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‘जी आया साहब’ में झलका बाल मजदूरों का दर्द
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 28 Dec 2013 01:13 PM IST
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अलंकार थिएटर ग्रुप ने चंडीगढ़ के टैगोर थिएटर में नाट्य उत्सव के अंतिम दिन दो नाटकों का मंचन किया। दोनों नाटकों से समाज में फैली कुरीतियों को दर्शाया गया।
जी आया साहब नाटक में बाल मजूदरी और इसके बुरे परिणाम दिखाए गए तो सुखिया नाटक में समाज में की ऊंच-नींच को दिखाया।
‘जी आया साहब’
यह नाटक बाल मजदूरी पर आधारित है। शहादत हसन मंटो की कहानी पर आधारित नाटक को अलंकार थिएटर ग्रुप के बच्चों ने निर्देशित किया था।
यह कहानी कासिम की है जो पुलिसवाले के घर में काम करता है। उसकी बीबी घर में रहती है और बच्चे को आराम नहीं मिल पाता है।
वह दिन रात काम करता है और सुबह चार बजे फिर उठ जाता है। वह नींद के लिए तड़पता रहता है। एक दिन अचानक उसका हाथ कट जाता है और उसको मालकिन से गालियां सुनाई देती हैं। उसको इससे आराम मिल जाता है।
हाथ काटना उसकी आदत बन जाती है। चाकू न मिलने पर उसने ब्लेड से काट लिया और मौत हो गई।
पात्र:-रमन पांचाल, ज्योति, साहिल, अरविंद, भूपराज, दीपचंद, विष्णुमाया, पूजा, संदीप, गौरव
‘सुखिया’
मुंशी प्रेमचंद की कहानी पर आधारित ‘सुखिया’ नाटक में एक दलित महिला की जद्दोजहद दिखाई है। औरत का पति मर गया है और बच्चा बीमार है।
औरत का पति एक दिन उसके सपने में आता है। वह उससे मंदिर में जाने को कहता है। औरत की मुश्किल होती है कि किस तरह से वह मंदिर में जाए।
वह दलित है और लोग उसे मंदिर में जाने नहीं देंगे। अपने प्रयास से बेटे की खातिर वह मंदिर की सीढ़ियां चढ़ जाती है पर उसका बच्चा मर जाता है।
अलंकार थिएटर ग्रुप द्वारा आयोजित इस नाटक के माध्यम से दिखाया गया है कि किस तरह से कुरीतियां समाज पर हावी हैं।
पात्र:-ज्योति, शीला, जस्सी, लखविंदर, करण अरोड़ा, अभिषेक पूनिया, प्रोमिला थापा, नितिन शर्मा, बसंत, अजय
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जी आया साहब नाटक में बाल मजूदरी और इसके बुरे परिणाम दिखाए गए तो सुखिया नाटक में समाज में की ऊंच-नींच को दिखाया।
‘जी आया साहब’
यह नाटक बाल मजदूरी पर आधारित है। शहादत हसन मंटो की कहानी पर आधारित नाटक को अलंकार थिएटर ग्रुप के बच्चों ने निर्देशित किया था।
यह कहानी कासिम की है जो पुलिसवाले के घर में काम करता है। उसकी बीबी घर में रहती है और बच्चे को आराम नहीं मिल पाता है।
वह दिन रात काम करता है और सुबह चार बजे फिर उठ जाता है। वह नींद के लिए तड़पता रहता है। एक दिन अचानक उसका हाथ कट जाता है और उसको मालकिन से गालियां सुनाई देती हैं। उसको इससे आराम मिल जाता है।
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हाथ काटना उसकी आदत बन जाती है। चाकू न मिलने पर उसने ब्लेड से काट लिया और मौत हो गई।
पात्र:-रमन पांचाल, ज्योति, साहिल, अरविंद, भूपराज, दीपचंद, विष्णुमाया, पूजा, संदीप, गौरव
‘सुखिया’
मुंशी प्रेमचंद की कहानी पर आधारित ‘सुखिया’ नाटक में एक दलित महिला की जद्दोजहद दिखाई है। औरत का पति मर गया है और बच्चा बीमार है।
औरत का पति एक दिन उसके सपने में आता है। वह उससे मंदिर में जाने को कहता है। औरत की मुश्किल होती है कि किस तरह से वह मंदिर में जाए।
वह दलित है और लोग उसे मंदिर में जाने नहीं देंगे। अपने प्रयास से बेटे की खातिर वह मंदिर की सीढ़ियां चढ़ जाती है पर उसका बच्चा मर जाता है।
अलंकार थिएटर ग्रुप द्वारा आयोजित इस नाटक के माध्यम से दिखाया गया है कि किस तरह से कुरीतियां समाज पर हावी हैं।
पात्र:-ज्योति, शीला, जस्सी, लखविंदर, करण अरोड़ा, अभिषेक पूनिया, प्रोमिला थापा, नितिन शर्मा, बसंत, अजय