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Chandigarh News: पीजीआई का सारथी बना मरीजों का सहारा, सेवा को मिला सम्मान
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चंडीगढ़। बड़े अस्पतालों के उलझे गलियारों में जब मरीज और उनके परिजन खुद को असहाय महसूस करते हैं, तब कुछ युवा चुपचाप उनका हाथ थाम लेते हैं और उनकी मदद करते हैं। पीजीआई का सारथी ऐसा ही एक मानवीय प्रयास बनकर उभरा है, जिसने इलाज के साथ-साथ भरोसा और सहारा भी दिया है।
पीजीआई में सारथी दिवस का दूसरा वार्षिक आयोजन मंगलवार को हुआ। इस पहल के दो साल पूरे होने पर उन युवाओं को सम्मानित किया गया, जिन्होंने मरीजों और उनके परिजनों की राह आसान बनाने में अहम भूमिका निभाई।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि चंडीगढ़ प्रशासन के मुख्य सचिव एच. राजेश प्रसाद ने कहा कि सारथी सहानुभूति, करुणा, सामाजिक जिम्मेदारी और अनुभवात्मक सीख का अनूठा संगम है। उन्होंने कहा कि बड़े अस्पतालों में व्यवस्था समझना आसान नहीं होता, ऐसे में ये युवा सच्चे सारथी बनकर मरीजों को सम्मान और सहारे के साथ मार्ग दिखाते हैं।
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पीजीआई निदेशक प्रो. विवेक लाल ने कहा कि संस्थान केवल इमारतों से नहीं, बल्कि मूल्यों और सेवा भावना से बनते हैं। उन्होंने वॉलंटियर्स को ब्रेवहार्ट्स बताते हुए कहा कि ये युवा केवल मदद नहीं कर रहे, बल्कि इंसानियत को जीना सीख रहे हैं। उपनिदेशक (प्रशासन) पंकज राय के अनुसार, 2000 से अधिक छात्र 1.24 लाख घंटे सेवा दे चुके हैं, जिससे लाखों मरीजों को लाभ मिला है। कार्यक्रम में 25 संस्थानों और समर्पित वॉलंटियर्स को सम्मानित किया गया।
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पीजीआई में सारथी दिवस का दूसरा वार्षिक आयोजन मंगलवार को हुआ। इस पहल के दो साल पूरे होने पर उन युवाओं को सम्मानित किया गया, जिन्होंने मरीजों और उनके परिजनों की राह आसान बनाने में अहम भूमिका निभाई।
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कार्यक्रम के मुख्य अतिथि चंडीगढ़ प्रशासन के मुख्य सचिव एच. राजेश प्रसाद ने कहा कि सारथी सहानुभूति, करुणा, सामाजिक जिम्मेदारी और अनुभवात्मक सीख का अनूठा संगम है। उन्होंने कहा कि बड़े अस्पतालों में व्यवस्था समझना आसान नहीं होता, ऐसे में ये युवा सच्चे सारथी बनकर मरीजों को सम्मान और सहारे के साथ मार्ग दिखाते हैं।
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पीजीआई निदेशक प्रो. विवेक लाल ने कहा कि संस्थान केवल इमारतों से नहीं, बल्कि मूल्यों और सेवा भावना से बनते हैं। उन्होंने वॉलंटियर्स को ब्रेवहार्ट्स बताते हुए कहा कि ये युवा केवल मदद नहीं कर रहे, बल्कि इंसानियत को जीना सीख रहे हैं। उपनिदेशक (प्रशासन) पंकज राय के अनुसार, 2000 से अधिक छात्र 1.24 लाख घंटे सेवा दे चुके हैं, जिससे लाखों मरीजों को लाभ मिला है। कार्यक्रम में 25 संस्थानों और समर्पित वॉलंटियर्स को सम्मानित किया गया।