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Chandigarh News: पीजीआई ने त्वचा रोग की दवा नियासिनमाइड से किया किडनी की बीमारी का इलाज
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चंडीगढ़। पीजीआई के विशेषज्ञों ने एक्यूट किडनी डिजीज के मरीजों पर त्वचा रोग के इलाज में दी जाने वाली दवा नियासिनमाइड से खराब किडनी को तेजी से ठीक करने में सफलता हासिल की है। पीजीआई के नेफ्रोलॉजी विभाग में किए गए शोध के दौरान विशेषज्ञों ने एक्यूट किडनी डिजीज के 50 मरीजों को दो वर्गों में बांट कर इस दवा के प्रभाव का आकलन किया। इस पायलट क्लीनिकल ट्रायल में मरीजों को दो वर्ग में बांटकर एक वर्ग के मरीजों को यह दवा दी गई और दूसरे वर्ग में शामिल मरीजों को उनकी स्थिति के आधार पर अलग-अलग इलाज दिया गया। विश्लेषण में मिला कि जिन मरीजों को यह दवा दी गई, उनमें सामान्य वर्ग में शामिल मरीजों की तुलना मेंकिडनी की रिकवरी तेजी से हई। इसे विदेशों में भी सराहा गया है।
नेफ्रोलॉजी विभाग के डॉ. विवेक कुमार ने बताया कि पीएचडी की छात्रा जसकिरण कौर और नेफ्रोलॉजी विभाग के डॉ. साहिल गर्ग के साथ मिलकर उन्होंने प्रो. एचएस कोहली के मार्गदर्शन में यह शोध पूरा किया। इसमें मरीज को 14 दिन तक दिन में दो बार नियासिनमाइड की खुराक दी गई। वहीं, तीन महीने के बाद दोनों वर्गों में शामिल मरीजों के किडनी का आकलन किया गया। इसमें नियासिनमाइड लेने वाले मरीजों की किडनी दूसरे वर्ग में शामिल मरीजों की किडनी से बेहतर पाई गई। डॉ. विवेक ने बताया कि इस ट्रायल के पहले जानवर और मनुष्य पर इस दवा के परिणाम को लेकर शोध किए गए हैं लेकिन उसे लेकर कोई पायलट क्लीनिकल ट्रायल नहीं किया गया था। इस कारण एक्यूट किडनी डिजीज के मरीज के इलाज के लिए अब तक कोई ऐसी दवा उपलब्ध नहीं थी, जिससे उनके किडनी रोग की रिकवरी को तेज किया जा सके। पीजीआई ने निर्णय लिया कि इस दवा का पायलट क्लीनिकल ट्रायल किया जाएगा। 50 मरीजों पर किए गए क्लीनिकल ट्रायल में सफलता मिलने के बाद अब इसका विस्तृत ट्रायल करने की तैयारी है, ताकि इस दवा का उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।
बॉक्स
एक्यूट किडनी इंजरी में ये होता है
एक्यूट किडनी इंजरी एक घातक बीमारी है, जिसे पहले एक्यूट रीनल फेलियर के रूप में जाना जाता था। यह किडनी के कार्य में तेज़ी से कमी करता है। एक्यूट किडनी इंजरी एक संभावित घातक विकार है जो किसी भी उम्र के लोगों को प्रभावित कर सकता है। अगर इसकी सही पहचान और इलाज नहीं किया जाता है तो यह काफी अस्वस्थता और मृत्यु दर का कारण बन सकता है।
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एक्यूट किडनी इंजरी के तीन मुख्य प्रकार हैं-
रीनल एक्यूट किडनी इंजरीइस रूप में किडनी का रक्त प्रवाह कम हो जाता है, जिसके परिणामस्वरूप (AKI) होता है। डिहाइड्रेशन, अधिक ब्लीडिंग, हृदय गति रुकना, या गंभीर संक्रमण जिससे रक्त की मात्रा कम हो जाती है या रक्तचाप इसका कारण बन सकता है।
इन्ट्रिंसिक एक्यूट किडनी इंजरीइसमें किडनी के टिश्यू को नुकसान पहुंचता है। उदाहरण, एक्यूट ट्यूबलर नेक्रोसिस (ATN), अक्सर लंबे समय तक कम रक्त प्रवाह या दवाओं, डाई या विशेष पोइज़न किडनी इंजरी का परिणाम होता है, यह एक बीमारी है जो (AKI) का कारण बन सकती है।
पोस्टरीनल एक्यूट किडनी इंजरी: इनमें ऐसी स्थिति शामिल हैं जो यूरिन फ्लो में रुकावट पैदा करती हैं। सभी AKI मामलों में पोस्टरीनल कारण सिर्फ 5 से 10 प्रतिशत हैं।
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नेफ्रोलॉजी विभाग के डॉ. विवेक कुमार ने बताया कि पीएचडी की छात्रा जसकिरण कौर और नेफ्रोलॉजी विभाग के डॉ. साहिल गर्ग के साथ मिलकर उन्होंने प्रो. एचएस कोहली के मार्गदर्शन में यह शोध पूरा किया। इसमें मरीज को 14 दिन तक दिन में दो बार नियासिनमाइड की खुराक दी गई। वहीं, तीन महीने के बाद दोनों वर्गों में शामिल मरीजों के किडनी का आकलन किया गया। इसमें नियासिनमाइड लेने वाले मरीजों की किडनी दूसरे वर्ग में शामिल मरीजों की किडनी से बेहतर पाई गई। डॉ. विवेक ने बताया कि इस ट्रायल के पहले जानवर और मनुष्य पर इस दवा के परिणाम को लेकर शोध किए गए हैं लेकिन उसे लेकर कोई पायलट क्लीनिकल ट्रायल नहीं किया गया था। इस कारण एक्यूट किडनी डिजीज के मरीज के इलाज के लिए अब तक कोई ऐसी दवा उपलब्ध नहीं थी, जिससे उनके किडनी रोग की रिकवरी को तेज किया जा सके। पीजीआई ने निर्णय लिया कि इस दवा का पायलट क्लीनिकल ट्रायल किया जाएगा। 50 मरीजों पर किए गए क्लीनिकल ट्रायल में सफलता मिलने के बाद अब इसका विस्तृत ट्रायल करने की तैयारी है, ताकि इस दवा का उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।
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एक्यूट किडनी इंजरी में ये होता है
एक्यूट किडनी इंजरी एक घातक बीमारी है, जिसे पहले एक्यूट रीनल फेलियर के रूप में जाना जाता था। यह किडनी के कार्य में तेज़ी से कमी करता है। एक्यूट किडनी इंजरी एक संभावित घातक विकार है जो किसी भी उम्र के लोगों को प्रभावित कर सकता है। अगर इसकी सही पहचान और इलाज नहीं किया जाता है तो यह काफी अस्वस्थता और मृत्यु दर का कारण बन सकता है।
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एक्यूट किडनी इंजरी के तीन मुख्य प्रकार हैं-
रीनल एक्यूट किडनी इंजरीइस रूप में किडनी का रक्त प्रवाह कम हो जाता है, जिसके परिणामस्वरूप (AKI) होता है। डिहाइड्रेशन, अधिक ब्लीडिंग, हृदय गति रुकना, या गंभीर संक्रमण जिससे रक्त की मात्रा कम हो जाती है या रक्तचाप इसका कारण बन सकता है।
इन्ट्रिंसिक एक्यूट किडनी इंजरीइसमें किडनी के टिश्यू को नुकसान पहुंचता है। उदाहरण, एक्यूट ट्यूबलर नेक्रोसिस (ATN), अक्सर लंबे समय तक कम रक्त प्रवाह या दवाओं, डाई या विशेष पोइज़न किडनी इंजरी का परिणाम होता है, यह एक बीमारी है जो (AKI) का कारण बन सकती है।
पोस्टरीनल एक्यूट किडनी इंजरी: इनमें ऐसी स्थिति शामिल हैं जो यूरिन फ्लो में रुकावट पैदा करती हैं। सभी AKI मामलों में पोस्टरीनल कारण सिर्फ 5 से 10 प्रतिशत हैं।