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PM Modi in Chandigarh: चंडीगढ़ में बोले पीएम मोदी-नए आपराधिक कानूनों से जल्द न्याय मिलेगा

Tue, 03 Dec 2024 03:06 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Tue, 03 Dec 2024 03:06 PM IST
सार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को चंडीगढ़ के पंजाब इंजीनियरिंग काॅलेज में तीन नए आपराधिक कानूनों को राष्ट्र को समर्पित किया। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह भी उनके साथ रहे।

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PM Narendra Modi Chandigarh Visit Updates Amit Shah in Hindi
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चंडीगढ़ दाैरे पर - फोटो : X @BJP4India

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को चंडीगढ़ में तीन नए आपराधिक कानूनों- भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम के सफल कार्यान्वयन को राष्ट्र को समर्पित किया। 

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पंजाब इंजीनियरिंग काॅलेज में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में पहुंचे पीएम मोदी ने पुराने कानूनों को अंग्रेजों द्वारा भारतीयों के शोषण के लिए बनाया बताया। पीएम ने कहा कि कि मैं सभी देशवासियों को भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के लागू होने की अनेक-अनेक शुभकामनाएं देता हूं और चंडीगढ़ प्रशासन से जुड़े सभी लोगों को बधाई देता हूं। एक ऐसे समय में जब देश विकसित भारत का संकल्प लेकर आगे बढ़ रहा है, जब संविधान के 75 वर्ष हुए हैं, तब संविधान की भावना से प्रेरित 'भारतीय न्याय संहिता' के प्रभाव का प्रारंभ होना, बहुत बड़ी बात है। देश के नागरिकों के लिए हमारे संविधान ने जिन आदर्शों की कल्पना की थी, उन्हें पूरा करने की दिशा में ये ठोस प्रयास है।
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आजादी के सात दशकों में न्याय व्यवस्था के सामने जो चुनौतियां आईं, उन पर गहन मंथन किया गया। हर कानून का व्यवहारिक पक्ष देखा गया, भविष्य के मापदंड पर उसे कसा गया, तब भारतीय न्याय संहिता इस स्वरूप में हमारे सामने आई है। 
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मैं इसके लिए सुप्रीम कोर्ट का, माननीय न्यायाधीशों का, देश की सभी हाई कोर्ट का विशेष आभार व्यक्त करता हूं। भारत एक विकसित राष्ट्र बनने की ओर अग्रसर है और अपने संविधान की 75वीं वर्षगांठ मना रहा है, ऐसे में संवैधानिक मूल्यों पर आधारित भारतीय न्याय संहिता का शुभारंभ एक महत्वपूर्ण अवसर है।

यह पहल सभी नागरिकों के लाभ के लिए हमारे संविधान में निहित आदर्शों को साकार करने की दिशा में एक मजबूत कदम है।

भारतीयों को गुलाम बनाने के लिए लाए गए थे पुराने कानून

पीएम ने कहा कि 1857 में देश का पहला बड़ा स्वाधीनता संग्राम लड़ा गया। उस 1857 के स्वतंत्रता संग्राम ने अंग्रेजी हुकूमत की जड़ें हिला दी थीं, तब जाकर 1860 में अंग्रेज इंडियन पीनल कोड यानी आईपीसी लाए। उसके कुछ साल बाद, इंडियन पीनल एक्ट लाया गया यानी सीआरपीसी का पहला ढांचा अस्तित्व में आया। इस कानूनों की सोच व मकसद यही था कि भारतीयों को दंड दिया जाए, उन्हें गुलाम रखा जाए। दुर्भाग्य देखिए, आजादी के बाद दशकों तक हमारे कानून उसी दंड संहिता और पीनल माइंड सेट के इर्द गिर्द ही मंडराते रहे, जिसका इस्तेमाल नागरिकों को गुलाम मानकर होता रहा।

1947 में, सदियों की गुलामी के बाद जब हमारा देश आजाद हुआ, पीढ़ियों के इंतजार के बाद, लोगों के बलिदानों के बाद, जब आजादी की सुबह आई, तब कैसे-कैसे सपने थे, देश में कैसा उत्साह था। देशवासियों ने सोचा था कि अंग्रेज गए हैं, तो अंग्रेजी कानूनों से भी मुक्ति मिलेगी। अंग्रेजों के अत्याचार के, उनके शोषण का जरिया ये कानून ही तो थे। ये कानून ही तब बनाए गए थे, जब अंग्रेजी सत्ता भारत पर अपना शिकंजा बनाए रखने के लिए कुछ भी करने को तैयार थी।

देश अब उस कोलोनियल माइंडसेट से बाहर निकले, राष्ट्र के सामर्थ्य का प्रयोग राष्ट्र निर्माण में हो इसके लिए राष्ट्रीय चिंतन आवश्यक था। इसलिए मैंने 15 अगस्त को लाल किले से गुलामी की मानसिकता से मुक्ति का संकल्प देश के सामने रखा था। अब भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के जरिए देश ने उस दिशा में एक और मजबूत कदम उठाया है। 

हमारी न्याय संहिता लोगों की, लोगों द्वारा, लोगों के लिए उस भावना को सशक्त कर रही है, जो लोकतंत्र का आधार होती है।

पीएम ने कहा कि भारतीय न्याय संहिता का मूल मंत्र है- सिटीजन फर्स्ट। ये कानून नागरिक अधिकार के रक्षक बन रहे हैं, 'न्याय में आसानी' का आधार बन रहे हैं। पहले FIR को भी कानूनी रूप दिया गया था। भारतीय न्याय संहिता के लागू होने के बाद जेलों से ऐसे हजारों कैदियों को छोड़ा गया है, जो पुराने कानूनों की वजह से जेलों में बंद थे।

वाहन चोरी मामले में दो माह 11 दिन में मिली सजा

पीएम ने कहा कि चंडीगढ़ में वाहन चोरी के मामले में केस दर्ज होने के बाद सिर्फ दो महीने 11 दिन में अदालत ने सजा सुना दी और उसे सजा मिल भी गई। क्षेत्र में अशांति फैलाने के एक और आरोपी को अदालत में सिर्फ 20 दिन में पूरी सुनवाई के बाद सजा भी सुना दी। दिल्ली में भी एक केस में एफआईआर से लेकर फैसला आने तक सिर्फ 60 दिन का समय लगा। आरोपी को 20 साल की सजा सुनाई गई। बिहार के छपरा में भी एक मर्डर केस में एफआईआर से लेकर फैसला आने तक सिर्फ 14 दिन लगे और आरोपियों को उम्र कैद की सजा सुनाई गई। यह फैसला दिखाते हैं, न्याय संहिता की ताकत और उनका प्रभाव क्या है। यह बदलाव दिखता है, जब सामान्य नागरिकों के हितों के लिए समर्पित सरकार होती है, जब सरकार ईमानदारी से जनता की तकलीफों को दूर करना चाहती है, तो बदलाव भी होता है और परिणाम भी आते हैं।

अमित शाह ने चंडीगढ़ पुलिस को दी बधाई

अपने स्वागत भाषण में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि ढेर सारे प्रावधान हैं, नई व्यवस्था बनानी थी, इस कठिन काम को चंडीगढ़ ने पांच महीने में पूरा कर लिया है। ऐसे करके चंडीगढ़ देश का पहला शहर बन गया है। कोई भी एफआईआर हो तो अब अधिकतम 3 साल के अंदर न्याय मिलेगा, तारीख पर तारीख नहीं मिलेगी। ये दुनिया का सबसे बड़ा रिफॉर्म बनने जा रहा है।  
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