दो बार मुआवजा लेने का आरोप: पंजाब के खेल मंत्री के खिलाफ सीबीआई जांच की मांग, हाईकोर्ट में जनहित याचिका
आरोप है कि खेल मंत्री राणा गुरमीत सोढ़ी ने 2000 में तथ्यों को छिपा कर निचली अदालत में याचिका दायर कर दी और कहा कि बिना जमीन का अधिग्रहण किए और मुआवजा दिए उनकी जमीन पर सड़क बना दी है। इसलिए उन्हें उनकी जमीन वापस की जाए या उचित मुआवजा दिया जाए। 2007 में फैसला उनके पक्ष में आ गया। सरकार ने 2012 में दोबारा इसी जमीन का अधिग्रहण कर 1,83,59,250 मुआवजा जारी कर दिया। इस तरह एक ही जमीन का दो बार अधिग्रहण कर मुआवजा ले लिया गया।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पंजाब के खेल मंत्री राणा गुरमीत सोढ़ी पर उनकी गुरु हरसहाय की जमीन का दो बार अधिग्रहण करवा दोहरा मुआवजा लेने का आरोप लगाते हुए मामले की सीबीआई जांच की पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से मांग की है। याचिका पर सुनवाई से जस्टिस अरुण पल्ली ने खुद को अलग कर लिया, जिसके चलते अब नई बेंच गठित की जाएगी।
रूपनगर के दिनेश चड्ढा, सुरिंदर पाल सिंह और कमल सिंह ने एडवोकेट समीर सचदेवा के माध्यम से हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की है। उन्होंने सोढ़ी पर आपराधिक मुकदमा दर्ज करने और मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की अपील की है। याची ने बताया कि पंजाब सरकार ने 1962 में फिरोजपुर से फाजिल्का के लिए सड़क निर्माण के लिए राणा गुरमीत सोढ़ी और उनके परिवार की 12 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया था, जिसका मुआवजा 1963 में दे दिया गया।
यहां पर सड़क बना भी दी गई थी। राणा गुरमीत सोढ़ी ने 2000 में इन सभी तथ्यों को छिपा कर निचली अदालत में याचिका दायर कर दी और कहा कि बिना जमीन का अधिग्रहण किए और मुआवजा दिए उनकी जमीन पर सड़क बना दी है। इसलिए उन्हें उनकी जमीन वापस की जाए या उचित मुआवजा दिया जाए। 2007 में फैसला उनके पक्ष में आ गया।
समिति की जांच में सभी आरोप साबित हुए
याचिका में आरोप लगाया गया कि सरकार ने इस फैसले के खिलाफ बेमन से अपील की, उस पर राणा गुरमीत सिंह सोढ़ी के पक्ष में फैसला आ गया। इसके बाद सरकार ने 2012 में दोबारा इसी जमीन का अधिग्रहण कर 1,83,59,250 मुआवजा जारी कर दिया। इस तरह एक ही जमीन का दो बार अधिग्रहण कर मुआवजा ले लिया गया।
यह मामला सामने आने के बाद सरकार पर दबाव बना तो सरकार ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में समिति गठित कर जांच करवाई, जिसमे सामने आ गया कि एक ही जमीन का दो बार अधिग्रहण कर मुआवजा लिया गया।
इतना ही नहीं, पंजाब सरकार ने इसे स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट में हलफनामा भी दे दिया था। इसके बावजूद अभी तक सरकार ने अपने ही मंत्री के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है। तीनों याचिकाकर्ताओं ने इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा है कि यह व्यापक जनहित से जुड़ा मामला है और ऐसे में इस मामले की सीबीआई से जांच बेहद जरूरी है।