कृषि कानून: हरियाणा के कई जिलों में किसान सड़कों पर उतरे, सड़कें जाम, भारी पुलिसबल तैनात
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कृषि विधेयकों के विरोध में विभिन्न किसान संगठनों और आढ़तियों ने प्रदेशभर में रविवार दोपहर में जमकर विरोध प्रदर्शन किया। किसानों ने विधेयक की प्रतियां फूंककर नाराजगी जताई और धरना दिया। भारतीय किसान यूनियन के आह्वान पर नाराज किसानों ने एक से तीन घंटे तक सड़कों पर जाम लगाया और प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री की तस्वीरों वाले बैनर जलाए।
जीटी रोड को छोड़कर करनाल, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, अंबाला, कैथल और पानीपत में दोपहर 12 बजे से अपराह्न तीन बजे तक चक्का जाम किया गया। इस दौरान किसानों ने आढ़तियों के साथ मिलकर जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया। अंबाला में जब युवा कांग्रेसियों ने दिल्ली जाने का प्रयास किया तो पुलिस ने उन्हें बलपूर्वक रोका गया।
वाटर कैनन से उन पर पानी की बौछारें कीं, जिससे गुस्साए युवा कांग्रेसियों ने रैली में शामिल एक ट्रैक्टर को आग के हवाले कर दिया। वहीं आढ़तियों ने तीसरे दिन भी मंडियां बंद रखीं और किसानों के चक्का जाम में शामिल हुए। कैथल में स्टेट और नेशनल हाइवे पर ट्रैक्टर-ट्राली खड़े कर किसानों ने जाम लगा दिया। हालांकि अपातकालीन सेवाएं एंबुलेंस जैसे वाहनों को निकलने के लिए रास्ता दिया गया।
प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी और प्रवक्ता राकेश बैंस ने दावा किया है कि इस आंदोलन में 17 किसान यूनियनों का उन्हें समर्थन प्राप्त है। उधर, हरियाणा सरकार ने भी किसानों से आंदोलन की राह छोड़कर बातचीत का ऑफर रखा। मगर किसान फिलहाल आंदोलन के लिए कमर कसे हुए हैं।
गृह सचिव ने किया जिलों के डीसी, एसपी को अलर्ट
किसानों के प्रदर्शनों को लेकर हरियाणा गृह सचिव ने भी सभी जिलों के डीसी व एसपी को अलर्ट घोषित कर दिया है। इस संदर्भ में गृह सचिव ने सभी जिलों के डीसी और एसपी को पत्र लिखा है। पत्र में कहा गया है कि सभी डीसी, एसएसपी, एसपी इस रोड जाम करने का आह्वान करने वाले लोगों तक पहुंचे और शांतिपूर्ण धरने के लिए मनाएं।
यदि हाईवे जाम होते हैं तो दूसरे विकल्प एक रास्तों पर ट्रैफिक को तुरंत मूव किया जाए। यदि कोई अधिकारी जिलों से बाहर हैं तो सभी जिलाधिकारी और पुलिस अधिकारी अपने जिलों में रिपोर्ट करें। कोई अफसर रविवार को छुट्टी पर नहीं रहेगा।
अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रदर्शनकारियों के साथ विनम्रता और धैर्य से पेश आया जाए। हालांकि, प्रदर्शनकारियों को कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। 20 सितंबर को किसी भी तरह की सहायता की आवश्यकता पड़ती है। तो इसके लिए गृह सचिव के नियंत्रण कक्ष (0172-2711925) पर संपर्क किया जा सकता है।
हिसार में धरना, भारी पुलिस तैनात
केंद्र सरकार के तीन कृषि विधेयकों के खिलाफ भारतीय किसान संघर्ष समिति ने मय्यड़ में टेंट लगाकर धरना शुरू कर दिया है। हालांकि धरने पर अभी गिने-चुने किसान ही एकत्रित हैं। किसानों के धरने को देखते हुए मौके पर काफी संख्या में पुलिस बल तैनात है। इसके अलावा सरसौद में किसानों के रोड जाम की चेतावनी को देखते हुए पुलिस बल की तैनाती की गई है।
अग्रोहा में किसान संघर्ष समिति के सदस्यों ने सरकार के पुतले की शव यात्रा निकाली। वहीं नारनौंद में जींद-हांसी और बास में जींद-भिवानी रोड किसानों ने जाम कर दी है। वही धरनास्थल पर किसानों से बातचीत करने एसडीएम राजेंद्र सिंह भी पहुंच गए हैं।
भिवानी में जलाई प्रतियां
भिवानी के कई गांवों में किसानों ने कृषि विधेयकों की प्रतियां जलाई। मतानी, बिधवान ,कलाली व नलोई में विधेयक की प्रतियां जलाई गईं।
सिरसा में राष्ट्रीय राजमार्ग जाम
सिरसा में किसानों ने राष्ट्रीय राजमार्ग-10 को जाम कर दिया है। यहां पर भी पुलिस बल को बड़ी तादाद में तैनात किया गया है। सिरसा में धरने पर एक कार्यकर्ता भाजपा का बैंड हाथ में पहने हुए था। किसानों ने उसे बाहर निकाल दिया।
अंबाला में भारी पुलिसबल तैनात
हरियाणा और पंजाब में किसान कृषि विधेयकों का विरोध कर रहे हैं। किसानों के विरोध के मद्देनजर हरियाणा के अंबाला में पुलिस बल मुस्तैद है। अंबाला के सदोपुर सीमा पर भारी पुलिसबल को तैनात किया गया है। अंबाला के एसपी अभिषेक जोरवाल ने कहा कि 'यहां जगह-जगह बैरिकेडिंग की गई है, क्योंकि भारतीय किसान यूनियन ने विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। हमारे पास यहां पर्याप्त संख्या में बल मौजूद हैं।'
वहीं अंबाला रेंज के आईजी वाई पूरन कुमार ने कहा कि हरियाणा में 16-17 किसान संघों ने विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। इस दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति हर कीमत पर बनी रहेगी।
विपक्षी दलों ने किसानों को अपने राजनीतिक लाभ के लिए गुमराह किया है। पीएम ने किसानों को एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) का आश्वासन दिया है। किसान कहीं भी अपनी उपज का स्वतंत्र रूप से व्यापार कर सकेंगे। महामारी के दौरान सड़कों को अवरुद्ध करना सही नहीं है। अनिल विज, गृह एवं स्वास्थ्य मंत्री, हरियाणा।
इन जगहों पर किसानों ने लगाया जाम
रोहतक-पानीपत राष्ट्रीय राजमार्ग पर बैठे किसान
रोहतक में किसान रोहतक-पानीपत राष्ट्रीय राजमार्ग पर बैठ गए। जिन्हें समझा कर जाम न लगाने का पुलिस आग्रह कर रही है। इस दौरान भारी पुलिसबल भी मुस्तैद है। 1300 पुलिसकर्मी सड़क पर उतारे गए हैं, जिनमें, 800 पुलिसकर्मी शहर में व 500 पुलिसकर्मी शहर के आउटर एरिया में तैनात है। पुलिस ने चयनित 18 जगहों पर नाकाबंदी की है। महिला थाना प्रभारी समेत सभी 16 थाना प्रभारी/चौकी इंचार्ज/तीनों सीआईए यूनिट गश्त पर हैं। इसके अलावा पुलिस की कई विशेष टीम आपातकालीन स्थिति से निपटने को पुलिस लाइन में तैयार है।
झज्जर में किसानों की बैठक
झज्जर जिले के बेरी की अनाज मंडी में किसानों की बैठक चल रही है। भारतीय किसान यूनियन के जिला अध्यक्ष राजेश झामरी, आम आदमी पार्टी के जिला अध्यक्ष सुरेंद्र, अखिल भारतीय किसान सभा के जिला प्रधान सतनारायण, बेरी अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन, सर छोटू राम मिशन के अध्यक्ष सत्यवान, धरनास्थल पर पहुंच गए हैं और किसानों को संबोधित कर रहे हैं। झज्जर के बेरी में भागलपुरी चौक पर किसानों ने जाम लगा दिया। पुलिसबल और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं।
फतेहाबाद में किसानों का रोष मार्च शुरू
केंद्र सरकार के तीन कृषि विधेयकों के विरोध में टोहाना खण्ड के गांव समैन व कन्हड़ी के किसानों ने राष्ट्रीय राजमार्ग 148-बी पर जाम लगा दिया है। कृषि क्षेत्र में लाये गए कानूनों का किसान विरोध कर रहे हैं। गांव कन्हड़ी में किसान बेद सिंह, राममेहर नैन, प्रेम सिंह की अगुवाई में किसानों ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। वहीं गांव समैन में पूर्व जिला परिषद चेयरमेन बलबीर सिंह बल्ली, पूर्व सरपंच प्रतिनधि कुला राम, जोगिंदर गिल, शेरा गिल, संजीव कुमार की अगुवाई में किसानों ने राष्ट्रीय राजमार्ग पर गांव के बस स्टैंड के पास सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। पूर्व जिप चेयरमैन बलबीर सिंह गिल ने कहा कि केंद्र सरकार के तीनों विधेयक किसान विरोधी है। सरकार को इन्हें वापस लेना चाहिए।
रेवाड़ी में किसानों ने प्रतियां जलाकर जताया विरोध
जैनाबाद में किसान खेत मजदूर संगठन ने सुबह किसान नेता रामकुमार व विजय सिंह के नेतृत्व में किसानों ने प्रदर्शन करते हुए प्रदेश सरकार विरोधी नारे लगाए और अध्यादेश की प्रतियां जलाई। किसान नेता रामकुमार ने बताया कि सरकार किसानों को बर्बाद करने पर तुली हुई है। नए-नए अध्यादेश लाकर किसानों को गुमराह कर रही है।
मंडियों से बाहर भी एमएसपी अनिवार्य होगी तो वे विरोध नहीं करेंगे: हुड्डा
कांग्रेस बताए 2019 के चुनावी घोषणा पत्र में कृषि अध्यादेश क्यों किया था शामिल: रामबिलास शर्मा
पूर्व शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा ने अपने महेंद्रगढ़ आवास पर कहा कि वर्ष 2019 के चुनावी घोषणा पत्र में कांग्रेस ने कृषि अध्यादेश लागू करने की बात कही थी, अब एनडीए की सरकार इसे लागू कर रही है तो कांग्रेस इसे किसानों के लिए बुरा बता रही है। शर्मा ने कहा कि किसानों को बारीकी से इस अध्यादेश का अध्ययन करना चाहिए। पूर्व मंत्री ने उन्हें आश्वस्त किया कि आने वाले दिनों में हर किसान का एक-एक दाना खरीदा जाएगा।
सब चाहते हैं नहीं आए ये कानून- चढूनी
यमुनानगर जिले में भाकियू के प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी की अगुवाई में सैकड़ों किसानों ने मिल्क माजरा टोल प्लाजा पर तीन घंटे तक जाम लगाए रखा। प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि देश का युवा, बच्चे से लेकर बूढ़े तक, मजदूर से लेकर आढ़ती तक, सब यही चाहते हैं कि उन्हें ये कानून नहीं चाहिए।
रविवार का दिन किसानों और संसद के लिए काला दिवस : दीपेंद्र
कोरोना संक्रमित दीपेंद्र ने अस्पताल से वीडियो संदेश जारी कर नए कानूनों के खिलाफ विरोध जाहिर किया। सांसद ने कहा कि उन्हें इस बात की टीस है कि वे संसद पटल पर तर्कसंगत तरीके से अपनी बात सरकार के कानों तक नहीं पहुंचा सके।
हालांकि, उनकी सेहत में सुधार है लेकिन दुर्भाग्यवश रविवार को उनकी दूसरी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई, जिसकी वजह से वह संसद की चर्चा में प्रत्यक्ष रूप से शामिल नहीं हो पाए। वह उम्मीद करते हैं कि लोगों की दुआ से तीसरे कृषि संबंधित विधेयक पर सदन में चर्चा से पहले कोरोना निगेटिव व पूर्ण रूप से स्वस्थ होकर प्रत्यक्ष रूप से संसद में जा पाएंगे।
रविवार को पारित दो कानूनों से सिर्फ किसान ही नहीं बल्कि आढ़ती समेत हर उस गरीब आदमी को भी बड़ा नुकसान होगा, जिसे राशन कार्ड पर आटा, अनाज और दाल आदि मिलते हैं। नए कानून किसान पर थोपकर न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रणाली और मंडी व्यवस्था को कमजोर करने के बाद स्वाभाविक रूप से सरकार का अगला प्रहार सार्वजनिक वितरण प्रणाली पर होने जा रहा है। इस प्रणाली के तहत करोड़ों राशन कार्ड धारक गरीबों को लाभ मिलता है। राज्यसभा में सरकार ने धक्केशाही से जल्दबाजी में पारित करवाया है। लोकतांत्रिक व्यवस्था इसकी इजाजत नहीं देती।