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राजनीति में कद रखने जा रहे हैं पीजीआई के एक और प्रोफेसर, विधानसभा चुनाव 2019 में आजमाएंगे किस्मत
Wed, 26 Jun 2019 12:03 PM IST
खुशबू गोयल
विकास सैनी, अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
विकास सैनी, अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 26 Jun 2019 12:03 PM IST
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प्रोफेसर संजय जोहर
- फोटो : फाइल फोटो
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हरियाणा में विधानसभा चुनाव को लेकर माहौल गर्माने लगा है। सत्ताधारी भाजपा से लेकर अन्य सभी राजनीतिक दल चुनाव को लेकर सक्रिय हो गए हैं। वहीं, प्रदेश का सबसे बड़ा चिकित्सा संस्थान पीजीआई भी पीछे नहीं है। संस्थान के एनेस्थीसिया विभाग के प्रो. संजय जोहर ने विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए संस्थान प्रशासन से अनुमति मांगी थी, जिसे हेल्थ यूनिवर्सिटी के वीसी प्रो. ओपी कालरा ने इसे स्वीकृति दे दी है।
आदमपुर से लड़ना है चुनाव
हिसार के लांधड़ी गांव में जन्मे एनेस्थीसियालॉजिस्ट प्रो. संजय जोहर विधानसभा चुनाव में भाग्य आजमाना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि इसके लिए इलाके के लोगों ने उनसे आग्रह किया है। इस सीट पर पहले उनके नाना चौधरी मनीराम गोदारा चुनाव लड़ चुके हैं। वे बंसीलाल की सरकार में मंत्री भी रहे हैं। बता दें कि आदमपुर पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल का गढ़ रहा है। फिलहाल वहां से उनके पुत्र एवं कांग्रेस नेता कुलदीप बिश्नोई विधायक हैं।
टिकट के लिए सियासी दांवपेंच शुरू
हरियाणा की राजनीतिक का केंद्र कहे जाने वाले रोहतक में सियासी दांवपेंच लड़ने शुरू हो गए हैं। राजनीति में अपने भविष्य को लेकर लोग एक पार्टी छोड़ दूसरी का दामन थामने लगे हैं। विधानसभा चुनाव में टिकटों को लेकर भी कयास लगाने लगे हैं। कांग्रेस की पूर्व निगम मेयर, जजपा जिला अध्यक्ष व अन्य लोगों के दूसरी नाव में सवार होने को इसी से जोड़ कर देखा जा रहा है।
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आदमपुर से लड़ना है चुनाव
हिसार के लांधड़ी गांव में जन्मे एनेस्थीसियालॉजिस्ट प्रो. संजय जोहर विधानसभा चुनाव में भाग्य आजमाना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि इसके लिए इलाके के लोगों ने उनसे आग्रह किया है। इस सीट पर पहले उनके नाना चौधरी मनीराम गोदारा चुनाव लड़ चुके हैं। वे बंसीलाल की सरकार में मंत्री भी रहे हैं। बता दें कि आदमपुर पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल का गढ़ रहा है। फिलहाल वहां से उनके पुत्र एवं कांग्रेस नेता कुलदीप बिश्नोई विधायक हैं।
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टिकट के लिए सियासी दांवपेंच शुरू
हरियाणा की राजनीतिक का केंद्र कहे जाने वाले रोहतक में सियासी दांवपेंच लड़ने शुरू हो गए हैं। राजनीति में अपने भविष्य को लेकर लोग एक पार्टी छोड़ दूसरी का दामन थामने लगे हैं। विधानसभा चुनाव में टिकटों को लेकर भी कयास लगाने लगे हैं। कांग्रेस की पूर्व निगम मेयर, जजपा जिला अध्यक्ष व अन्य लोगों के दूसरी नाव में सवार होने को इसी से जोड़ कर देखा जा रहा है।
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कौन हैं प्रो. संजय जोहर
पीजीआई के एनेस्थीसिया विभाग में तैनात प्रो. संजय जोहर किसान परिवार से संबंध रखते हैं। हिसार के लांधड़ी गांव में रहने वाले इनके पिता चौधरी रामस्वरूप खेतीबाड़ी करते हैं। इनके पास व्यवसायिक पायलेट का भी लाइसेंस है। प्रो. जोहर ने पीजीआई से एमबीबीएस की। वर्ष 1993 में इंटरनशिप पूरी की।
वर्ष 1995 में एचसीएमएस (हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज) में कार्यभार संभाला। यहीं कोर्ट से एनेस्थीसिया विभाग में एमडी की। वर्ष 2003 में सिविल अस्पताल रोहतक में सेवाएं दी। वर्ष 2004 में पीजीआई में बतौर सीनियर रेजिडेंट के तौर पर कार्यभार संभाला। इसके बाद यहीं एसिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर व प्रोफेसर बने। अब पिछले सात वर्ष से यहां बतौर प्रोफेसर कार्यरत हैं।
पीजीआई का राजनीति से संबंध
प्रो. संजय जोहर पीजीआई से राजनीति में कदम रखने वाले पहले नहीं हैं। इनसे पूर्व कई डॉक्टर राजनीति में पदार्पण कर चुके हैं। इसमें डॉ. अरविंद शर्मा, डॉ. केडी शर्मा, डॉ. कमल गुप्ता, डॉ. शंकर भारद्वाज, डॉ. रमेश छाबड़ा, डॉ. जगबीर, डॉ. सुशील इंदौरा, डॉ. अजय चौधरी, डॉ. बनवारी लाल का नाम मुख्य हैं।
आदमपुर के लोगों के कहने पर पिछले वर्ष संस्थान से अनुमति लेकर चुनाव के लिए आवेदन किया था। यह कार्रवाई देरी से की गई। इस कारण सब कुछ तय होने के बाद भी चुनावी टिकट मिस हो गई। इस बार भी लोगों ने चुनाव लड़ने का आग्रह किया। इसके चलते संस्थान से अनुमति मांगी है। यहां से एनओसी मिलने पर चुनाव के लिए प्रयास करूंगा।
प्रो. संजय जोहर, एनेस्थीसिया विभाग, पीजीआईएमएस।
संस्थान के चिकित्सक भी चुनाव लड़ सकते हैं। प्रो. संजय ने चुनाव के लिए अनुमति मांगी थी। उन्हें मंजूरी दे दी गई है। वे चुनाव लड़ सकते हैं। चुनाव जीतने पर नौकरी से त्यागपत्र देना होगा।
प्रो. ओपी कालरा, वीसी, हेल्थ यूनिवर्सिटी
वर्ष 1995 में एचसीएमएस (हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज) में कार्यभार संभाला। यहीं कोर्ट से एनेस्थीसिया विभाग में एमडी की। वर्ष 2003 में सिविल अस्पताल रोहतक में सेवाएं दी। वर्ष 2004 में पीजीआई में बतौर सीनियर रेजिडेंट के तौर पर कार्यभार संभाला। इसके बाद यहीं एसिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर व प्रोफेसर बने। अब पिछले सात वर्ष से यहां बतौर प्रोफेसर कार्यरत हैं।
पीजीआई का राजनीति से संबंध
प्रो. संजय जोहर पीजीआई से राजनीति में कदम रखने वाले पहले नहीं हैं। इनसे पूर्व कई डॉक्टर राजनीति में पदार्पण कर चुके हैं। इसमें डॉ. अरविंद शर्मा, डॉ. केडी शर्मा, डॉ. कमल गुप्ता, डॉ. शंकर भारद्वाज, डॉ. रमेश छाबड़ा, डॉ. जगबीर, डॉ. सुशील इंदौरा, डॉ. अजय चौधरी, डॉ. बनवारी लाल का नाम मुख्य हैं।
आदमपुर के लोगों के कहने पर पिछले वर्ष संस्थान से अनुमति लेकर चुनाव के लिए आवेदन किया था। यह कार्रवाई देरी से की गई। इस कारण सब कुछ तय होने के बाद भी चुनावी टिकट मिस हो गई। इस बार भी लोगों ने चुनाव लड़ने का आग्रह किया। इसके चलते संस्थान से अनुमति मांगी है। यहां से एनओसी मिलने पर चुनाव के लिए प्रयास करूंगा।
प्रो. संजय जोहर, एनेस्थीसिया विभाग, पीजीआईएमएस।
संस्थान के चिकित्सक भी चुनाव लड़ सकते हैं। प्रो. संजय ने चुनाव के लिए अनुमति मांगी थी। उन्हें मंजूरी दे दी गई है। वे चुनाव लड़ सकते हैं। चुनाव जीतने पर नौकरी से त्यागपत्र देना होगा।
प्रो. ओपी कालरा, वीसी, हेल्थ यूनिवर्सिटी