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Highcourt: मलेरकोटला सरकारी अस्पताल में थर्ड पार्टी से सेवा की दलील, सरकार को फटकार, 24 मार्च तक जवाब तलब
Wed, 05 Mar 2025 03:35 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Wed, 05 Mar 2025 03:35 PM IST
सार
याचिकाकर्ता भीष्म किंगर ने हाईकोर्ट को बताया कि मालेरकोटला के सिविल अस्पताल में डॉक्टरों के 39 स्वीकृत पद हैं। सरकार क अनदेखी के चलते केवल 2 डॉक्टर अस्पताल में सेवा दे रहे हैं, बाकी पद खाली हैं। याची ने कोर्ट से आग्रह किया कि वो सरकार को यहां डॉक्टरों के खाली पद जल्द से जल्द भरने के आदेश दें।
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पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मालेरकोटला के जिला अस्पताल में डॉक्टरों की कमी (केवल दो) को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई थी। इस पर मुख्य सचिव ने हाईकोर्ट को बताया कि वहां अब कुल 26 डाॅक्टर हैं। 19 डाक्टरों की नियुक्ति की गई है और 5 का तबादला कर वहां भेजा गया है। एमआरआई व सिटी स्कैन के लिए थर्ड पार्टी की व्यवस्था की जा रही है।
इस पर हाईकोर्ट ने सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि सरकारी मशीनरी क्यों स्थापित नहीं की जा रही है। हाईकोर्ट ने 24 मार्च तक इस विषय पर जवाब दाखिल करने का सरकार को आदेश दिया है।
याचिकाकर्ता भीष्म किंगर ने हाईकोर्ट को बताया कि मालेरकोटला के सिविल अस्पताल में डॉक्टरों के 39 स्वीकृत पद हैं। सरकार क अनदेखी के चलते केवल 2 डॉक्टर अस्पताल में सेवा दे रहे हैं, बाकी पद खाली हैं। याची ने कोर्ट से आग्रह किया कि वो सरकार को यहां डॉक्टरों के खाली पद जल्द से जल्द भरने के आदेश दें ताकि आम लोगों को राहत मिल सके। याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब मालेरकोटला जिला बन चुका है तो यहां डॉक्टरों के पद भरे क्यों नहीं नहीं जा रहे हैं। कोर्ट ने सरकार को कहा कि यह आम लोगों की सेहत से जुड़ा मामला है, सरकार इसे गंभीरता से ले। सरकार ने बताया था कि डाक्टरों के 400 पदों पर भर्ती निकाली गई है और 225 ने ज्वाइन भी कर लिया है। याची ने बताया था कि एक भी डाक्टर को मलेरकोटला में नियुक्ति नहीं दी गई है।
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इस पर हाईकोर्ट ने सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि सरकारी मशीनरी क्यों स्थापित नहीं की जा रही है। हाईकोर्ट ने 24 मार्च तक इस विषय पर जवाब दाखिल करने का सरकार को आदेश दिया है।
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याचिकाकर्ता भीष्म किंगर ने हाईकोर्ट को बताया कि मालेरकोटला के सिविल अस्पताल में डॉक्टरों के 39 स्वीकृत पद हैं। सरकार क अनदेखी के चलते केवल 2 डॉक्टर अस्पताल में सेवा दे रहे हैं, बाकी पद खाली हैं। याची ने कोर्ट से आग्रह किया कि वो सरकार को यहां डॉक्टरों के खाली पद जल्द से जल्द भरने के आदेश दें ताकि आम लोगों को राहत मिल सके। याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब मालेरकोटला जिला बन चुका है तो यहां डॉक्टरों के पद भरे क्यों नहीं नहीं जा रहे हैं। कोर्ट ने सरकार को कहा कि यह आम लोगों की सेहत से जुड़ा मामला है, सरकार इसे गंभीरता से ले। सरकार ने बताया था कि डाक्टरों के 400 पदों पर भर्ती निकाली गई है और 225 ने ज्वाइन भी कर लिया है। याची ने बताया था कि एक भी डाक्टर को मलेरकोटला में नियुक्ति नहीं दी गई है।
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