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प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना ऐच्छिक, किसान बाध्य नहीं : केंद्र

Fri, 22 Dec 2023 06:45 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 22 Dec 2023 06:45 PM IST
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PM Crop Insurance Scheme is optional: Centre
-योजना के खिलाफ याचिका का हाईकोर्ट ने केंद्र की इस जानकारी पर किया निपटारा
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-गुरनाम सिंह व अन्य किसानों की याचिका 7 साल से थी विचाराधीन

अमर उजाला ब्यूरो

चंडीगढ़। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को किसानों पर जबरन लागू करने की दलील देते हुए दाखिल याचिका पर केंद्र सरकार ने यह स्पष्ट किया कि यह योजना ऐच्छिक है और किसान इसके लिए बाध्य नहीं हैं। इस जानकारी पर हाईकोर्ट ने 7 साल से विचाराधीन याचिका का निपटारा कर दिया। गुरनाम सिंह व अन्य किसानों की ओर से याचिका दाखिल करते हुए कहा गया कि भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने किसानों की फसल को होने वाले नुकसान को देखते हुए इसकी भरपाई के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के नाम से स्कीम आरंभ की थी। इस स्कीम को हरियाणा सरकार ने अपना लिया और लोन लेने वाले किसानों के लिए इसे अनिवार्य रूप से लागू कर दिया गया। इस स्कीम के तहत खरीफ की फसल के लिए 2 प्रतिशत और रबी की फसल के लिए 1.5 प्रतिशत बीमा किश्त रखी गई। वार्षिक फसल के लिए इसे 5 प्रतिशत रखा गया। इसके बाद आरबीआई ने 17 मार्च 2016 को नोटिफिकेशन निकाल कर इसके लिए बैंक अकाउंट अनिवार्य कर दिया। याची ने कहा कि केंद्र सरकार की यह स्कीम सीधे तैर पर किसानों के साथ लूट है। किसानों की ओर से एडवोकेट जेएस तूर ने कहा कि योजना को स्वीकार करना अनिवार्य नहीं है बावजूद इसके इसे अनिवार्य रूप से लागू किया जा रहा है।


इसके साथ ही याची ने बताया कि सरकार द्वारा हरियाणा में बीमा का लाभ देने के लिए केंद्र द्वारा मंजूरी प्राप्त 11 कंपनियों में से 3 का चयन किया गया और इसके लिए किसी भी निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहींं किया गया। सरकार द्वारा आरंभ की गई इस स्कीम के तहत इन तीनों कंपनियों ने सरकार और किसानों से मिलाकर 252.35 करोड़ रुपये वसूल किए और मुआवजे के रूप में केवल 20 करोड़ रुपये दिए गए। इस राशि में से 123.55 करोड़ किसानों से एकत्रित किया गया था, 83.54 करोड़ राज्य सरकार ने तथा 45.26 केंद्र सरकार ने भुगतान किया। याची ने कहा कि इस प्रकार बीमा कंपनियां मुनाफा कमा रही हैं जबकि किसानोंं की जेब काटी जा रही है।
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