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पुलिसवालों की 32 हजार वोटों के लिए 5 शर्तें
राजेश ढल्ल/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 09 Mar 2014 09:27 AM IST
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शहर में सात हजार पुलिस कर्मचारी हैं। इसके अलावा एक हजार रिटायर कर्मचारी भी शहर में रहते हैं। इनके परिवारों के कुल मिलाकर 32 हजार से ज्यादा वोट हैं।
इतने वोट किसी भी उम्मीदवार की हार-जीत में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। मगर इसबार ये वोट आसानी से नहीं मिलने वाले। पुलिस कर्मचारियों के अपने मुद्दे हैं और उनका कहना है कि जो पार्टी चुनाव घोषणात्र में हमारे मुद्दों को शामिल करेगी वोट उसी को मिलेंगे।
ये हैं मुद्दे
प्रमोशन
प्रमोशन प्रणाली निरर्थक हो गई है। इंस्पेक्टर से डीएसपी स्तर तक दूसरे राज्यों से अधिकारी आ जाते हैं। चंडीगढ़ के कर्मचारियों को पदोन्नति नहीं दी जा रही।
आवास
सेक्टर-26, 11, 20, 46, 41, 42, 17, 34 और 39 में पुलिस कर्मचारियों के परिवार के लिए सरकारी मकान हैं। मगर इनकी हालत खस्ता है। पार्क और सामुदायिक केंद्र दयनीय हालत में हैं। मकान कम हैं और कर्मचारी किराये पर रहने को मजबूर हैं।
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आवासीय सोसाइटी
सेक्टर-49 में सिर्फ एक पुलिस सोसाइटी है। इसमें सिर्फ 190 पुलिस वालों के मकान हैं। रिटायरमेंट के बाद पुलिसकर्मियों को सिर पर छत्त मिल सके, इसके लिए और सोसाइटियों की जगह मिलनी चाहिए।
बेमतलब का शुल्क
इस समय पुलिस कर्मचारियों में इस बात का काफी रोष है कि उनके वेतन से हर माह 100 रुपये शुल्क सीटीयू बस के सफर के लिए काट लिया जाता है। अधिकतर कर्मचारी सफर करते ही नहीं। शुल्क उनसे ही लिया जाए जो सफर करते हैं।
अनुकंपा नौकरी
किसी कर्मचारी की मृत्यु के बाद उसके परिवार के किसी सदस्य को अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने के प्रावधान में सुधार किया जाए। शहीद इंस्पेक्टर सुच्चा सिंह के बेटे परमिंदर सिंह और डीएसपी विजय कुमार के बेटे को उनकी मांग और योग्यता के बावजूद एएसआई की नौकरी नहीं दी गई।
प्रमोशन की प्रणाली में काफी त्रुटियां हैं। शहर में इंस्पेक्टर के बाद की प्रमोशन तो रुक ही गई है। दूसरे राज्यों से डीएसपी आ रहे हैं। पुलिस कालोनियों की मरम्मत तक नहीं होती। हाल अच्छा नहीं है।
-सुभाष सागर, रिटायर्ड डीएसपी
पुलिस कर्मचारी कोई भी पर्व अपने परिवार के साथ नहीं मना पाते। वे ड्यूटी पर डटे रहते हैं। इसके बावजूद उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जाता। उनके बच्चों को लिए एक भी पुलिस स्कूल नहीं है।
- जसबीर सिंह चीमा, रिटायर्ड डीएसपी
इस बार लोकसभा चुनाव में उसी पार्टी को वोट देंगे जो हमारी समस्याएं दूर करेगा। हमारी दिक्कतों पर राजनीतिक दलों को अपने चुनाव घोषणा पत्र में स्पष्ट आश्वासन देना होगा।
-जगबीर सिंह, रिटायर्ड इंस्पेक्टर
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इतने वोट किसी भी उम्मीदवार की हार-जीत में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। मगर इसबार ये वोट आसानी से नहीं मिलने वाले। पुलिस कर्मचारियों के अपने मुद्दे हैं और उनका कहना है कि जो पार्टी चुनाव घोषणात्र में हमारे मुद्दों को शामिल करेगी वोट उसी को मिलेंगे।
ये हैं मुद्दे
प्रमोशन
प्रमोशन प्रणाली निरर्थक हो गई है। इंस्पेक्टर से डीएसपी स्तर तक दूसरे राज्यों से अधिकारी आ जाते हैं। चंडीगढ़ के कर्मचारियों को पदोन्नति नहीं दी जा रही।
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आवास
सेक्टर-26, 11, 20, 46, 41, 42, 17, 34 और 39 में पुलिस कर्मचारियों के परिवार के लिए सरकारी मकान हैं। मगर इनकी हालत खस्ता है। पार्क और सामुदायिक केंद्र दयनीय हालत में हैं। मकान कम हैं और कर्मचारी किराये पर रहने को मजबूर हैं।
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आवासीय सोसाइटी
सेक्टर-49 में सिर्फ एक पुलिस सोसाइटी है। इसमें सिर्फ 190 पुलिस वालों के मकान हैं। रिटायरमेंट के बाद पुलिसकर्मियों को सिर पर छत्त मिल सके, इसके लिए और सोसाइटियों की जगह मिलनी चाहिए।
बेमतलब का शुल्क
इस समय पुलिस कर्मचारियों में इस बात का काफी रोष है कि उनके वेतन से हर माह 100 रुपये शुल्क सीटीयू बस के सफर के लिए काट लिया जाता है। अधिकतर कर्मचारी सफर करते ही नहीं। शुल्क उनसे ही लिया जाए जो सफर करते हैं।
अनुकंपा नौकरी
किसी कर्मचारी की मृत्यु के बाद उसके परिवार के किसी सदस्य को अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने के प्रावधान में सुधार किया जाए। शहीद इंस्पेक्टर सुच्चा सिंह के बेटे परमिंदर सिंह और डीएसपी विजय कुमार के बेटे को उनकी मांग और योग्यता के बावजूद एएसआई की नौकरी नहीं दी गई।
प्रमोशन की प्रणाली में काफी त्रुटियां हैं। शहर में इंस्पेक्टर के बाद की प्रमोशन तो रुक ही गई है। दूसरे राज्यों से डीएसपी आ रहे हैं। पुलिस कालोनियों की मरम्मत तक नहीं होती। हाल अच्छा नहीं है।
-सुभाष सागर, रिटायर्ड डीएसपी
पुलिस कर्मचारी कोई भी पर्व अपने परिवार के साथ नहीं मना पाते। वे ड्यूटी पर डटे रहते हैं। इसके बावजूद उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जाता। उनके बच्चों को लिए एक भी पुलिस स्कूल नहीं है।
- जसबीर सिंह चीमा, रिटायर्ड डीएसपी
इस बार लोकसभा चुनाव में उसी पार्टी को वोट देंगे जो हमारी समस्याएं दूर करेगा। हमारी दिक्कतों पर राजनीतिक दलों को अपने चुनाव घोषणा पत्र में स्पष्ट आश्वासन देना होगा।
-जगबीर सिंह, रिटायर्ड इंस्पेक्टर