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'कुछ इंसानों को जगाने के लिए कुत्ता बनना पड़ता है'
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 20 Apr 2014 12:15 AM IST
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पंजाब कला भवन के ओपन एयर थिएटर में शनिवार को नाटक बारह सो छब्बीस बाट सात का मंचन किया गया, जिसमें करप्शन जैसे विषय पर युवा निर्देशक सरवर अली और अमित सनोरिया ने अच्छा प्रयास किया।
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नाटक की शुरुआत जापानी लोकनृत्य काबुकी से हुई जिसमें काले कपड़े पहने कलाकार मंच पर नृत्य करने लगे, जिसमें धीमी चाल से नाटक के बारे में अवगत करवाया गया। नृत्य के बाद एक ऑफिस का दृश्य बनाया गया।
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छब्बीस बटा सात की जो एक फाइल है और यह एक ऐसे इंसान की फाइल है जिसे देश के लिए अच्छे कार्य करने पर एक प्लॉट दिया जाता है, लेकिन दिक्कत तब शुरू होती है जब उसका यह प्लॉट सिर्फ फाइल में ही दब कर रह जाता है। युवक अपनी फाइल के लिए इतना भटकता है कि उसका नाम ही बारह सो छब्बीस पड़ जाता है और अंत में वह ऑफिस में धमकी देता है कि या तो उसकी फाइल आज साइन होगी या वह यहां अपने पूरे कपड़े उतार कर प्रदर्शन करेगा। इस से डर ऑफिस का मैनेजर उसे अपने केबिन में बुला कर उसकी फाइल कुछ क्षण में ही साइन करके उसे दे देता है अंत में युवक कहता है की कुछ इंसानों को जगाने के लिए इंसान से कुत्ता बनना ही पड़ता है।
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