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पीयू प्रशासन ने पीएचडी वाइवा में देरी का मांगा रिकॉर्ड

Sat, 26 Apr 2014 11:51 AM IST
अमर उजाला चंडीगढ़
अमर उजाला चंडीगढ़ Updated Sat, 26 Apr 2014 11:51 AM IST
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PhD viva records sought by departments on delay

पंजाब यूनिवर्सिटी प्रशासन ने पीएचडी थीसिस जमा होने के बाद वाइवा में एक साल से अधिक समय लगने के मामले को गंभीरता से लिया है। पीयू के आला अधिकारियों की इस संबंध में शुक्रवार को महत्वपूर्ण बैठक हुई। इसमें पूरे मामले की गहनता से जांच कराए जाने की बात उठी।

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पीयू डीयूआई और रजिस्ट्रार प्रो. एके भंडारी ने छह महीने से अधिक समय से वाइवा के लिए लटके सभी पीएचडी केस की जानकारी विभागों से मांगी। उन्होंने सभी विभागों को हफ्ते भर के अंदर एग्जामिनर द्वारा रिपोर्ट नहीं भेजे जाने का कारण बताने के लिए कहा है।
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गौरतलब है कि अमर उजाला ने 24 अप्रैल के अंक में ‘पीएचडी की थीसिस रिपोर्ट एक साल में’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। इसमें कई विद्यार्थियों की पीएचडी डिग्री थीसिस जमा होने के एक साल बाद भी वाइवा न होने को प्रमुखता से उठाया था। आला अधिकारियों द्वारा विभागों से पीएचडी मामलों की जानकारी मांगे जाने की खबर के बाद संबंधित अधिकारियों की भागदौड़ शुरू हुई।
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उधर, इस मामले में पीयू सीनेटर डॉ. दलीप कुमार ने कहा कि साल भर तक किसी स्टूडेंट का वाइवा नहीं करवाना विभाग की लापरवाही है। इस मुद्दे को सिंडीकेट में उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि पीएचडी थीसिस जमा होने से वाइवा तक का पूरा शेड्यूल नए सिरे से तैयार किया जाना चाहिए, जिससे विद्यार्थियों को परेशानी न हो।

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