{"_id":"5f625aab8ebc3e7b5e3f9ddb","slug":"phone-number-appear-pgi-patients-condition-deteriorating-chandigarh-news-pkl388092188","type":"story","status":"publish","title_hn":"पीजीआई में फोन नंबर लगता ही नहीं, बिगड़ रही मरीजों की हालत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पीजीआई में फोन नंबर लगता ही नहीं, बिगड़ रही मरीजों की हालत
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चंडीगढ़। कोरोना के कारण अस्पतालों की बंद हुई ओपीडी से परेशान मरीजों को राहत देने के लिए शुरू की गई टेलीकंसल्टेशन सर्विस का भी कोई खास लाभ नहीं मिल रहा है। पीजीआई द्वारा संचालित टेलीकंसल्टेशन सर्विस में लगातार मरीजों की बढ़ती संख्या के कारण ज्यादातर मरीजों की कॉल नहीं लग पा रही है। इसके कारण मरीज अपना पंजीकरण तक नहीं करा पा रहे हैं। ऐसी स्थिति में सैकड़ों मरीज अपना नंबर आने का हफ्तों से इंतजार कर रहे हैं। मरीजों का कहना है कि ओपीडी बंद होने के कारण हजारों मरीजों का इलाज बाधित है। ऐसी स्थिति में अगर टेलीकंसल्टेशन सर्विस का संचालन किया जा रहा है तो उसके टेलीफोन नंबरों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए, जिससे कॉल करने पर मरीज को ज्यादा परेशान न होना पड़े।
27 अगस्त से लगा रहा हूं कॉल
चंडीगढ़ निवासी सुरेश मौर्य ने बताया कि वह बीते 27 अगस्त से लगातार पीजीआई के एडवांस आई सेंटर के टेलीकंसल्टेशन नंबर पर कॉल कर रहे हैं लेकिन उनका नंबर नहीं लग पा रहा। सुरेश ने बताया कि उनकी मां का पिछले 2 सालों से पीजीआई में इलाज चल रहा है। कोरोना के कारण ओपीडी सेवा बंद होने से फॉलोअप की प्रक्रिया बाधित हो गई है। फरवरी में दिखाने पर डॉक्टर ने बताया था कि उनकी दवाइयां बदलनी होंगी लेकिन उसके बाद से डॉक्टर से कोई संपर्क नहीं हो पाया है। मजबूरन उन्हें अब भी वही दवाएं दी जा रही हैं। सुरेश का कहना है कि मरीजों की परेशानी को ध्यान में रखते हुए पीजीआई प्रशासन को टेलीकंसल्टेशन सर्विस को और विस्तारित करना चाहिए ताकि मरीजों को समय पर सही परामर्श मिल सके।
कर्मचारियों के लिए अलग नम्बर
टेलीकंसल्टेशन सर्विस के नंबर पर समय पर कॉल न लगने की समस्या के कारण ही पीजीआई के कर्मचारियों ने डायरेक्टर से अनुरोध करके अपने लिए एक अलग नंबर की सुविधा शुरू कराई है। कर्मचारियों का कहना है कि पंजीकरण के लिए तय किए गए डेढ़ घंटे के समय में कॉल की संख्या इतनी ज्यादा होती है कि जारी किए गए सभी नंबर व्यस्त बताए जाते हैं। ऐसी स्थिति में अगर गंभीर मरीज के इलाज के लिए टेलीकंसल्टेशन सर्विस पर निर्भर रह गया तो जान जोखिम में पड़ सकती है।
विज्ञापन
टेलीकंसल्टेशन सर्विस के जरिए प्रतिदिन 2000 मरीजों को इलाज मिल रहा है। ओपीडी सेवा बंद होने के कारण मरीजों की संख्या दिनों दिन बढ़ती जा रही है। सुविधाओं के विस्तार के लिए कार्य योजना तैयार की जा रही है। जल्द ही इस समस्या का समाधान हो जाएगा।
-डॉ. अशोक कुमार, प्रवक्ता, पीजीआई
विज्ञापन
27 अगस्त से लगा रहा हूं कॉल
चंडीगढ़ निवासी सुरेश मौर्य ने बताया कि वह बीते 27 अगस्त से लगातार पीजीआई के एडवांस आई सेंटर के टेलीकंसल्टेशन नंबर पर कॉल कर रहे हैं लेकिन उनका नंबर नहीं लग पा रहा। सुरेश ने बताया कि उनकी मां का पिछले 2 सालों से पीजीआई में इलाज चल रहा है। कोरोना के कारण ओपीडी सेवा बंद होने से फॉलोअप की प्रक्रिया बाधित हो गई है। फरवरी में दिखाने पर डॉक्टर ने बताया था कि उनकी दवाइयां बदलनी होंगी लेकिन उसके बाद से डॉक्टर से कोई संपर्क नहीं हो पाया है। मजबूरन उन्हें अब भी वही दवाएं दी जा रही हैं। सुरेश का कहना है कि मरीजों की परेशानी को ध्यान में रखते हुए पीजीआई प्रशासन को टेलीकंसल्टेशन सर्विस को और विस्तारित करना चाहिए ताकि मरीजों को समय पर सही परामर्श मिल सके।
विज्ञापन
कर्मचारियों के लिए अलग नम्बर
टेलीकंसल्टेशन सर्विस के नंबर पर समय पर कॉल न लगने की समस्या के कारण ही पीजीआई के कर्मचारियों ने डायरेक्टर से अनुरोध करके अपने लिए एक अलग नंबर की सुविधा शुरू कराई है। कर्मचारियों का कहना है कि पंजीकरण के लिए तय किए गए डेढ़ घंटे के समय में कॉल की संख्या इतनी ज्यादा होती है कि जारी किए गए सभी नंबर व्यस्त बताए जाते हैं। ऐसी स्थिति में अगर गंभीर मरीज के इलाज के लिए टेलीकंसल्टेशन सर्विस पर निर्भर रह गया तो जान जोखिम में पड़ सकती है।
विज्ञापन
टेलीकंसल्टेशन सर्विस के जरिए प्रतिदिन 2000 मरीजों को इलाज मिल रहा है। ओपीडी सेवा बंद होने के कारण मरीजों की संख्या दिनों दिन बढ़ती जा रही है। सुविधाओं के विस्तार के लिए कार्य योजना तैयार की जा रही है। जल्द ही इस समस्या का समाधान हो जाएगा।
-डॉ. अशोक कुमार, प्रवक्ता, पीजीआई