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‘बीच भंवर में’ पर कवि दरबार में मंथन
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 31 Dec 2013 11:18 PM IST
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साहित्य संस्था मंथन चंडीगढ़ ने महावीर मुनि मंदिर सेक्टर-23 डी में एक कवि दरबार और पुस्तक पर परिचर्चा की।
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शायर जयगोपाल अश्क इसमें मुख्य अतिथि थे। दीपक खेतरपाल ने मंच संचालन किया। कार्यक्रम के पहले चरण में कथाकार मदन शर्मा राकेश के कहानी संग्रह ‘बीच भंवर में’ पर चर्चा हुई।
सुशील हसरत नरेलवी ने कहा कि कहानियों के कथ्य का केंद्र बिंदु पारिवारिक जुड़ाव है। इसमें नई सोच, नई मान्यताएं, नए विकल्प हैं।
कहानियां दकियानूसी की जंजीर तोड़ती हुईं स्त्री चेतना को मुखर करती हैं। कहानियों के पात्र कहीं भी अपने संबंधों को छिन्न-भिन्न करके तथाकथित बदलाव का परचम नहीं लहराते।
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वैचारिक स्तर पर ये सामाजिक चेतना की घोतक हैं। समीक्षक नरेंद्र निर्मोही ने कहा कि कथाकार मदन शर्मा राकेश के कहानी संग्रह ‘बीच भंवर में’ की कहानियां किनारों का अंतिम सच है।
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नारी चेतना और संघर्ष इन कहानियों के केंद्र में है। प्रेम विज ने कहा कि कथाकार मदन शर्मा राकेश की कहानियों में नारीमन का गहरा चित्रण है।
गोष्ठी के दूसरे चरण में कवि दरबार लगा। इसका शुभारंभ बेबी जिज्ञासा ने किया। कवयित्री शशि प्रभा, आरके मल्होत्रा, दीपक खेतरपाल, सतनाम सिंह, सतीश मधोक, के चंद्रा, आरपी सिंह, ओम प्रकाश सांघी, मदन शर्मा राकेश, आरके भगत और ललिता पुरी ने अपनी कविताओं से समां बांधा।