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‘जहाज हवेली’ के नाम से मशहूर कोठी को बचाने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर, जानें मामला
Sat, 01 Feb 2020 12:06 PM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sat, 01 Feb 2020 12:06 PM IST
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जहाज हवेली
- फोटो : फाइल फोटो
माता गुजरी और दो साहिबजादों के अंतिम संस्कार के लिए जमीन को सोने की अशर्फियों से ढककर खरीदने वाले टोडरमल की हवेली बचाने के लिए हाईकोर्ट से गुहार लगाई गई है। याचिका पर जस्टिस राजीव शर्मा पर आधारित खंडपीठ ने पंजाब सरकार और एसजीपीसी को नोटिस जारी कर वहां हो रहे निर्माण पर यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए हैं।
याचिका दाखिल करते हुए एडवोकेट एचसी अरोड़ा ने बताया कि 17वीं शताब्दी में गुरु गोविंद सिंह की मां माता गूजरी और दो बेटे साहिबजादा जोरावर सिंह और फतेह सिंह के अंतिम संस्कार के लिए जमीन खरीदने केलिए टोडर मल ने दौलत लुटा दी थी। शर्त रखी गई थी कि जितनी जगह खरीदनी है, उस पर सोने के सिक्के खड़े करके रखने होंगे।
पंजाब के गवर्नर नवाब वजीर खान की कोर्ट में दीवान टोडरमल ने यह शर्त मंजूर की और सोने के सिक्कों से उस स्थान को भर दिया। इसके बाद उन्होंने तीनों के अंतिम संस्कार का इंतजाम किया। याची ने बताया कि माता गूजरी और दो साहिबजादों के अंतिम संस्क ार के लिए जिस टोडर मल ने इतना सब किया, आज उनकी हवेली जर्जर हालत में है।
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न तो हवेली की मालिक एसजीपीसी और न ही पंजाब सरकार उसके रखरखाव के लिए कोई काम कर रही हैं। यह भी बताया गया कि एसजीपीसी ने इस हवेली में निर्माण का कार्य भी आरंभ कर दिया है। याची ने हाईकोर्ट से अपील की कि इस ऐतिहासिक महत्व की इमारत को संरक्षित किया जाए और इसके जीर्णोद्घार के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने केनिर्देश जारी किए जाएं।
हाईकोर्ट ने इस याचिका पर पहले पंजाब सरकार और एसजीपीसी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। इसके बाद कोर्ट ने केस के महत्व को समझते हुए वकील को दोबारा बुलाया और फिर यहां किसी भी प्रकार के निर्माण पर यथास्थिति बनाए रखने के आदेश जारी किए।
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याचिका दाखिल करते हुए एडवोकेट एचसी अरोड़ा ने बताया कि 17वीं शताब्दी में गुरु गोविंद सिंह की मां माता गूजरी और दो बेटे साहिबजादा जोरावर सिंह और फतेह सिंह के अंतिम संस्कार के लिए जमीन खरीदने केलिए टोडर मल ने दौलत लुटा दी थी। शर्त रखी गई थी कि जितनी जगह खरीदनी है, उस पर सोने के सिक्के खड़े करके रखने होंगे।
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पंजाब के गवर्नर नवाब वजीर खान की कोर्ट में दीवान टोडरमल ने यह शर्त मंजूर की और सोने के सिक्कों से उस स्थान को भर दिया। इसके बाद उन्होंने तीनों के अंतिम संस्कार का इंतजाम किया। याची ने बताया कि माता गूजरी और दो साहिबजादों के अंतिम संस्क ार के लिए जिस टोडर मल ने इतना सब किया, आज उनकी हवेली जर्जर हालत में है।
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न तो हवेली की मालिक एसजीपीसी और न ही पंजाब सरकार उसके रखरखाव के लिए कोई काम कर रही हैं। यह भी बताया गया कि एसजीपीसी ने इस हवेली में निर्माण का कार्य भी आरंभ कर दिया है। याची ने हाईकोर्ट से अपील की कि इस ऐतिहासिक महत्व की इमारत को संरक्षित किया जाए और इसके जीर्णोद्घार के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने केनिर्देश जारी किए जाएं।
हाईकोर्ट ने इस याचिका पर पहले पंजाब सरकार और एसजीपीसी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। इसके बाद कोर्ट ने केस के महत्व को समझते हुए वकील को दोबारा बुलाया और फिर यहां किसी भी प्रकार के निर्माण पर यथास्थिति बनाए रखने के आदेश जारी किए।