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5 जनवरी को पीएम मोदी रखेंगे पीजीआई फिरोजपुर सेटेलाइट सेंटर का नींवपत्थर
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चंडीगढ़। पीजीआई के फिरोजपुर सैटेलाइट सेंटर का नींव पत्थर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5 जनवरी को रखेंगे। इसकी स्वीकृति मिलते ही पीजीआई प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। गौरतलब है कि फिरोजपुर में पीजीआई का सैटेलाइट सेंटर बनने से आसपास की आबादी को अपने घर के नजदीक उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होगी।
490 करोड़ की यह योजना 2024 में पूरी होनी है। इस सेंटर में सभी विभागों के विशेषज्ञ परामर्श देंगे। ओपीडी संचालन के साथ 100 बेड के इनडोर की भी व्यवस्था होगी। पीजीआई के डीडीए कुमार गौरव ने बताया कि कार्यक्रम की स्वीकृति मिलने के बाद पंजाब प्रशासन के साथ बैठक कर कार्यक्रम की कार्ययोजना तैयार की जा रही है। पीजीआई के फिरोजपुर सैटेलाइट सेंटर को 2019 में स्वीकृति मिली थी। इसके बाद 2020 में भूमि अधिग्रहण कर उसकी बाउंड्री वॉल का कार्य पूरा करवाया जा चुका है। वहीं, पीजीआई ने इसके लिए कार्यदाई संस्था भी नामित कर दी है। कुमार गौरव ने बताया कि सेंटर के भवन निर्माण के बाद विशेषज्ञों की तैनाती भारत सरकार की ओर से की जाएगी।
गौरतलब है कि पीजीआई में प्रतिवर्ष इलाज के लिए आने वाले 25 लाख मरीजों में से सबसे ज्यादा पंजाब के मरीज होते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए ही फिरोजपुर सेंटर की कार्य योजना तैयार की गई थी, ताकि पीजीआई में मरीजों का दबाव कम करने के साथ उस क्षेत्र की आबादी को अपने आसपास बेहतर इलाज की सुविधा मिल सके।
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490 करोड़ की यह योजना 2024 में पूरी होनी है। इस सेंटर में सभी विभागों के विशेषज्ञ परामर्श देंगे। ओपीडी संचालन के साथ 100 बेड के इनडोर की भी व्यवस्था होगी। पीजीआई के डीडीए कुमार गौरव ने बताया कि कार्यक्रम की स्वीकृति मिलने के बाद पंजाब प्रशासन के साथ बैठक कर कार्यक्रम की कार्ययोजना तैयार की जा रही है। पीजीआई के फिरोजपुर सैटेलाइट सेंटर को 2019 में स्वीकृति मिली थी। इसके बाद 2020 में भूमि अधिग्रहण कर उसकी बाउंड्री वॉल का कार्य पूरा करवाया जा चुका है। वहीं, पीजीआई ने इसके लिए कार्यदाई संस्था भी नामित कर दी है। कुमार गौरव ने बताया कि सेंटर के भवन निर्माण के बाद विशेषज्ञों की तैनाती भारत सरकार की ओर से की जाएगी।
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गौरतलब है कि पीजीआई में प्रतिवर्ष इलाज के लिए आने वाले 25 लाख मरीजों में से सबसे ज्यादा पंजाब के मरीज होते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए ही फिरोजपुर सेंटर की कार्य योजना तैयार की गई थी, ताकि पीजीआई में मरीजों का दबाव कम करने के साथ उस क्षेत्र की आबादी को अपने आसपास बेहतर इलाज की सुविधा मिल सके।
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