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Chandigarh News: विश्वस्तरीय होने जा रहा पीजीआई का बोन बैंक, मरीजों को मिलेगी उच्चस्तरीय सुविधा

Wed, 31 Jul 2024 07:24 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 31 Jul 2024 07:24 AM IST
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PGI's bone bank is going to be world class, patients will get high level facilities
चंडीगढ़। पीजीआई के बोन बैंक को विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस करने की तैयारी चल रही है। संस्थान के लगभग 20 वर्ष पुराने बोन बैंक में जल्द बोन के साथ कार्टिलेज का भी उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा। बोन बैंक में हड्डी को प्रिजर्व करने के लिए अब फार्मेलीन के बजाय अत्याधुनिक डीप फ्रिजर का उपयोग किया जा रहा है। जहां माइनस 80 डिग्री सेल्सियस पर हड्डियों को संरक्षित किया जा रहा है ताकि उसकी गुणवत्ता पर असर न पड़े। वहीं, प्रिजर्वेशन के दौरान हर दो से तीन हफ्ते में बोन का कल्चर भी कराया जा रहा है ताकि उसमें कोई संक्रमण न उत्पन्न हो सके।
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पीजीआई के हड्डी रोग विभाग के प्रमुख डाॅ. आदित्य अग्रवाल ने बताया कि मौजूदा समय में महीनेभर में 50 से 60 बोन प्रिजर्व किए जा रहे हैं। इस अनुपात में लगभग 20 से 25 मरीजों को लाभ दिया जा रहा है। डॉ. आदित्य ने बताया कि पहले रसायनिक घोल में हड्डी को प्रिजर्व किया जाता था, जिसमें गुणवत्ता प्रभावित होने का खतरा रहता था लेकिन डीप फ्रीजर में तय मानक के अनुसार हड्डियों को प्रिजर्व किया जा रहा है। इसके लिए डीप फ्रिजर की संख्या बढ़ाने की योजना तैयार की गई है। डॉ. आदित्य ने बताया कि अंगदान की तरह हड्डी दान भी बहुत जरूरी है क्योंकि कई बीमारियों में मरीजों को हड्डी प्रत्यारोपित करने की जरूरत होती है इसलिए इसे लेकर जागरूकता की जरूरत है। बोन को माइनस 80 डिग्री सेल्सियस पर स्टोर किया जा सकता है। दान में मिली हड्डी की शेल्फ लाइफ पांच साल होती है। डॉ. आदित्य ने बताया कि हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी के मामले में जीवित दाताओं की ओर से अस्थि बैंक को हड्डियां दान की जाती हैं। ये वह अतिरिक्त हड्डी होती है जिसे आमतौर पर सर्जरी के दौरान हटा दिया जाता है। उसे बचाया जाता है फिर उसका परीक्षण किया जाता है। मानक के अनुसार रिपोर्ट आने पर उसे प्रत्यारोपण के लिए संग्रहित किया जाता है। कई लोग हिप रिप्लेसमेंट करवाते हैं, लेकिन कभी-कभी ये खराब हो जाते हैं और इन्हें बदलने की ज़रूरत होती है। इन संशोधन ऑपरेशनों के दौरान दान की गई हड्डी के छोटे टुकड़ों का उस सर्जरी में उपयोग किया जाता है। ठीक ऐसे ही ट्रॉमा केस या शरीर के किसी अंग की हड्डी में सर्जरी के दौरान गैप आने पर बोन बैंक से हड्डी लेकर उसका ड्राफ्ट लगाया जाता है।
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