 24 Jul 2021 06:01 AM IST
सार

राज्यसभा सांसद प्रताप सिंह बाजवा को कांग्रेस भवन में सिद्धू के ताजपोशी समारोह में पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया। उन्हें न तो भाषण देने के लिए मंच पर बुलाया गया और न ही सिद्धू ने अपने भाषण के दौरान जहां अनेक सीनियर नेताओं का जिक्र किया, वहीं प्रताप बाजवा का नाम नहीं लिया। इससे नाराज होकर बाजवा समारोह को बीच में ही छोड़कर चले गए। संभवत: नवजोत सिद्धू इन दिनों प्रताप बाजवा की कैप्टन के साथ बढ़ती नजदीकियों से खफा हैं।

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Political differences between Capt Amarinder Singh and Navjot Singh Sidhu in Punjab are not over yet
पंजाब कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष बने नवजोत सिंह सिद्धू। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नवजोत सिंह सिद्धू के प्रदेश कांग्रेस प्रधान बन जाने के बाद उम्मीद की जा रही थी कि पंजाब कांग्रेस में सब कुछ ठीक हो जाएगा। लंबे अरसे से चला आ रहा विवाद अब थम जाएगा। लेकिन अगर 23 जुलाई के पूरे दिन के घटनाक्रम को ही देखें तो साफ हो जाता है कि प्रदेश इकाई में सब कुछ ठीक नहीं हुआ है। 

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नवजोत सिद्धू और कैप्टन भले ही एक मंच पर नजर आए लेकिन दोनों की बीच जारी जंग के बादल अभी छंटे नहीं हैं और आने वाले दिनों में विभिन्न मुद्दों पर दोनों नेताओं के बीच फिर से तल्खी सामने आना तय है। सिद्धू को प्रदेश अध्यक्ष घोषित किए जाने के बाद कैप्टन ने सिद्धू से सार्वजनिक माफी की मांग की थी। लेकिन सिद्धू ने आज पद संभालने के समय भी कैप्टन की परवाह नहीं की। 
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माफी मांगना तो दूर, सिद्धू ने मंच पर बैठे हरीश रावत समेत सभी सीनियर नेताओं के पांव तो छुए लेकिन कैप्टन को दूर से ही फतेह बुला दी। इसी दौरान कैप्टन ने मंच पर सिद्धू से तीन-चार बार बात करने की कोशिश की लेकिन बार-बार कैप्टन को नजरअंदाज करते रहे। इसके बाद अपने भाषण के दौरान भी सिद्धू ने पंजाब के जितने मसले उठाए, यह वही थे जिन्हें सिद्धू अपने ट्वीट के जरिए कैप्टन पर हमला करने के लिए उठाते रहे हैं। 

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यहां खास बात यह भी रही कि सिद्धू अपने आक्रामक भाषण के दौरान भूल गए कि वे जितने मसले और नाकामियां गिना रहे हैं, वे सभी उनकी अपनी ही पार्टी की सरकार से संबंधित हैं। संभवत: सिद्धू के लिए उस समय निशाने पर केवल और केवल कैप्टन ही थे। सिद्धू ने मंच पर ही कैप्टन से पूछ लिया कि चिट्टे का व्यापारी अब तक पकड़ा क्यों नहीं? बिजली समझौतों का सच अब तक बाहर क्यों नहीं आया? इससे साफ है कि सिद्धू आने वाले दिनों में कैप्टन की मुख्यमंत्री पद पर योग्यता पर सवालिया निशान लगा सकते हैं। दूसरी ओर, कैप्टन अमरिंदर सिंह एक अनुभवी और सुलझे हुए राजनीतिज्ञ की तरह शुक्रवार को पूरी तरह शांत दिखे। उन्होंने अपने संबोधन के दौरान सिद्धू को अध्यक्ष बनने की बधाई दी और कहा कि अब वे और सिद्धू मिलकर पंजाब के लिए काम करेंगे। 

सुनील जाखड़ भी गुस्से में
उधर, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ का भी पारा काफी चढ़ा हुआ दिखाई दिया। उन्होंने जहां पार्टी के नाराज मंत्रियों, विधायकों पर जमकर निशाना साधा। जाखड़ नवजोत सिद्धू को खरी-खरी सुनाने से भी नहीं चूके। अपने भाषण के दौरान जाखड़ ने कहा- मैंने यू हीं हांडी नहीं छोड़ी। मैं दोस्ती भी खुलकर निभाता हूं और दुश्मनी भी। 

उन्होंने कहा कि कैप्टन के साथ 20 साल काम किया है और उनसे मेरा रिश्ता बहुत गहरा है। कैप्टन मेरे और मैं उनके काम से बहुत प्रभावित हूं। जाखड़ ने नाराज मंत्रियों-विधायकों को भी निशाने पर लेते हुए, मंच से उनके नाम लेकर कहा- रंधावा जी, चन्नी जी और लाल जी मेरी बात ध्यान से सुनें लेकिन बुरा न मानें। 

कांग्रेस की रिवायत बन गई है कि मंत्री-विधायक नाराज होते हैं तो उन्हें मनाने के लिए जाना पड़ता है लेकिन वे फिर नाराज हो जाते हैं। जाखड़ ने सवाल किया कि क्या ये कांग्रेस के फूफा हैं, जिन्हें बार-बार मनाया जाए? सिद्धू को संबोधित करते हुए जाखड़ ने कहा- सिद्धू मेरी बात ध्यान से सुनें। हाईकमान ने आपको यह जिम्मेदारी सोच-समझकर दी है। इस ओहदे पर पूरी ईमानदारी से काम करना।

प्रियंका के निर्देश पर कैप्टन से मिले सिद्धू
कांग्रेस भवन में ताजपोशी से पहले पंजाब भवन में कैप्टन ने सभी मंत्रियों, विधायकों और सांसदों को चाय पर बुलाया था। नवजोत सिद्धू जब पंजाब भवन पहुंचे तब तक कैप्टन वहां नहीं आए थे। इस पर सिद्धू कुछ देर विधायकों से बातचीत करने के बाद पंजाब भवन से चले गए। इस बात की सूचना तुरंत हरीश रावत ने प्रियंका गांधी को फोन पर दी, जोकि इन दिनों शिमला में हैं। 

प्रियंका ने तुरंत नवजोत सिद्धू को फोन करके वापस पंजाब भवन पहुंचने को कहा। आखिरकार सिद्धू पंजाब भवन लौटे, तब तक कैप्टन वहां पहुंच चुके थे। सिद्धू ने उन्हें दूर से ही फतेह बुलाई और पूरे जोश के साथ गले मिलने के अपने चिर-परिचित अंदाज में कैप्टन से मिलने से परहेज किया। हालांकि यह माना जा रहा था कि सिद्धू पंजाब भवन में चाय पार्टी के दौरान ही कैप्टन से अपने गिले-शिकवे दूर कर लेंगे और दोनों साथ-साथ पंजाब कांग्रेस भवन के लिए रवाना होंगे।

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