{"_id":"5d8a7d908ebc3e0167561579","slug":"poet-confrence-in-tagore-theatre-chandigarh-news-pkl3517297141","type":"story","status":"publish","title_hn":"टैगोर थियटर में काव्य सम्मेलन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
टैगोर थियटर में काव्य सम्मेलन
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चंडीगढ़। छत टपके तो फव्वारों का मजा लेते हैं, टूटे कमरों में बहारों का मजा लेते हैं... प्रसिद्ध कवि सुनहरी लाल तुरंत की इस हास्य रचना को सुनकर लोगों के हंसी के फव्वारे छूट गए। मौका था चंडीगढ़ आर्ट एंड हेरिटेज फेस्टिवल के अंतर्गत चंडीगढ़ साहित्य अकादमी द्वारा टैगोर थियेटर में आयोजित हास्य कवि सम्मेलन का। इसमें देश के नामचीन हास्य कवियों ने श्रोताओं को ऐसा हंसाया कि सभी मस्त हो गए। सुनहरी लाल तुरंत ने हम भी कुछ रंग जमाने का हुनर रखते हैं, रंग पे रंग चढ़ाने का हुनर रखते हैं.. सुनाकर भी लोगों को खूब गुदगुदाया। इस मौके पर प्रसिद्ध हास्य कवि पापुलर मैराथी ने सुनाया कितनी दौलत है नेता कल्लन पर, उन के जैसे अमीर बन जाते, दस्तखत तो तुम्हें भी आते हैं..अब्बा तुम भी वजीर बन जाते। इस दौरान महेंद्र अजनबी ने ऐसा हंसाया कि सभी लोट पोट हो गए। उन्होेंने ऑडियंस से अपने साथ नारे लगवाए और उसके बाद बोले- रंग जमाने का यह हुनर उन्होंने देश के एक नामचीन नेता से सीखा.. है। उसके बाद उन्होंने अपनी भूलने की कला को बताया तो ऑडियंस हंसते हंसते लोटपोट हो गई।
इस मौके पर जैसे ही अरुण जैमिनी मंच पर आए तो उन्होंने सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लिया। उन्होंने इंटरव्यू, हरियाणे के छोरे और अन्य कविताओं से सभी को अपना दीवाना बना लिया। इस कवि सम्मेलन के दौरान महेंद्र शर्मा और योगेंद्र मोदगिल, जैनेंद्र, सुनहरी लाल तुरंत, सूफी जगजीत, पीके आजाद, जगसीर जिद्दा ने सभी को अपना दीवाना बनाया। इस कवि सम्मेलन की अध्यक्षता माधव कौशिक ने की। उन्होंने कहा कि यह कवि सम्मेलन चंडीगढ़ के लोगों मेंनई ऊर्जा भर गया।
अरुण जैमिनी ने सुनाया कि एक ओर से हरियाणा का छोरा एक दिया लेकर आ रहा था और दूसरी ओर से बाबा, जैसे ही बाबा करीब पहुंचा तो बाबा ने कहा कि बेटा बता यह जोत कहां से आ रही है, वैसे ही छोरे ने जोत पर मारी फूंक और बोला, बाबा ये बता जोत गई कहां। इसके बाद अरुण जैमिनी ने एक इंटरव्यू का ऐसा किस्सा सुनाया कि सभी हंसते रह गए।
विज्ञापन
हास्य कवि सम्मेलन में विजय माल्या पर भी कटाक्ष किया गया। सुनहरी लाल तुरंत ने कहा कि अब तो सभी बैंक माल्या का ही नाम जपते हैं। उन्होंने माल्ंया और बैंक के बीच को लेकर एक कविता भी सुनाई।
विज्ञापन
इस मौके पर जैसे ही अरुण जैमिनी मंच पर आए तो उन्होंने सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लिया। उन्होंने इंटरव्यू, हरियाणे के छोरे और अन्य कविताओं से सभी को अपना दीवाना बना लिया। इस कवि सम्मेलन के दौरान महेंद्र शर्मा और योगेंद्र मोदगिल, जैनेंद्र, सुनहरी लाल तुरंत, सूफी जगजीत, पीके आजाद, जगसीर जिद्दा ने सभी को अपना दीवाना बनाया। इस कवि सम्मेलन की अध्यक्षता माधव कौशिक ने की। उन्होंने कहा कि यह कवि सम्मेलन चंडीगढ़ के लोगों मेंनई ऊर्जा भर गया।
विज्ञापन
अरुण जैमिनी ने सुनाया कि एक ओर से हरियाणा का छोरा एक दिया लेकर आ रहा था और दूसरी ओर से बाबा, जैसे ही बाबा करीब पहुंचा तो बाबा ने कहा कि बेटा बता यह जोत कहां से आ रही है, वैसे ही छोरे ने जोत पर मारी फूंक और बोला, बाबा ये बता जोत गई कहां। इसके बाद अरुण जैमिनी ने एक इंटरव्यू का ऐसा किस्सा सुनाया कि सभी हंसते रह गए।
विज्ञापन
हास्य कवि सम्मेलन में विजय माल्या पर भी कटाक्ष किया गया। सुनहरी लाल तुरंत ने कहा कि अब तो सभी बैंक माल्या का ही नाम जपते हैं। उन्होंने माल्ंया और बैंक के बीच को लेकर एक कविता भी सुनाई।